कुत्ते की होती है पूजा, शिकार से शुरू हुई कहानी, फिर मंदिर बना

Last Updated:May 05, 2026, 16:52 IST
Jalore News: जालौर के तिलोरा गांव में एक अनोखा मंदिर है, जहां भगवान नहीं बल्कि एक कुत्ते की पूजा होती है. एक शिकार के दौरान वफादार कुत्ते ने मालिक की जान बचाते हुए जान दे दी. बाद में उसे भुला दिया गया, लेकिन परिवार पर संकट आने लगे. साधु की सलाह पर वहीं मंदिर बना, जो आज आस्था और वफादारी का प्रतीक है.
जालौर. जालौर जिले के तिलोरा गांव में एक ऐसा मंदिर है, जो अपनी अनोखी मान्यता के कारण दूर-दूर तक चर्चा में रहता है. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां किसी देवी-देवता की नहीं, बल्कि एक वफादार कुत्ते की पूजा की जाती है. लोग इसे श्रद्धा से कूतरा बावजी का मंदिर कहते हैं. यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि वफादारी, त्याग और आस्था की जीवित मिसाल माना जाता है.
कहा जाता है कि कई साल पहले तिलोरा गांव की वाचल नाड़ी के पास घना जंगल हुआ करता था, जहां जंगली सूअर और बगेरू जैसे खतरनाक जानवर रहते थे. उसी दौरान एक आदमखोर जंगली सूअर ने इलाके में आतंक मचा रखा था. वह किसानों की फसलें बर्बाद करता था और लोगों पर भी हमला कर देता था, जिससे ग्रामीणों में डर का माहौल बना रहता था.
कुत्ते की वफादारी से बची जानतब बाकरपुरा के ठाकुर खंगाल सिंह राठौड़ अपने शिकारी दल के साथ उस सूअर का शिकार करने निकले. भागते-भागते वह सूअर तिलोरा के जंगलों में जा छिपा. जब ठाकुर और उनका दल वहां पहुंचे, तभी अचानक झाड़ियों से निकलकर सूअर ने हमला कर दिया. इसी दौरान उनके साथ आया एक बहादुर कुत्ता आगे बढ़ा और सूअर से भिड़ गया. दोनों के बीच जबरदस्त संघर्ष हुआ. मौके का फायदा उठाकर ठाकुर ने सूअर को गोली मार दी, लेकिन इस लड़ाई में कुत्ता बुरी तरह घायल हो गया और उसने वहीं दम तोड़ दिया.
बलिदान के बाद बना मंदिरउस समय कुत्ते के इस बलिदान को नजरअंदाज कर दिया गया और उसका शव वहीं छोड़ दिया गया. लेकिन कुछ साल बाद ठाकुर परिवार पर लगातार संकट आने लगे. तब एक साधु ने सलाह दी कि उस वफादार कुत्ते की स्मृति में मंदिर बनाकर उसकी पूजा करनी चाहिए. इसके बाद उसी स्थान पर कूतरा बावजी का मंदिर बनाया गया.
स्थानीय निवासी श्यामलाल बताते हैं कि उनके बुजुर्गों से उन्होंने सुना है कि यह मंदिर वफादारी की सबसे बड़ी मिसाल है. ठाकुर परिवार हर साल यहां आकर पूजा-अर्चना करता है और गांव के लोग भी मानते हैं कि यहां आने से संकट दूर होते हैं.
आज भी इस मंदिर में ग्रामीण श्रद्धा से माथा टेकते हैं. यह कहानी सिर्फ एक कुत्ते की नहीं, बल्कि उस अटूट निष्ठा की है, जो समय के साथ और गहरी होती गई. कूतरा बावजी का मंदिर यह संदेश देता है कि सच्ची वफादारी कभी भुलाई नहीं जाती, बल्कि एक दिन आस्था का रूप ले लेती है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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