Rajasthan

अद्भुत नक्काशी, तीन मंजिला इमारत… 800 साल से मिट्टी के गारे पर खड़ा है देवसोमनाथ शिव मंदिर!

Last Updated:May 05, 2026, 10:40 IST

Rajasthan Dharohar: आमतौर पर हमने कई मंदिरो के अलग-अलग किस्से सुने होंगे. लेकिन यह मंदिर अपने आप में कई कहानियां समेटे हुए है. डूंगरपुर के पास 800 साल पुराना देवसोमनाथ मंदिर बिना सीमेंट के 150 पत्थर के खंभों पर खड़ा है. आखिर लोग इस मंदिर को देखकर हैरान क्यों हो जाते हैं. दरअसल, इसका सबसे बड़ा कारण है इस मंदिर की बारीक नक्काशी और सोमनदी किनारे स्थित यह शिव मंदिर बड़ा पर्यटन केंद्र.

राजस्थान का धरोहर. राजस्थान की धरती पर इतिहास और आस्था के कई अनमोल खजाने छिपे हुए हैं. इन्हीं में से एक है डूंगरपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित देवसोमनाथ मंदिर, जो आज भी अपनी अद्भुत बनावट और मजबूती के कारण लोगों को हैरान कर देता है. खास बात यह है कि करीब 800 साल पुराना यह मंदिर बिना सीमेंट के खड़ा है और समय की कई मार झेलने के बावजूद आज भी मजबूती से अपनी जगह पर खड़ा हुआ है.

लोकल 18 की धरोहर सीरीज में आज हम आपको इस ऐतिहासिक मंदिर से रूबरू करा रहे हैं. यह मंदिर सोमपुरा समाज के कुशल शिल्पकारों की कला का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है. मंदिर के निर्माण में सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया, बल्कि मिट्टी के गारे और चूने से इसे तैयार किया गया था. यही वजह है कि आज भी इसकी मजबूती और संरचना इंजीनियरिंग का एक अनोखा नमूना मानी जाती है.

अन्य से कितना अलग है यह मंदिरदेवसोमनाथ मंदिर 150 मजबूत पत्थर के खंभों पर टिका हुआ है और इसकी संरचना तीन मंजिला है. मंदिर की दीवारों और खंभों पर की गई बारीक नक्काशी उस दौर की कला और शिल्प कौशल को बखूबी दर्शाती है. हर खंभा और हर पत्थर जैसे अपनी एक कहानी कहता नजर आता है.

इतिहासकारों के अनुसार, यह मंदिर 11वीं सदी का है और भगवान शिव को समर्पित है. मंदिर के गर्भगृह में स्थापित स्फटिक का शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है. दूर-दूर से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इस ऐतिहासिक धरोहर को करीब से देखने की इच्छा रखते हैं.

मंदिर के बगल में बहती है यह प्रमुख नदीमंदिर के पास बहने वाली सोमनदी इस स्थान की खूबसूरती को और भी बढ़ा देती है. हरियाली और शांत वातावरण के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी एक खास केंद्र बन चुका है. खासकर बारिश और सर्दियों के मौसम में यहां का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है.

आधुनिक तकनीक को चुनौती देता मंदिरस्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा है. जरूरत है कि इस धरोहर को सहेज कर रखा जाए और इसकी ऐतिहासिक महत्वता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए. देवसोमनाथ मंदिर आज भी अपने अद्भुत निर्माण और ऐतिहासिक महत्व के कारण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जो यह साबित करता है कि पुराने समय की कारीगरी आज भी आधुनिक तकनीक को चुनौती देती नजर आती है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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