साउथ कोरिया को क्या मैसेज देने जा रहे किम जोंग उन, संविधान में कर दिया बड़ा बदलाव

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साउथ कोरिया को क्या मैसेज देने जा रहे किम जोंग उन, संविधान में कर दिया बदलाव
Last Updated:May 06, 2026, 17:46 IST
यह संशोधन मार्च में उत्तर कोरिया की विधायिका जिसें सुप्रीम पीपुल्स असेंबली कहा जाता है उसकी की बैठक में किया गया था. नॉर्थ कोरियाई नेता किम जोंग उन ने मार्च में एक नीतिगत संबोधन के दौरान सियोल को “सबसे शत्रुतापूर्ण देश” करार दिया था. ये घटनाक्रम उसके बाद का है.
किम जोंग उन (फाइल फोटो)
नॉर्थ कोरिया ने अपने संविधान से साउथ कोरिया के साथ एकीकरण करने वाले प्रावधान को हटा दिया है. बुधवार को समाचार एजेंसियों एएफपी और रॉयटर्स ने दस्तावेज की समीक्षा की है. नॉर्थ कोरिया का ये कदम साउथ कोरिया के प्रति कड़े रुख को दिखा रहा है.
ऐसा माना जा रहा है कि यह संशोधन मार्च में उत्तर कोरिया की विधायिका जिसें सुप्रीम पीपुल्स असेंबली कहा जाता है उसकी की बैठक में किया गया था. साउथ कोरिया के एकीकरण के मामले पर सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ली जंग-चुल ने ब्रीफिंग की दी है. उन्होंने मंत्रालय में ब्रीफिंग के दौरान बताया कि यह पहली बार है जब नॉर्थ कोरिया ने अपने संविधान में क्षेत्रीय खंड जोड़ा है.
नए दस्तावेज में क्या बताया गया है
नॉर्थ कोरियाई नेता किम जोंग उन ने मार्च में एक नीतिगत संबोधन के दौरान सियोल को “सबसे शत्रुतापूर्ण देश” करार दिया था. ये घटनाक्रम उसके बाद का है. इस दस्तावेज के अनुसार, नए अनुच्छेद 2 में कहा गया है कि नार्थ कोरिया के क्षेत्र में उत्तर में “चीन के जनवादी गणराज्य और रूसी संघ की सीमा से लगा हुआ है और दक्षिण में कोरिया गणराज्य” की है.” इसमें कोरिया गणराज्य का मतलब साउथ कोरिया है. साथ ही उस भूमि पर आधारित क्षेत्रीय जल और हवाई क्षेत्र शामिल है.
इस खंड में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया अपने क्षेत्र के “किसी भी उल्लंघन को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा.” लेकिन इसमें दक्षिण कोरिया के साथ अपनी सीमा के स्थान के बार में नहीं बताया है. इसमें न ही पीले सागर में ‘नॉर्दर्न लिमिट लाइन’ जैसी विवादित समुद्री सीमाओं का साफ रूप से जिक्र किया गया है.
साउथ कोरिया कर चुका है बात की अपील
नॉर्थ कोरिया ने साउथ के साथ वार्ता को नकारा है. साउथ कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग ने बिना किसी शर्त के नॉर्थ कोरिया के साथ बातचीत की अपील की है. उन्होंने कहा है कि दोनों देशों का भाग्य “शांति के फूल खिलाना” है. लेकिन नॉर्थ कोरिया ने ली प्रशासन के इन प्रस्तावों पर कोई रिएक्शन नहीं दिया है.
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