चीन ने एक तीर से लगाए थे दो निशाने, इधर वाजपेयी को बुलाया बीजिंग, उधर वियतनाम पर कर दिया हमला

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चीन के एक तीर से दो निशाने, वाजपेयी को बुलाया बीजिंग, वियतनाम पर कर दिया हमला
Last Updated:May 06, 2026, 17:48 IST
यह वह वक्त था, जब चीन ने एक तीर से भारत और वियतनाम दोनों को निशाना बनाने की कोशिश की थी. बातचीत के बहाने भारतीय विदेश मंत्री को चीन बुलाकर चीन ने वियतनाम के साथ हमारे रिश्तों को तोड़ने की साजिश की थी. क्या है यह पूरा मामला, जानने के लिए पढ़ें आगे…
भारत और वियतनाम के रिश्तों को तोड़ने के लिए चीन ने 1979 में एक बड़ी चाल चली थी.
India-Vietnam Relation & China’s Conspiracy: फरवरी 1979 का महीने में एशियाई इतिहास एक खतरनाक मोड़ पर आ खड़ा हुआ था. कूटनीति दम तोड़ती नजर आ रही थी और युद्ध दहलीज पर आ खड़ा हुआ था. यह वही वक्त था, जब अटल बिहारी वाजपेयी चीन की राजधानी बीजिंग में थे और ड्रैगन आर्मी ने वियतनाम पर हमला बोल दिया था. दरअसल, इस पूरा घटनाक्रम चीन की गहरी साजिश का नतीजा था. चीन एक तीर से कई निशाने लगाने को तैयार बैठा था. चीन ने पहले बातचीत के बहाने तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को बीजिंग बुलाया, फिर उसी समय वियतनाम पर हमला बोल दिया.
ऐसा कर चीन वियतनाम को यह जताना चाहता था कि इस मुहाने पर भारत उसके साथ खड़ा है. चीन की कोशिश थी कि वह भारत और वियतनाम की दशकों पुरानी दोस्ती में गांठ पैदा कर सके. उस समय के भारत और चीन के रिश्तों की बात करें तो 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद दोनों देशों के बीच 17 सालों तक कोई राजनयिक संवाद नहीं हुआ था. उस दौरान तनाव इतना अधिक था कि दोनों पड़ोसी एक-दूसरे से लगभग कटे हुए थे. ऐसे में, बीजिंग से आए बातचीत के बुलावे को सभी एक बेहतर अवसर की तरह देख रहा था. शायद यही वजह थी कि 1962 के बाद पहली बार कोई केबिनेट मंत्री चीन का यात्रा कर रहा था.
इस घटनाक्रम का भारत और चीन के रिश्तों पर क्या असर पड़ा?
बींजिंग से वापस लौटने के बाद 20 और 21 फरवरी 1979 को तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्यसभा और लोकसभा में विस्तृत बयान दिए. उन्होंने चीन की इस हरकता को गलत बताया और वियतनाम के प्रति भारत की एकजुटता की बात कही. सदन में जमकर बहस हुई. भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि हालांकि वह चीन के साथ रिश्ते सुधारना चाहती है, लेकिन किसी भी देश के अन्य देश पर हमले को वह सही नहीं ठहरा सकती. अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी चीन यात्रा रोककर एक सख्त राजनयिक संदेश दिया था. लेकिन इस संदेश के बावजूद भारत ने चीन के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें लगातार जारी रखीं.
About the AuthorAnoop Kumar MishraAssistant Editor
Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें
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इस घटनाक्रम का भारत और चीन के रिश्तों पर क्या असर पड़ा?
बींजिंग से वापस लौटने के बाद 20 और 21 फरवरी 1979 को तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्यसभा और लोकसभा में विस्तृत बयान दिए. उन्होंने चीन की इस हरकता को गलत बताया और वियतनाम के प्रति भारत की एकजुटता की बात कही. सदन में जमकर बहस हुई. भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि हालांकि वह चीन के साथ रिश्ते सुधारना चाहती है, लेकिन किसी भी देश के अन्य देश पर हमले को वह सही नहीं ठहरा सकती. अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी चीन यात्रा रोककर एक सख्त राजनयिक संदेश दिया था. लेकिन इस संदेश के बावजूद भारत ने चीन के साथ राजनयिक संबंधों को सामान्य करने की कोशिशें लगातार जारी रखीं.
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