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Success Story: 2 हेक्टेयर खेती से सालाना 5.5 लाख की कमाई, किसान खेमचन्द बने मिसाल, जानें सफलता का मंत्र

Last Updated:May 08, 2026, 12:25 IST

Alwar News: खैरथल-तिजारा के किसान खेमचन्द जांगिड ने प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीक से अपनी वार्षिक आय 5.5 लाख रुपये तक पहुँचा दी है. वे 2 हेक्टेयर भूमि पर बिना रसायनों के फसल उगा रहे हैं और वर्मीकम्पोस्ट का उत्पादन कर रहे हैं. खेती के साथ-साथ वे पशुपालन और कृषि वानिकी भी कर रहे हैं. कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं और अनुदान का लाभ उठाकर खेमचन्द आज एक प्रगतिशील किसान के रूप में पहचाने जाते हैं, जो क्षेत्र के अन्य किसानों को भी जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं.

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खैरथल-तिजारा. राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर किसान अब आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहे हैं. जिले की किशनगढ़-बास तहसील के ग्राम बघेरीकला निवासी किसान खेमचन्द जांगिड की सफलता की कहानी आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है. खेमचन्द ने आधुनिक तकनीक और प्राकृतिक खेती को अपनाकर न केवल अपनी आय बढ़ाई है, बल्कि अपने आत्मविश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है. वे जैविक खेती, पशुपालन और उद्यानिकी के संगम से आज एक प्रगतिशील किसान के रूप में उभरे हैं.

किसान खेमचन्द जांगिड वर्तमान में लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. वे अपने खेतों में जीवामृत, बीजामृत और घनामृत का उपयोग करते हैं, जिससे वे बिना किसी रासायनिक खाद और कीटनाशकों के फसल और सब्जियों का भरपूर उत्पादन कर रहे हैं. जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण उनकी उपज को बाजार में बेहतर मूल्य मिल रहा है. इसके अलावा, उन्होंने खेत पर अपनी वर्मीकम्पोस्ट इकाई भी स्थापित की है, जहां वे उच्च गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार करते हैं और अन्य किसानों को केंचुए उपलब्ध कराकर उन्हें भी प्रेरित करते हैं.

पशुपालन और कृषि वानिकी का शानदार मेलखेमचन्द जांगिड ने खेती के साथ-साथ पशुपालन को भी अपनी आय का मुख्य जरिया बनाया है. उनके पास वर्तमान में 6 देशी गाय, 3 भैंस और बछड़े हैं, जिनसे प्राप्त दूध की बिक्री के साथ-साथ जैविक खेती के लिए खाद के संसाधन भी आसानी से मिल जाते हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने खेत की सीमाओं पर नीम, शीशम और सिरस के करीब 250 पौधे लगाकर कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया है. उद्यानिकी के तहत वे प्याज की खेती और गेहूं की उन्नत किस्म राज 4238 का सफल उत्पादन कर रहे हैं.

सरकारी योजनाओं ने बदली किस्मतखेमचन्द की सफलता में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का बड़ा योगदान रहा है. उन्हें जैविक गोवर्धन इकाई के लिए 10,000 रुपये, पाइपलाइन के लिए 18,000 रुपये और ड्रिप सिंचाई व मिनी फव्वारा योजना के तहत अनुदान प्राप्त हुआ है. इसके अलावा, उन्हें NMNF योजना के तहत भी वित्तीय सहायता मिल रही है. इन सभी प्रयासों के चलते उनकी अनुमानित वार्षिक आय अब 5.5 लाख रुपये तक पहुंच गई है. उनकी यह यात्रा साबित करती है कि आधुनिक तकनीक और कड़ी मेहनत से कम लागत में भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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