Rajasthan

Kota Medical College | प्रसूताओं की मौत का जिम्मेदार कौन?

Last Updated:May 09, 2026, 05:54 IST

Kota Hospital Negligence News: कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद संक्रमण फैलने से दो महिलाओं की मौत हो गई और चार की हालत गंभीर है. जांच में वार्ड की दीवारों पर सीलन और फंगस पाए गए हैं, जिसे किडनी फेल होने का मुख्य कारण माना जा रहा है. आरोप है कि अस्पताल ने जांच से पहले ही वार्ड का फ्यूमिगेशन कराकर सबूत मिटाने की कोशिश की है. जयपुर की विशेष टीम मामले की जांच कर रही है, जबकि पीड़ित परिवार अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं.

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कोटा. राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने सरकारी चिकित्सा व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है. यहां सिजेरियन डिलीवरी के बाद दो प्रसूताओं की मौत और कई अन्य महिलाओं की गंभीर स्थिति ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है. अस्पताल प्रशासन जहां इसे तकनीकी चूक बताने की कोशिश कर रहा है, वहीं परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और संक्रमण फैलाने के गंभीर आरोप लगाए हैं.

घटना 4 मई की है, जब न्यू मेडिकल कॉलेज के गायनिक वार्ड में 10 महिलाओं की सिजेरियन डिलीवरी की गई थी. ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद इनमें से 6 महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. सभी मरीजों में एक जैसे लक्षण देखे गए—ब्लड प्रेशर का तेजी से गिरना, यूरिन बंद होना और अंततः किडनी फेल होने जैसी जानलेवा स्थिति पैदा हो गई. इस भयावह लापरवाही के कारण 28 वर्षीय पायल और 20 वर्षीय ज्योति की मौत हो चुकी है. शेष चार महिलाओं की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है, जिन्हें उच्च स्तरीय उपचार के लिए जयपुर रेफर करने की तैयारी चल रही है.

सीलन और फंगस के बीच ‘ऑपरेशन’ का खेलमामले की पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं. जिस पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में सर्जरी के बाद महिलाओं को शिफ्ट किया गया था, उसकी दीवारों पर जगह-जगह सीलन और फंगस जमी हुई थी. मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, सर्जरी के बाद मरीजों की इम्युनिटी कम होती है और ऐसी स्थिति में फंगस संक्रमण जानलेवा साबित हो सकता है. अस्पताल की इस बुनियादी स्वच्छता में कमी ने ही शायद इन महिलाओं के जीवन को खतरे में डाला है.

सबूत मिटाने की कोशिश या जल्दबाजी?सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की कार्रवाई पर खड़ा हो रहा है. मेडिकल प्रोटोकॉल कहता है कि संक्रमण की स्थिति में सबसे पहले वार्ड से बैक्टीरिया के सैंपल लिए जाने चाहिए. लेकिन कोटा अस्पताल प्रशासन ने जांच टीम के पहुंचने से पहले ही पूरे वार्ड का फ्यूमिगेशन और सैनिटाइजेशन करवा दिया. इससे इस बात की आशंका प्रबल हो गई है कि संक्रमण के वास्तविक कारणों और बैक्टीरिया के साक्ष्य नष्ट हो चुके हैं. क्या यह सब किसी बड़ी लापरवाही को छिपाने के लिए किया गया?

दवाओं और मॉनिटरिंग पर उठते सवालजांच के घेरे में वे दवाएं भी हैं जो सभी 10 महिलाओं को दी गई थीं, जिनमें एमिकासिन और डाइक्लोफेनाक जैसे इंजेक्शन शामिल थे. विशेषज्ञ अब दवाओं के ओवरडोज या रिएक्शन की संभावना तलाश रहे हैं. फिलहाल ड्रग विभाग ने 15 दवाओं के सैंपल लिए हैं. वर्तमान में धन्नी बाई, चंद्रकला, सुशीला और रागिनी जैसी महिलाएं जीवन और मौत के बीच जूझ रही हैं. जनता अब इस मामले में केवल कागजी जांच नहीं, बल्कि दोषियों के खिलाफ हत्या जैसी धाराओं में कार्रवाई की मांग कर रही है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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