देवकी ने जन्म दिया… यशोदा ने निभाया फर्ज! बाड़मेर की 3523 महिलाओं ने अनजान ‘कान्हा’ को पिलाया ममता का दूध

Last Updated:May 10, 2026, 06:53 IST
Mothers Day Special 2026: मदर्स डे के खास मौके पर राजस्थान के बाड़मेर से इंसानियत और मातृत्व की अनोखी मिसाल सामने आई है. यहां 3523 मांओं ने अपने बच्चों के साथ-साथ उन नवजात शिशुओं को भी ममता का अमृत पिलाया, जिनकी माताएं किसी कारणवश उन्हें दूध नहीं पिला पा रही थीं. इन महिलाओं ने ह्यूमन मिल्क बैंक और अस्पतालों के जरिए स्तनपान दान कर कई मासूमों को नया जीवन दिया. इस पहल को ‘देवकी ने जन्म दिया, यशोदा ने जीवन दिया’ की भावना से जोड़ा जा रहा है. डॉक्टरों के अनुसार मां का दूध नवजात के लिए अमृत समान होता है, जो उसे बीमारियों से बचाने में मदद करता है. बाड़मेर की इन महिलाओं की संवेदनशीलता और त्याग अब पूरे प्रदेश में प्रेरणा का संदेश दे रही है.
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बाड़मेर. कृष्ण को जन्म देने वाली देवकी थीं लेकिन उन्हें पालने और ममता का स्पर्श देने वाली यशोदा बनीं. कुछ ऐसी ही कहानी बाड़मेर जिला अस्पताल के मदर मिल्क बैंक की है जहां 3523 मांएं ‘यशोदा मां’ बनकर उन मासूमों की जिंदगी बचा रही हैं जिन्हें अपनी मां का दूध नसीब नहीं हो पाया है.
मां… यह शब्द सुनते ही आंखों के सामने एक ऐसी तस्वीर उभरती है जो अपने बच्चे के लिए हर दर्द सह लेती है लेकिन बाड़मेर में कुछ मांएं ऐसी भी हैं जिन्होंने सिर्फ अपने बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि उन मासूमों के लिए भी ममता बहाई है जिन्हें वे कभी जानती तक नहीं थीं. बाड़मेर जिला अस्पताल में 4 मार्च 2018 को शुरू हुआ मदर मिल्क बैंक ऐसी ही हजारों अनकही कहानियों का गवाह है.
6 माह तक नही होता है खराब, -19 डिग्री सेल्सियस पर किया जाता है दूध संग्रहणयहां अब तक 3523 माताओं ने अपना दूध दान किया है. इन मांओं के दान से 29 हजार 882 यूनिट दूध संग्रहित हुआ और 3165 नवजात बच्चों को जीवन की नई उम्मीद मिली है. यह दूध 6 माह तक खराब नही होता है और इसे -19 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है. मदर मिल्क बैंक के प्रभारी ड़ॉ महेंद्र चौधरी है और वार्ड प्रभारी पुष्पा कंवर है. इसके साथ ही गंगा चौधरी, मंजू भाटी और सुशीला चौधरी यहां आने वाली हर माता को दूध डोनेट करने के लिए प्रेरित करती है.
हर बूंद की होती है जांच फिर पहुंचती है नवजात तकमदर मिल्क बैंक में किसी भी माता का दूध सीधे उपयोग में नहीं लिया जाता है. यहां हर मां का दूध जांच के बाद ही संग्रहण किया जाता है. HIV और अन्य संक्रमणों की स्क्रीनिंग के बाद दूध सुरक्षित प्रक्रिया से स्टोर किया जाता है ताकि नवजात तक पूरी तरह सुरक्षित तरीके से पहुंच सके. अप्रैल 2026 की बात की जाए तो महज एक माह में पेमी पत्नी पूनमाराम ने 85 यूनिट, बबिता पत्नी बिशाल ने 50 यूनिट और नूरी पत्नी सहाय ने 46 यूनिट मिल्क डोनेट किया है.
3523 महिलाएं बनी यशोदा माँ, कान्हा को पिलाया ममता का अमृतबाड़मेर जिला अस्पताल अधीक्षक ड़ॉ हनुमान राम चौधरी के मुताबिक हर मां अपने बच्चे को जिंदगी देती है लेकिन बाड़मेर की इन मांओं ने साबित किया कि ममता रिश्तों की मोहताज नहीं होती है. एक मां का दूध किसी दूसरे घर की उम्मीद भी बन सकता है. बाड़मेर जिला अस्पताल के मदर मिल्क बैंक में 3523 महिलाओं ने अपना दूध दान किया है.
3523 माताओं ने किया दूध दान, 29 हजार 882 यूनिट से 3165 नवजात हुए लाभान्वितमदर मिल्क बैंक की मंजू भाटी लोकल18 से खास बातचीत करते हुए बताती है कि वर्तमान में बैंक में 220 यूनिट यानी 6600 एमएल दूध सुरक्षित उपलब्ध है. वहीं वर्ष 2018 में करीब 1000 यूनिट दूध अजमेर भी भेजा गया था जबकि 12 हजार 220 यूनिट दूध सामुदायिक जरूरतों के लिए उपयोग में लिया गया है. उन्होंने कहा कि अब 3523 माताओं ने दूध डोनेट किया है जिससे 29 हजार 882 यूनिट दूध संग्रहित हुआ है.
About the AuthorJagriti Dubey
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