क्या आप जानते हैं? महिलाएं रोज सुबह चूल्हे पर लेप क्यों लगाती हैं? इसके पीछे का सच जानकर रह जाएंगे हैरान!

Last Updated:May 10, 2026, 12:41 IST
Alwar News: अलवर के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं आज भी मिट्टी के चूल्हे पर गोबर और मिट्टी का लेप करने की परंपरा निभा रही हैं. इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह है कि गोबर-मिट्टी के लेप में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो कीटाणुओं और मच्छरों को दूर रखते हैं. साथ ही, यह लेप चूल्हे की दरारों को भरकर उसे मजबूती प्रदान करता है और ईंधन की बचत में सहायक होता है. ग्रामीण महिलाएं इसे स्वच्छता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक मानती हैं, जिससे चूल्हे की रोटी का स्वाद और स्वास्थ्य लाभ दोनों बढ़ जाते हैं.
Alwar News: आधुनिकता के इस दौर में जहाँ शहरों में गैस चूल्हे और माइक्रोवेव ने रसोई में जगह बना ली है, वहीं राजस्थान के अलवर जिले के ग्रामीण अंचलों में आज भी मिट्टी के चूल्हे की महक बरकरार है. यहाँ की महिलाएं न केवल चूल्हे पर रोटियां बनाती हैं, बल्कि एक विशेष परंपरा का पालन भी करती हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं रोज सुबह रसोई शुरू करने से पहले मिट्टी के चूल्हे पर गोबर और काली मिट्टी के मिश्रण का लेप करती हैं. यह केवल दिखावा या साफ-सफाई की प्रक्रिया मात्र नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण छिपे हुए हैं.
जानकारों और ग्रामीण महिलाओं के अनुसार, मिट्टी और गोबर के इस मिश्रण में प्राकृतिक एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं. चूल्हे पर रोजाना लेप करने से आसपास के सूक्ष्म कीटाणु नष्ट हो जाते हैं और मक्खियों का बैठना कम हो जाता है. गर्मी के मौसम में जब मच्छरों और दीमक का प्रकोप बढ़ जाता है, तब यह लेप चूल्हे को सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन घरेलू उपाय साबित होता है. इससे रसोई का वातावरण शुद्ध रहता है और भोजन बनाने की जगह पूरी तरह स्वच्छ बनी रहती है.
चूल्हे की उम्र और ईंधन की बचतचूल्हे पर रोजाना लेप करने का एक बड़ा कारण इसकी मजबूती भी है. लगातार आग जलने के कारण मिट्टी के चूल्हे में दरारें आ जाती हैं. यदि इन दरारों को समय पर न भरा जाए, तो चूल्हा बीच से टूट सकता है. महिलाएं सुबह-सुबह लेप के जरिए इन दरारों को भर देती हैं, जिससे चूल्हा लंबे समय तक चलता है. साथ ही, रोजाना लेप करने से चूल्हा अंदर से चिकना और साफ रहता है, जिससे बर्तन को आंच सीधी और तेज लगती है. इससे लकड़ी या उपले (ईंधन) की भी काफी बचत होती है.
स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीकग्रामीण महिलाओं का मानना है कि चूल्हे पर बनी रोटी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद होती है और इससे पेट में गैस जैसी समस्याएं नहीं होतीं. राजस्थान की संस्कृति में चूल्हे को लेपना शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है. अलवर के गाँवों में आज भी महिलाएं जौहड़ (तालाब) से काली मिट्टी निकालकर बड़े चाव से चूल्हे तैयार करती हैं और अपनी इस विरासत को सहेजकर रखे हुए हैं. यह परंपरा न केवल स्वच्छता का संदेश देती है, बल्कि हमें अपनी जड़ों से भी जोड़कर रखती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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Alwar,Alwar,Rajasthan



