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‘लग जा गले’ से ‘झुमका गिरा रे’ तक, इन 7 गानों में समाई है सदाबहार साधना की पूरी दास्तान

Last Updated:May 11, 2026, 15:21 IST

साधना के 7 मशहूर गाने सिर्फ सुपरहिट गीत नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी के अलग-अलग रंगों की झलक भी हैं. कहीं उनमें मासूम मोहब्बत दिखाई देती है, तो कहीं अधूरी चाहत का दर्द। कभी उनकी आंखों में रहस्य नजर आता है, तो कभी मुस्कान में छिपा अकेलापन. यही वजह है कि उनके गाने आज भी लोगों के दिलों को छू जाते हैं. पर्दे पर हर गीत के साथ साधना ने सिर्फ अभिनय नहीं किया, बल्कि भावनाओं को जीकर दिखाया. शायद इसी कारण उनके गाने वक्त के साथ पुराने नहीं हुए, बल्कि हर पीढ़ी के लिए और भी खास बनते चले गए.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं, जो सिर्फ अभिनेता या अभिनेत्री नहीं रहते, बल्कि एक एहसास बन जाते हैं. सादना उन्हीं सितारों में से एक थीं. उनकी मुस्कान, बड़ी-बड़ी आंखें और ‘साधना कट’ हेयरस्टाइल ने 60 के दशक में ऐसा जादू चलाया कि पूरा देश उनका दीवाना हो गया. लेकिन पर्दे पर हमेशा खुश दिखने वाली इस अभिनेत्री की असल जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए. दिलचस्प बात ये है कि साधना की जिंदगी को उनके मशहूर गानों से भी महसूस किया जा सकता है. हर गीत जैसे उनकी जिंदगी का एक अध्याय बन गया.

साधना का जन्म 2 सितंबर 1941 को कराची में हुआ था. भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई आ गया. बंटवारे की त्रासदी से उठकर, महज़ 1 रुपये की फीस से अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली साधना का फिल्मी करियर तो ब्लॉकबस्टर रहा, लेकिन निजी जिंदगी एक के बाद एक दर्द का सिलसिला बन गई. फिल्मों का सपना आंखों में था और किस्मत ने जल्द ही उनका साथ दिया. 1960 में रिलीज हुई ‘लव इन शिमला’ ने उन्हें स्टार बना दिया. इसके बाद उन्होंने लगातार कई हिट फिल्में दीं.

लग जा गले से फिर ये हसीन रात हो न हो: फिल्म ‘वो कौन थी’ का यह गाना साधना की जिंदगी का सबसे भावुक पहलू दर्शाता है. राज खोसला की इस मिस्ट्री थ्रिलर में साधना दोहरी भूमिका में थीं. गाने की उदासी और रहस्य उनकी अपनी जिंदगी की अनिश्चितता से मिलता है. लता मंगेशकर की आवाज और साधना की आंखों में छलकता दर्द आज भी सुनने वालों को रुला देता है. रहस्य, मासूमियत और अधूरी मोहब्बत… इस गाने में साधना का चेहरा आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है. इसी फिल्म का दूसरा गाना ‘नैना बरसे रिमझिम रिमझिम’ भी उनकी पहचान बन गया. इस गीत में उनकी आंखों की उदासी और रहस्यमयी मुस्कान ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था. कहा जाता है कि इस फिल्म के बाद साधना ‘मिस्ट्री क्वीन’ बन गई थीं.

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अभी ना जाओ छोड़कर: फिल्म हम दोनों का ये गाना आज भी लोग खूब गुनगुनाते हैं. आशा भोसले की आवाज ने इस गाने को अमर किया. देव आनंद के साथ फिल्म ‘हम दोनों’ का यह गाना लोगों को आज भी भावुक कर देता है. जब साधना इस गाने पर भावुक होती हैं तो लगता है कि उनकी असली जिंदगी का अकेलापन भी इसी गाने में कहीं दबा है.

झुमका गिरा रे: फिल्म मेरा साया के इस गाने में साधना की सबसे एनर्जेटिक और स्टाइलिश छवि दिखती है. मेरा साया फिल्म में उन्होंने एक मृत पत्नी की आत्मा की भूमिका निभाई थीं. गाने में उनकी नाचती हुई अदाएं और फ्रिंज हेयरस्टाइल ने उन्हें स्टाइल आइकन बना दिया. आशा भोंसले की गायिकी पर फिल्माया गया यह गाना उनके ओड़नी और झूमके का जादू था, वह चुलबुलापन जो पूरे भारत की लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गया.

तेरा मेरा प्यार अमर: फिल्म ‘असली नकली’ के इस गाने में साधना देव आनंद के साथ नजर आईं. इस हिट जोड़ी का यह गाना प्रेम की प्रेरणा देता है. साधना ने खुद अपनी प्रेम कहानी को असली जिंदगी में उतारा. निर्देशक आर. के. नैय्यर के साथ, जिनसे उन्होंने 7 मार्च 1966 को शादी रचाई. यही शादी बाद में अकेलेपन की वजह बनी. साल 1995 में साधना के पति आर.के नैय्यर का निधन हो गया.इसके बाद साधना अकेली पड़ गईं.

मेरा साया साथ होगा: यह गाना उनकी सबसे यादगार भूमिकाओं में से एक है. फिल्म में वे पति के साथ रहने वाली आत्मा बनकर आई थीं. गाने की उदासी उनके बाद के जीवन से जुड़ती है, जब बीमारी और पति की मृत्यु के बाद वे अकेली रह गईं.

नैनों में बदरा छाए: फिल्म मेरा सायाका यह गाना सबसे अलग है. यह उस भय और अकेलेपन की धुन है, जो साधना के आखिरी दिनों में सच हो गया जब उनकी तबीयत बिगड़ गई और 25 दिसंबर 2015 को उन्होंने मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली.

सफलता के शिखर पर साधना को हाइपरथायरॉइडिज्म की गंभीर बीमारी हो गई, जिससे उनका चेहरा सूज गया. उन्होंने अमेरिका जाकर सर्जरी कराई, लेकिन इससे उनका करियर प्रभावित हुआ. पति की मौत के बाद वे पूरी तरह अकेली पड़ गईं. आर्थिक संकट और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती रहीं. 25 दिसंबर 2015 को 74 साल की उम्र में साधना का निधन हो गया. साधना ने कभी हार नहीं मानी. उनकी जिंदगी हमें सिखाती है कि ग्लैमर के पीछे कितना दर्द छिपा होता है.

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