Rajasthan

Famous Temple : इस मंदिर में पहले शिव के दर्शन, फिर मजार पर सजदा… 1000 साल पुरानी परंपरा ने दुनिया को चौंका दिया

होमताजा खबरधर्म

1000 साल पुरानी परंपरा… इस मंदिर में पहले शिव के दर्शन, फिर मजार पर सजदा!

Last Updated:July 04, 2026, 11:51 IST

Hyderabad Temple : तेलंगाना के नीलेपल्ली गांव में श्री एकाम्बरी रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है. यहां शिव मंदिर के सामने मुस्लिम सूफी संत हजरत याकूब साहब की मजार है, जहां दोनों समुदाय पूजा करते हैं. पौराणिक मान्यताओं और स्कंद पुराण के अनुसार, त्रेतायुग में लंका विजय और रावण वध के बाद भगवान श्रीराम को ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए गुरु वशिष्ठ ने शिवलिंग स्थापित करने की सलाह दी थी.

ख़बरें फटाफट

हैदराबाद. भारत की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सौहार्द की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका जीवंत उदाहरण तेलंगाना के विकाराबाद जिले के बशीरबाद मंडल स्थित नीलेपल्ली गांव में देखने को मिलता है. यहां स्थित ऐतिहासिक श्री एकाम्बरी रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता और पौराणिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह सांप्रदायिक सद्भाव का भी अनोखा प्रतीक है. इस मंदिर में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की आस्था एक साथ दिखाई देती है.

मंदिर परिसर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव के गर्भगृह के ठीक सामने मुस्लिम सूफी संत हजरत याकूब साहब की मजार स्थित है. सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार, यहां आने वाले श्रद्धालु पहले भगवान शिव के दर्शन करते हैं और उसके बाद मजार पर भी श्रद्धा से शीश नवाते हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार हजरत याकूब साहब भगवान रामलिंगेश्वर के परम भक्त थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी परिसर में सेवा और इबादत में बिताया. उनके निधन के बाद उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए मंदिर परिसर में ही उनकी समाधि बनाई गई.

मंदिर का पौराणिक महत्वपौराणिक मान्यताओं और स्कंद पुराण के अनुसार, त्रेतायुग में लंका विजय और रावण वध के बाद भगवान श्रीराम को ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति पाने के लिए गुरु वशिष्ठ ने शिवलिंग स्थापित करने की सलाह दी थी. वनवास और दंडकारण्य यात्रा के दौरान भगवान श्रीराम ने इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना की थी. इसी कारण यहां विराजमान भगवान शिव को रामलिंगेश्वर स्वामी के नाम से जाना जाता है. धार्मिक महत्व के कारण इस क्षेत्र को दक्षिण काशी की उपाधि भी प्राप्त है.

आस्था और भाईचारे का अनोखा संगममंदिर का प्राकृतिक वातावरण और परिसर में स्थित प्राचीन पवित्र जलकुंड इसकी भव्यता को और बढ़ाते हैं. महाशिवरात्रि और उर्स के अवसर पर यहां का नजारा बेहद खास होता है. इन आयोजनों में हजारों श्रद्धालु बिना किसी भेदभाव के एक साथ शामिल होते हैं. हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर पूजा-अर्चना और इबादत करते हैं, जो आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है. नीलेपल्ली का यह ऐतिहासिक मंदिर आज भी देश को यह संदेश देता है कि आस्था का मूल उद्देश्य लोगों को जोड़ना है, बांटना नहीं. यह पावन स्थल भारत की गंगा-जमुनी तहजीब, धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता की गौरवशाली परंपरा को आज भी पूरी गरिमा के साथ संजोए हुए है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

Hyderabad,Hyderabad,Telangana

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj