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Moong Farming Tips | Farming Tips | how to make money from moong farming

Last Updated:May 13, 2026, 04:54 IST

Farming Tips: अजमेर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को 15 जुलाई तक मूंग की बुआई करने की सलाह दी है. एमएच 421 और एमएच 1142 जैसी उन्नत किस्में मात्र 60-65 दिनों में तैयार हो जाती हैं, जिससे किसान कम समय में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. यह फसल वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त पाई गई है. विशेषज्ञों ने हरी खाद के लिए मूंग के स्थान पर ढैंचा के उपयोग का सुझाव दिया है ताकि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ सके. पूरी रिपोर्ट विस्तार से पढ़ें.

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Ajmer: राजस्थान के किसानों के लिए कृषि जगत से एक उत्साहजनक खबर आई है. बदलते मौसम और आधुनिक कृषि तकनीकों के मेल से अब किसान कम समय में मूंग की उन्नत पैदावार ले सकते हैं. कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), अजमेर के विशेषज्ञों के अनुसार, किसान भाई अब ऐसी किस्मों का चयन कर रहे हैं जो न केवल कम पानी में तैयार होती हैं, बल्कि बेहद कम समय में कटाई के लिए भी उपलब्ध हो जाती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अप्रैल से जुलाई के मध्य तक मूंग की बुआई करना किसानों के लिए आर्थिक रूप से काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है.

अजमेर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. धर्मेंद्र सिंह भाटी ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि बाजार में मूंग की ऐसी उन्नत किस्में उपलब्ध हैं, जो मात्र 60 से 65 दिनों के भीतर पककर तैयार हो जाती हैं. इनमें एमएच 421 (MH 421) और एमएच 1142 (MH 1142) जैसी किस्में प्रमुख हैं. डॉ. भाटी ने बताया कि अप्रैल माह में जिन किसानों ने गर्मी की मूंग की बुआई की थी, उनकी फसल अब कटाई के स्तर पर पहुंच चुकी है. इन किस्मों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसान फसल की जल्दी कटाई कर अपने खेत को अगली फसल के लिए समय पर तैयार कर सकते हैं.

15 जुलाई तक बुआई का सुनहरा मौकाविशेषज्ञों के अनुसार, भले ही वर्तमान में मौसम में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा हो, लेकिन किसान 15 जुलाई तक सुरक्षित रूप से मूंग की बुआई कर सकते हैं. यदि किसी क्षेत्र में भारी वर्षा हो रही है, तो वर्षा रुकने और मिट्टी में सही नमी होने पर भी बुआई की जा सकती है. पिछले वर्षों के सफल प्रयोगों का हवाला देते हुए बताया गया कि अगस्त माह में की गई बुआई भी अक्टूबर तक तैयार हो गई थी, जिससे किसानों को नवंबर में गेहूं की फसल लगाने के लिए पर्याप्त समय मिल गया. इस पद्धति से किसान एक ही खेत से साल भर में दोहरी फसल का लाभ उठा पा रहे हैं.

वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए एमएच 1142 का कमालकिशनगढ़ क्षेत्र में किए गए प्रदर्शनों के दौरान यह पाया गया कि एमएच 1142 किस्म वर्षा आधारित खेती के लिए उत्कृष्ट है. लगातार बारिश होने के बावजूद इस किस्म की फलियां खराब नहीं होती हैं. विशेषज्ञों ने बताया कि फसल की पत्तियां झड़ने के बाद भी फलियां सुरक्षित रहती हैं और उत्पादन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता. यह उन किसानों के लिए एक बड़ी राहत है जिनके पास सिंचाई के सीमित साधन हैं और वे मुख्य रूप से मानसून पर निर्भर हैं.

हरी खाद के लिए विशेषज्ञों की विशेष सलाहअक्सर किसान मूंग की फसल का उपयोग हरी खाद के रूप में करते हैं, लेकिन कृषि विज्ञान केंद्र ने इसके लिए एक बेहतर विकल्प सुझाया है. विशेषज्ञों का कहना है कि मूंग से मिलने वाला बायोमास (जैविक कचरा) कम होता है. इसके मुकाबले ‘ढैंचा’ की फसल से तीन से चार गुना अधिक बायोमास प्राप्त होता है, जो मिट्टी की उर्वरक शक्ति को कई गुना बढ़ा देता है. इसलिए, हरी खाद के लिए ढैंचा और दलहन उत्पादन के लिए मूंग की उन्नत किस्मों का उपयोग करना ही समझदारी है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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