दादा ने कहा खेत संभालो… पोते ने कोचिंग छोड़ पपीता और अंजीर की खेती से शुरू की लाखों की कमाई

Last Updated:May 13, 2026, 08:59 IST
Brijesh Chandel Success Story: बारां के युवा किसान बृजेश चंदेल ने कोटा में कोचिंग छोड़ एकीकृत खेती अपनाकर सालाना 20 लाख रुपये की आय का मॉडल पेश किया है. पपीता, अंजीर और गेंदा की खेती के साथ-साथ उन्होंने सोलर ऊर्जा, ड्रिप सिंचाई और मछली पालन को जोड़कर खेती की लागत को न्यूनतम किया है. उनकी नवाचारी सोच ने उन्हें इलाके का ‘प्रगतिशील किसान’ बना दिया है.
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Brijesh Chandel Success Story: राजस्थान के बारां जिले के कलौनी निवासी बृजेश चंदेल की कहानी उन युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है, जो खेती को केवल घाटे का सौदा मानकर शहरों की ओर भागते हैं. साल 2016 में बृजेश कोटा में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे और एक उज्ज्वल भविष्य का सपना देख रहे थे. इसी बीच उनके दादाजी ने उन्हें एक ऐसी सलाह दी जिसने उनके जीवन की दिशा ही बदल दी. दादाजी चाहते थे कि उनकी पुश्तैनी जमीन और खेती की विरासत को उनका पोता उनकी मौजूदगी में ही संभाले. दादाजी की समझाइश पर बृजेश ने कोचिंग छोड़ दी और गांव लौट आए. शुरुआत में उन्होंने पारंपरिक तरीके से गेहूं और सरसों जैसी फसलें उगाईं, लेकिन उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि इसमें लागत बहुत अधिक है और बचत बेहद कम.
बृजेश ने हार मानने के बजाय खेती में नवाचार (Innovation) करने का फैसला किया. उन्होंने एकीकृत कृषि प्रणाली (Integrated Farming) को अपनाने की सोची. हालांकि, उनकी राह इतनी आसान नहीं थी. साल 2024 में उन्होंने पपीते के 1000 और अंजीर के 600 पौधे लगाए थे, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण उनकी पूरी मेहनत बर्बाद हो गई और सारे पौधे खराब हो गए. इस आर्थिक और मानसिक झटके के बावजूद बृजेश निराश नहीं हुए. 2025 में उन्होंने नए सिरे से शुरुआत की और नीमच से उच्च गुणवत्ता वाले पपीते के 1000 पौधे मंगवाए. इस बार उन्होंने आधुनिक ड्रिप सिंचाई पद्धति का सहारा लिया ताकि पानी का सही प्रबंधन हो सके.
तकनीक और एकीकृत खेती का शानदार मॉडलबृजेश की मेहनत रंग लाई और अब उनके बगीचे में प्रत्येक पौधे पर 50 किलो से लेकर 1 क्विंटल तक फल लग रहे हैं. केवल अप्रैल 2026 तक ही वे 2 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त कर चुके थे. उनकी सफलता का राज यह है कि वे केवल एक फसल पर निर्भर नहीं हैं. उन्होंने अपने फार्म पर फलों के साथ-साथ फूलों की खेती भी शुरू की है, जिसमें एक एकड़ में गेंदा लगाया गया है. इसके अलावा, उन्होंने पशुपालन, गोबर गैस प्लांट और मछली पालन को भी अपनी आय का हिस्सा बनाया है.
सरकारी योजनाओं का लाभ और भविष्य की योजनाएंबृजेश ने नीति आयोग के प्रोजेक्ट के तहत 3 किलोवाट का सोलर पैनल, फार्म पौंड और स्प्रिंकलर सिस्टम स्थापित किया है. इससे उन्हें बिजली के भारी बिलों से आजादी मिली है और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) के कारण उनके क्षेत्र के भूमिगत जल स्तर में भी सुधार हुआ है. उनके इस आधुनिक फार्म हाउस को देखने के लिए नीति आयोग के जनरल सेक्रेटरी राजीव ठाकुर और बारां कलेक्टर रोहिताश तोमर जैसे उच्चाधिकारी भी आ चुके हैं. भविष्य में बृजेश बेर, आंवला, बांस और सहजन के बगीचे लगाने के साथ-साथ मधुमक्खी पालन शुरू करने की योजना बना रहे हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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