Rajasthan

अजमेर से गायब हो रही तांगों की टापें! कभी 1000 घोड़ा गाड़ियों से गूंजता शहर अब सिमटा सिर्फ 50 तक

Last Updated:May 13, 2026, 19:02 IST

Ajmer News Hindi : अजमेर की पहचान रहे तांगे अब शहर की सड़कों से लगभग गायब हो चुके हैं. कभी हजारों घोड़ा गाड़ियां रेलवे स्टेशन, दरगाह और बाजारों की शान हुआ करती थीं, लेकिन आधुनिक वाहनों के बढ़ते दौर ने इस पारंपरिक सवारी को इतिहास बना दिया. आज केवल गिने-चुने तांगे ही अजमेर की पुरानी संस्कृति और विरासत की याद दिला रहे हैं.

ख़बरें फटाफट

अजमेर : राजस्थान का ऐतिहासिक शहर अजमेर अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. कभी इस शहर की पहचान यहां की संकरी गलियों में दौड़ते तांगों और घोड़ों की टापों से होती थी. रेलवे स्टेशन, दरगाह क्षेत्र, बाजार और पुराने मोहल्लों तक लोगों की आवाजाही का सबसे भरोसेमंद साधन घोड़ा गाड़ी ही हुआ करती थी. उस दौर में जब शहर में टेंपो, ऑटो और बसों जैसी आधुनिक सुविधाएं नहीं थीं, तब तांगे आमजन की जिंदगी का अहम हिस्सा थे.

घोड़ा गाड़ी यूनियन के अध्यक्ष असलम खान ने कि 80 और 90 के दशक में अजमेर की सड़कों पर करीब एक हजार से अधिक तांगे चलते थे. उस समय घोड़ा गाड़ियों के लिए बाकायदा लाइसेंस जारी किए जाते थे और शहर के कई परिवारों की रोजी-रोटी इसी व्यवसाय पर निर्भर थी. तांगा चालक सुबह से देर रात तक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाते थे. स्टेशन से दरगाह शरीफ तक आने वाले जायरीन भी बड़ी संख्या में तांगों का उपयोग करते थे.

संस्कृति और परंपरा के प्रतीकतांगे केवल परिवहन का साधन नहीं थे, बल्कि वे अजमेर की संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माने जाते थे. घोड़ों की सजी हुई गाड़ियां, उन पर लगी घंटियों की मधुर आवाज और तांगा चालकों की पुकार शहर की पहचान बन चुकी थी. पुराने लोग आज भी उस दौर को याद करते हुए कहते हैं कि तांगों की सवारी में एक अलग ही अपनापन और शांति महसूस होती थी.

केवल 40 से 50 तक सीमित रह गए तांगेलेकिन समय के साथ शहर में आधुनिक वाहनों का तेजी से विस्तार हुआ. लोगों ने तेज और सुविधाजनक साधनों की ओर रुख करना शुरू कर दिया. टेंपो, ऑटो, ई-रिक्शा और निजी वाहनों की बढ़ती संख्या ने तांगों की रफ्तार धीमी कर दी. धीरे-धीरे यह पारंपरिक सवारी शहर की सड़कों से गायब होने लगी. आज स्थिति यह है कि कभी हजारों की संख्या में दिखाई देने वाले तांगे घटकर केवल 40 से 50 तक सीमित रह गए हैं.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

न्यूजलेटर

अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज

खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में

सबमिट करें

Location :

Ajmer,Ajmer,Rajasthan

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj