पुष्कर से अजमेर तक गूंजे ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे, दरगाह के बाहर से निकली कावड़ यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत

Last Updated:August 16, 2026, 20:23 IST
Pushkar Ajmer Kanwar Yatra: पुष्कर से अजमेर तक निकली कावड़ यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे. शिव भक्त कावड़ लेकर अजमेर की ओर रवाना हुए और यात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई दरगाह के बाहर से भी निकली. इस दौरान जगह-जगह लोगों ने कावड़ियों का स्वागत किया और यात्रा के प्रति उत्साह नजर आया. श्रद्धालु भक्ति और आस्था के साथ यात्रा में शामिल हुए. रास्ते में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा. पुष्कर से अजमेर तक निकली इस कावड़ यात्रा ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सौहार्द का संदेश भी दिया. यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन की ओर से आवश्यक इंतजाम किए गए.
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अजमेर. सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना और जलाभिषेक का विशेष महत्व माना जाता है. इसी आस्था के साथ अजमेर के प्राचीन मराठा कालीन झरनेश्वर महादेव मंदिर के लिए कावड़ यात्रा निकाली गई. यह कावड़ यात्रा पुष्कर सरोवर से पवित्र जल लेकर पुष्कर घाटी से होते हुए अजमेर पहुंची. इस मौके पर शहरवासियों ने जगह-जगह यात्रा का स्वागत किया और कावड़ियों का उत्साह बढ़ाया.
मंदिर समिति के सदस्य ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी कावड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला. यात्रा के दौरान भगवान शिव के जयकारे गूंजते रहे. अलग-अलग प्रकार की झांकियां यात्रा में देखने को मिली. यात्रा अजमेर दरगाह के सामने से होकर भी गुजरी. इस दौरान धार्मिक आस्था के साथ आपसी भाईचारे और सद्भाव का संदेश भी देखने को मिला.
दरगाह के ठीक ऊपरी पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है। मंदिरअजमेर का प्राचीन झरनेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक माना जाता है. यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की यही वजह है कि यह स्थान लंबे समय से हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता आ रहा है.
सम्राट पृथ्वीराज चौहान यहां पूजा-अर्चना करते थेमंदिर समिति के सदस्य ने आगे बताया कि झरनेश्वर महादेव मंदिर को लेकर कई ऐतिहासिक मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं. मान्यता है कि महान राजपूत सम्राट पृथ्वीराज चौहान अपने शासनकाल में इस शांत और एकांत पहाड़ी क्षेत्र में आया करते थे. यहां वे भगवान शिव की पूजा-अर्चना और ध्यान करते थे. पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Ajmer,Rajasthan
First Published :
August 16, 2026, 18:49 IST



