Cuba Petrol diesel stock empty : Iran US War Live | Trump Tariff Blockade | क्यूबा में पेट्रोल डीजल खत्म

हवाना: ईरान अमेरिका जंग के बीच कई देश तेल की किल्लत से जूझ रहे हैं. कई देशों में दाम बढ़ गए हैं, राशनिंग और वर्क फ्रॉम होम जैसे नियम बनने लगे हैं. इस हाहाकार के बीच एक देश में पेट्रोल-डीजल पूरी तरह खत्म हो गया है. 22 घंटों से ये देश घुप अंधेरे में डूबा हुआ है और हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वहां की सरकार ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं. ये देश क्यूबा है, जिसे अमेरिका ने पहले ही खोखला कर दिया था और अब मिडिल ईस्ट के हालातों ने पूरी तरह घुटनों पर ला दिया है.
पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म
क्यूबा के ऊपर इस वक्त मुसीबतों का ऐसा पहाड़ टूटा है कि पूरा देश घुप अंधेरे में डूब गया है. पिछले कुछ दशकों में क्यूबा ने कई मुश्किलें देखी हैं, लेकिन इस बार का ऊर्जा संकट सबसे भयावह बताया जा रहा है. देश में पेट्रोल और डीजल का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है, जिससे रोज-मर्रा की जिंदगी पूरी तरह ठप हो गई है. अस्पतालों से लेकर स्कूलों तक, हर जगह हाहाकार मचा है और बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं. सबसे डरावनी बात यह है कि इस संकट का फिलहाल कोई अंत नजर नहीं आ रहा है.
मंत्री ने लाइव आकर जनता से क्या कहा?
क्यूबा के ऊर्जा मंत्री विसेंट डी ला ओ लेवी ने जब टीवी पर आकर ये कहा कि ‘हमारे पास अब बिल्कुल भी डीजल और फ्यूल ऑयल नहीं बचा है’. ये सुनते ही जैसे पूरे देश के पैरों तले जमीन खिसक गई. सोचिए, एक देश का जिम्मेदार मंत्री सार्वजनिक रूप से कह रहा है कि उनके पास अब कोई रिजर्व नहीं है. इसका सीधा मतलब ये है कि गाड़ियां सड़कों पर खड़ी रह जाएंगी, फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी और बिजली बनाने वाले प्लांट ठप पड़ जाएंगे. अभी हो भी यही रहा है, पूरा नेशनल ग्रिड इस वक्त वेंटिलेटर पर है और केवल उतनी ही बिजली बन पा रही है जितना वहां का लोकल कच्चा तेल और नेचुरल गैस साथ दे पा रहे हैं.
22 घंटे का ब्लैकआउट, जिंदगी हुई बेपटरी!
राजधानी हवाना की चमक अब फीकी पड़ चुकी है. यहां कई मोहल्लों में दिन के 22-22 घंटे तक बिजली नहीं रहती. इसका मतलब है कि वहां के बच्चे मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ रहे हैं, अस्पतालों में मशीनें चलाने के लिए जद्दोजहद हो रही है और पानी की सप्लाई तक रुक गई है. क्यूबा ने पिछले दो सालों में बड़े गर्व से खूब सारे सोलर पैनल लगाए थे लेकिन विडंबना देखिए कि ग्रिड इतना ज्यादा अस्थिर हो गया है कि वो सौर ऊर्जा भी सिस्टम में ठीक से नहीं पहुंच पा रही है. लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं और घबराहट का माहौल हर तरफ फैला हुआ है.
डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिबंधों ने घोंटा दम
क्यूबा की ऐसी हालत के पीछे अमेरिका का हाथ है. जनवरी 2026 में डोनाल्ड ट्रंप ने एक सख्त आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया कि जो भी देश क्यूबा को तेल भेजेगा, अमेरिका उस पर भारी जुर्माना लगा देगा. नतीजा ये हुआ कि मेक्सिको और वेनेजुएला जैसे देश, जो सालों से क्यूबा की मदद कर रहे थे, उन्होंने भी अपने हाथ पीछे खींच लिए. अमेरिका के इस चक्रव्यूह ने क्यूबा की सप्लाई लाइन को पूरी तरह काट दिया है.
युद्ध और महंगाई का डबल अटैक
सिर्फ प्रतिबंध ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे कोने में चल रही जंग ने भी क्यूबा की कमर तोड़ दी है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. क्यूबा जैसे छोटे देश के लिए अब बाहर से तेल खरीदना लगभग नामुमकिन हो गया है. परिवहन की लागत इतनी बढ़ गई है कि कोई भी जहाज वहां तक आने को तैयार नहीं है. पिछले कई महीनों में सिर्फ एक रूसी जहाज ‘अनातोली कोलोदकिन’ ही वहां तक पहुंच पाया है, जो ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है.
संयुक्त राष्ट्र ने इस पूरी घेराबंदी को ‘गैर-कानूनी’ बताया है क्योंकि इसका खामियाजा वहां के आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. क्यूबा का पर्यटन उद्योग, जो वहां की कमाई का सबसे बड़ा जरिया है, वो अब पूरी तरह बर्बाद होने की कगार पर है. होटल खाली पड़े हैं और सड़कों पर सन्नाटा है. मंत्री लेवी ने हताशा में कहा है कि ‘क्यूबा उस हर किसी के लिए खुला है जो हमें तेल बेचने की हिम्मत दिखाए’.



