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EXCLUSIVE: नॉर्थ इंडिया में ‘जामताड़ा’, दिल्‍ली-राजस्‍थान बने साइबर क्राइम हब – exclusive rajasthan delhi new jamtara north india Cybercrime Hub

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नॉर्थ इंडिया का ‘जामताड़ा’, दिल्‍ली-राजस्‍थान बने साइबर क्राइम हब

Last Updated:May 14, 2026, 13:16 IST

Cybercrime News: देश में सरकार और प्रशासन की तरफ से तमाम तरह के जागरुकता अभियान के बावजूद साइबर फ्रॉड के मामले थम नहीं रहे हैं. अब तो देश की राजधानी दिल्‍ली और राजस्‍थान नॉर्थ इंडिया का हब बन गया है. पुलिस और जांच एजेंसियों के पास इतनी शिकायतें आ रही हैं कि वे भी भौंचक्‍के हैं. नॉर्थ इंडिया का 'जामताड़ा', दिल्‍ली-राजस्‍थान बने साइबर क्राइम हबZoomउत्‍तर भारत में देश की राजधानी दिल्‍ली और राजस्‍थान साइबरक्राइम के हब बन चुके हैं. (फाइल फोटो/Reuters)

रिपोर्ट: अंकुर शर्मा

Cybercrime News: दिल्ली और राजस्थान उत्तर भारत में साइबर अपराध के सबसे बड़े केंद्र बनकर उभरे हैं. नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पोर्टल की शुरुआत से अब तक दर्ज कुल शिकायतों में 61 प्रतिशत शिकायतें सिर्फ इन दो राज्यों से आई हैं. दोनों राज्यों में मिलाकर करीब 10 लाख शिकायतें दर्ज की गई हैं, जबकि बाकी उत्तर भारत का हिस्सा इससे काफी पीछे है.

आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में अब तक कुल 5.71 लाख साइबर अपराध शिकायतें दर्ज हुई हैं. इनमें सिर्फ 2024 में ही 1.52 लाख से अधिक मामले सामने आए, जो उत्तर भारत के किसी भी राज्य से कहीं ज्यादा हैं. वहीं, राजस्थान ने भी चौंकाने वाली बढ़ोतरी दर्ज की है. राज्य में कुल 4.18 लाख शिकायतें दर्ज हुई हैं और 2021 में शिकायतों में 3.4 गुना उछाल देखने को मिला. विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी संगठित साइबर ठगी गिरोहों के तेजी से फैलते नेटवर्क की ओर इशारा करती है.

एक्‍सपर्ट भी हैरान

विशेषज्ञों का कहना है कि चिंता केवल शिकायतों की संख्या नहीं, बल्कि उनकी रफ्तार है. उत्तर भारत के लगभग सभी राज्यों में साइबर अपराध बढ़े हैं, लेकिन दिल्ली और राजस्थान बाकी राज्यों से काफी आगे निकल चुके हैं. हरियाणा, जो कुल 3.75 लाख शिकायतों के साथ तीसरे स्थान पर है, वह भी राजस्थान से करीब 43 हजार मामलों से पीछे है, जबकि हरियाणा अधिक शहरी और डिजिटल रूप से सक्रिय राज्य माना जाता है. राजस्थान में 2021 के दौरान अचानक आए उछाल ने जांच एजेंसियों को भी चौंकाया है. राज्य में शिकायतों की संख्या 2020 के 11,637 मामलों से बढ़कर 2021 में 39,213 तक पहुंच गई. अधिकारियों के मुताबिक मेवात क्षेत्र में सक्रिय संगठित ठगी गिरोह, सस्ते स्मार्टफोन की उपलब्धता और लोगों में कम डिजिटल जागरूकता इस विस्फोटक बढ़ोतरी की बड़ी वजह बने. ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों ने राज्य को तेजी से साइबर अपराध के हॉटस्पॉट में बदल दिया.

दिल्‍ली में बढ़ रहे मामले

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है. 2020 में जहां 38,521 शिकायतें दर्ज हुई थीं, वहीं 2024 तक यह संख्या बढ़कर 1,52,874 हो गई. 2025 में भी सिर्फ सात महीनों में 1,04,276 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की घनी आबादी, भारी संख्या में यूपीआई लेन-देन और डिजिटल भुगतान पर बढ़ती निर्भरता साइबर ठगों के लिए इसे आसान निशाना बनाती है. हालांकि, सबसे बड़ा सवाल न्याय व्यवस्था की क्षमता को लेकर उठ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि शिकायत दर्ज होना और अपराधियों को सजा मिलना दो अलग बातें हैं. भारत में साइबर अपराध के मामलों में गिरफ्तारी दर कम है, कई शिकायतें एफआईआर में तब्दील नहीं हो पातीं और राज्यों में डिजिटल फॉरेंसिक संसाधनों की भी भारी कमी है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जांच, अभियोजन और सजा की प्रक्रिया में बड़े स्तर पर सुधार नहीं किए गए, तो लाखों शिकायतें केवल अनसुलझी शिकायतों के रिकॉर्ड बनकर रह जाएंगी.

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