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दुनिया में मचेगा हाहाकार! सूख रहे हैं धरती के फेफड़े; ऑक्‍सीजन के स्‍त्रोत से घास का मैदान बनने की ओर अमेजन

कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया की जहां धरती के फेफड़े जवाब दे रहे हैं और हर सांस के साथ ऑक्सीजन की जगह तपन महसूस हो रही है. अमेजन के जंगल इसी चुनौती से जूझ रहे हैं. वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि अगर हमने अमेजन के वर्षा वनों की कटाई की कुल्हाड़ी नहीं रोकी तो दुनिया का यह सबसे बड़ा हरा-भरा खजाना देखते ही देखते एक सूखे और उजाड़ मैदान में बदल जाएगा. यह सिर्फ पेड़ों की मौत नहीं बल्कि पूरी मानवता के सुरक्षित भविष्य पर लगा एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न है.

जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई का दोहरा वारअमेजन के वर्षावन जिन्हें अक्सर दुनिया के फेफड़े कहा जाता है अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से गुजर रहे हैं. पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (PIK) के हालिया अध्ययन के अनुसार अमेजन का भविष्य केवल वैश्विक तापमान पर नहीं बल्कि वहां हो रही वनों की कटाई पर भी निर्भर है.

इस शोध का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यदि वनों की कटाई का स्तर 22% से 28% तक पहुंच जाता है और तापमान में 1.5-1.9°C की वृद्धि होती है तो अमेजन का दो-तिहाई हिस्सा घास के मैदान या बंजर वन में बदल सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वनों की कटाई अमेजन की अपनी वर्षा प्रणाली को कमजोर कर देती है जिससे यह वर्षावन अंदरूनी नमी खोने लगता है.

अध्ययन के मुख्य प्‍वाइंट· खतरनाक सीमा: अमेजन का लगभग 17-18% हिस्सा पहले ही नष्ट हो चुका है जो इसे विनाश की दहलीज के और करीब ले आया है.

· नमी का चक्र: अमेजन की लगभग 50% वर्षा उसके अपने पेड़ों द्वारा छोड़ी गई नमी से होती है. वनों की कटाई इस चक्र को तोड़ देती है जिससे हजारों किलोमीटर दूर के क्षेत्रों में भी सूखा पड़ता है.

· तापमान का प्रभाव: यदि वनों की कटाई न हो तो अमेज़न 3.7-4°C तक के उच्च तापमान को झेल सकता है लेकिन कटाई के कारण यह कम तापमान (1.5°C) पर ही ढह सकता है.

· अपरिवर्तनीय क्षति: शोधकर्ताओं ने अमेजन के क्षरण को वैश्विक टिपिंग पॉइंट (Tipping Point) माना है जिसका अर्थ है कि एक बार नुकसान होने पर इसे सुधारा नहीं जा सकेगा.

· लगातार सूखा: हाल के वर्षों (2005, 2010, 2015-16 और 2023-24) में आए भीषण सूखे इस विनाशकारी बदलाव के स्पष्ट संकेत हैं.

दुनिया पर क्या होगा असर?अमेजन न केवल अरबों टन कार्बन सोखता है बल्कि वैश्विक मौसम चक्र को भी नियंत्रित करता है. यदि यह वर्षावन नष्ट होता है तो वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारी वृद्धि होगी जिससे ग्लोबल वार्मिंग की रफ्तार और तेज हो जाएगी. इसके अलावा, हजारों प्रजातियों की जैव विविधता हमेशा के लिए लुप्त हो जाएगी और वहां रहने वाले आदिवासी समुदायों (जैसे मुरा जनजाति) का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा.

सवाल-जवाब

अमेज़न को ‘दुनिया के फेफड़े’ क्यों कहा जाता है?

अमेज़न के घने जंगल भारी मात्रा में ऑक्सीजन पैदा करते हैं और वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड सोखकर पृथ्वी के तापमान को संतुलित रखने में मदद करते हैं.

वनों की कटाई अमेज़न में बारिश को कैसे प्रभावित करती है?

अमेज़न के पेड़ वाष्पीकरण के जरिए नमी छोड़ते हैं, जिससे बारिश होती है. जब पेड़ कटते हैं, तो यह ‘मॉइस्चर रीसाइक्लिंग’ सिस्टम कमजोर हो जाता है और पूरा क्षेत्र सूखने लगता है.

COP30 में अमेज़न को लेकर क्या सहमति बनी थी?

ब्राजील के बेलेम में आयोजित COP30 में 196 देशों ने 2030 तक वनों की कटाई को रोकने और नष्ट हुए वनों को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया था.

इस अध्ययन में किस तकनीक का उपयोग किया गया है?

शोधकर्ताओं ने UTrack नामक नमी ट्रैकिंग मॉडल का उपयोग किया, जो वायुमंडल में नमी की आवाजाही और वर्षा के आंकड़ों का विश्लेषण करता है.

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