चाबहार पर अमेरिका की रोक बेअसर? ईरान ने खेला बड़ा दांव, भारत को अराघची ने बताया एशिया से यूरोप तक का गेमचेंजर

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चाबहार पर US की रोक बेअसर? भारत को ईरान ने बताया एशिया से यूरोप तक का गेमचेंजर
Last Updated:May 15, 2026, 22:31 IST
चाबहार पोर्ट को लेकर जंग शुरू हो गई है. अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर प्रतिबंध एकदम लगा दिए हैं. आईएफसीए के तहत एक्शन लेने की धमकी भी दी है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि काम एकदम धीमा हुआ है. लेकिन भारत और ईरान का यह सहयोग नहीं रुकेगा. चाबहार पोर्ट एक रणनीतिक जगह है.
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अब्बास अराघची ने चाबहार पोर्ट को भारत के लिए ‘सुनहरा द्वार’ बताया. (फाइल फोटो)
नई दिल्ली. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान के बीच सहयोग का एक प्रतीक बताया. अराघची ने भरोसा जताया कि भारत की ओर से विकसित यह बंदरगाह मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुंच के लिए एक ‘सुनहरा द्वार’ साबित होगा. नई दिल्ली में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए अराघची ने माना कि अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से चाबहार बंदरगाह का विकास कुछ धीमा पड़ गया है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा.
उन्होंने कहा, “चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के सहयोग का एक प्रतीक है और हमें खुशी है कि इसके विकास में भारतीयों ने अहम भूमिका निभाई है. यह अभी अमेरिका के प्रतिबंधों की वजह से थोड़ा धीमा हो गया है, लेकिन मुझे पूरा विश्वास है कि यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशिया, काकेशस और आगे यूरोप तक पहुंच का एक ‘सुनहरा द्वार’ बनेगा. साथ ही यूरोप, मध्य एशिया और अन्य देशों के लिए भी यह भारतीय महासागर तक पहुंच का रास्ता बनेगा.”
उन्होंने आगे कहा, “यह एक बहुत ही रणनीतिक बंदरगाह है, जो हमारे लिए, भारत के लिए और कई अन्य देशों के लिए महत्वपूर्ण है. इसलिए मुझे उम्मीद है कि भारत इस बंदरगाह पर अपना काम जारी रखेगा, ताकि यह पूरी तरह विकसित होकर सभी देशों के हित में काम कर सके. मेरा मानना है कि भारत अपनी अच्छी छवि के साथ इस क्षेत्र में शांति, कूटनीति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. भारत फारस की खाड़ी के लगभग सभी देशों का मित्र है, चाहे वे खाड़ी के उत्तर में हों या दक्षिण में. इसलिए हम इस क्षेत्र में भारत की किसी भी सकारात्मक और रचनात्मक भूमिका की सराहना करते हैं.”
पिछले सितंबर में भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा था कि वह अमेरिका के उस फैसले के असर की जांच कर रहा है, जिसमें चाबहार पोर्ट परियोजना से जुड़े प्रतिबंधों में दी गई छूट को खत्म करने की बात कही गई थी. इस परियोजना में भारत भी साझेदार है. अमेरिका ने घोषणा की थी कि वह ईरान के चाबहार बंदरगाह पर होने वाली गतिविधियों के लिए दी गई प्रतिबंध छूट वापस लेगा, जो 2018 में दी गई थी. अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस कदम के बाद इस बंदरगाह के संचालन से जुड़े पक्षों पर ‘ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट’ (आईएफसीए) के तहत प्रतिबंध लग सकते हैं.
भारत और ईरान ने मिलकर चाबहार बंदरगाह के संचालन के लिए दस साल का समझौता भी किया है. इस समझौते के तहत भारत ने बंदरगाह के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 250 मिलियन डॉलर की क्रेडिट सुविधा देने की प्रतिबद्धता जताई है. इसके अलावा, भारत और ईरान चाबहार बंदरगाह को ईरान के रेलवे नेटवर्क से जोड़ने की भी योजना बना रहे हैं. इसके लिए करीब 700 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बनाकर इसे जहेदान शहर से जोड़ा जाएगा.
About the AuthorRakesh Ranjan Kumar
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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