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‘पीएम मोदी के दुश्मन फिराक में हैं, सुरक्षा मत घटाओ’! पूर्व रॉ चीफ सामंत गोयल की चेतावनी, ट्रंप का जिक्र भी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ऊर्जा बचत का संदेश देने के लिए अपने आधिकारिक काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का फैसला लिया है. सोशल मीडिया पर उनके छोटे काफिले के वीडियो भी वायरल हो रहे हैं. इस फैसले ने जहां एक तरफ सादगी और बचत की मिसाल पेश की है, वहीं दूसरी तरफ देश के सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है. भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के पूर्व सेक्रेटरी सामंत कुमार गोयल ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री की सुरक्षा घटाना एक गलत कदम साबित हो सकता है. गोयल के मुताबिक सुरक्षा प्रोटोकॉल में किसी भी तरह की ढील देना जोखिम भरा है.

सामंत गोयल ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमलों का उदाहरण देते हुए बताया कि जब अमेरिका जैसे सुरक्षित देश में राष्ट्रपति पर तीन बार हमले हो सकते हैं, तो भारत को और भी ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. उन्होंने इशारा किया कि भारत के पड़ोसी देशों में बैठे आतंकी तत्व और जिहादी गुट हमेशा प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाने की ताक में रहते हैं.

पिछले 25 सालों से जब से मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने हैं, उनके खिलाफ खतरों का स्तर हमेशा ऊंचा रहा है. पूर्व जासूस प्रमुख का मानना है कि सुरक्षा की समीक्षा उसे और अधिक अभेद्य बनाने के लिए होनी चाहिए, न कि उसे कम करने के लिए.

ड्रोन और स्नाइपर गन के खतरे के बीच सुरक्षा कम करना कितना सही है?

सामंत गोयल ने सुरक्षा के नए आयामों पर बात करते हुए कहा कि आज के दौर में खतरे बदल गए हैं. अब सिर्फ जमीन पर सुरक्षा काफी नहीं है, बल्कि ड्रोन और आधुनिक स्नाइपर गन से होने वाले हमलों का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है. ऐसी स्थिति में गाड़ियों की संख्या कम करना सुरक्षा घेरे को कमजोर कर सकता है. गोयल के अनुसार, पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर जो कड़ा रुख अपनाया है, उसकी वजह से वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दुश्मन ताकतों के निशाने पर हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि सुरक्षा में किसी भी तरह की कटौती जिहादी तत्वों को मौका दे सकती है.

विदेशी दौरों पर सुरक्षा कटौती का क्या असर पड़ सकता है?

पूर्व R&AW चीफ ने एक बहुत ही अहम पहलू की तरफ इशारा किया है. उनका कहना है कि जब भारत का प्रधानमंत्री किसी दूसरे देश की यात्रा पर जाता है, तो वहां की एजेंसियां हमारे देश के सुरक्षा प्रोटोकॉल को देखती हैं. अगर भारत खुद ही अपने प्रधानमंत्री की सुरक्षा कम कर देता है, तो दूसरे देशों को लगेगा कि उन्हें कोई बड़ा खतरा नहीं है. इससे विदेशों में प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था ढीली पड़ सकती है. दुनिया के कई देशों में अभी भी भारत विरोधी तत्व सक्रिय हैं, जो ऐसी किसी भी चूक का फायदा उठा सकते हैं.

हालांकि पीएम मोदी का यह कदम ‘एनर्जी सेविंग’ और फिजूलखर्ची रोकने का एक बड़ा संदेश है, लेकिन सामंत गोयल की राय इससे अलग है. उन्होंने कहा कि देश के लिए प्रधानमंत्री की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए. पिछले कुछ समय में पीएम मोदी के काफिले को असम और गुजरात में काफी छोटा देखा गया है.

एसपीजी ने निर्देशों का पालन करते हुए गाड़ियों की संख्या कम तो कर दी है, लेकिन एक्सपर्ट्स इसे देशहित में नहीं मान रहे हैं. गोयल ने अपील की है कि सुरक्षा इंतजामों को पहले से ज्यादा सख्त किया जाना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी की गुंजाइश न रहे.

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