अनोखी मान्यता… जहां बैंगन और झाड़ू चढ़ाने से पूरी होती है मनोकामना, बुधवार को उमड़ती है भक्तों की भीड़

Last Updated:May 16, 2026, 07:25 IST
Bibirani Mata Mandir: बीबीरानी माता मंदिर अपनी 600 साल पुरानी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है. मंदिर से जुड़ी कई लोककथाएं और चमत्कारी कहानियां आज भी लोगों को आकर्षित करती हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं, इसलिए हर बुधवार बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं और दूर-दूर से लोग यहां आस्था लेकर आते हैं. धार्मिक महत्व के साथ यह स्थान स्थानीय पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है.
खैरथल तिजारा जिले के किशनगढ़ बास क्षेत्र के गांव बीबीरानी में स्थित 600 साल पुराना मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है. किशनगढ़ बास कस्बे से 12 किलोमीटर दूर स्थित पहाड़ की तलहटी पर स्थित माता बीबीरानी का भव्य मंदिर बना है, जो पूरे प्रदेश में विख्यात है. इस मंदिर में दूर-दूर से दर्शन करने के लिए लोग पहुंचते हैं.
मंदिर के पुजारी ने बताया कि बीबीरानी माता मंदिर में आने वाले श्रद्धालु चढ़ावे में प्रसादी का भोग चढ़ाने के साथ झाड़ू और बैगन लाते हैं. इस दौरान मंदिर में डोरा बंधाकर झाड़ू और बैगन का चढ़ावा कर मन्नत मांगते हैं.
बीबीरानी माता मंदिर में भव्य मेले का भी आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. सर्दियों में माघ महीने की दूज और गर्मियों में ज्येष्ठ महीने की दूज पर बड़ा मेला लगता हैं, वहीं हर बुधवार को यहां छोटा मेला आयोजित होता है, जिनमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं.
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लक्खी बंजारे इस दौरान वह दोबारा वहीं जगह पहुंचा जहां से आवाज सुनाई दी. वहां पहुंचते ही वह गिड़गिडाया इस दौरान फिर आकाशवाणी ने कहा जो तूने बोला, वो तूने पाया. वैसे इंसान को झूठ नहीं बोलना चाहिए, लेकिन फिर भी तेरी गलती क्षमा होती है. तेरा केसर तुझे मिल जाएगा.
बीबीरानी माता मंदिर के पास स्थित तालाब बना हुआ है जिसमें लोग डुबकी लगाते हैं. स्थानीय लोगों और आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि इस तालाब में नहाने से कैसा भी चर्म रोग हो वह दूर हो जाता है.
माता बीबीरानी मंदिर के पास प्राचीन तालाब है जिसमें हर वक्त पानी भरा रहता है जिसमें आने वाले श्रद्धालु यहां स्नान कर माता के धोक लगाते हैं. नवविवाहितों की जात और छोटे बच्चों के जडूले भी यहां उतरवाने की परंपरा है.
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि करीब 600 साल पहले लक्खी बंजारा केसर लेकर गांव के पहाड़ के पास से निकल रहा था, इस दौरान उनको किसी ने आवाज लगाई और पूछा – “लक्खी इसमें क्या ले जा रहा है, इस दौरान उन्होंने उस आवाज को किसी चोर की आवाज समझ उसने झूठ बोला और कहा, इसमें नमक है”. इस दौरान वह वहां से आगे चल पड़ा और थोड़ी दूर जाकर जब लक्खी बंजारे ने अपनी गांठ खोलीं तो उसमें सारा केसर नमक बन चुका था.
इस दौरान बंजारे के परिवार ने मिलकर एक ही रात में पहाड़ी पर मंदिर बना दिया. मंदिर बनते ही बीबीरानी माता दिव्य स्वरुप में प्रकट हुई. माता के आशीर्वाद से बंजारे के वारे-न्यारे हो गए. वही दिव्य मूर्ति बीबीरानी माता की पहाड़ी पर आज भी प्रतिष्ठित है. नीचे भाई बुद्धा बाबा का मंदिर बना है. यहां लोग यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और मन्नते मांगते हैं.
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