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कैंसर उपचार होगा और सटीक, IIT जोधपुर में रिसर्च, कीमो से पहले पता चलेगा कौन-सी दवा करेगी असर

Last Updated:June 18, 2026, 11:29 IST

IIT Jodhpur Cancer Research: जोधपुर के आईआईटी में कैंसर उपचार को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण शोध किया जा रहा है. वैज्ञानिक ऐसे बायोमार्कर्स की पहचान करने में जुटे हैं, जिनकी मदद से इलाज शुरू होने से पहले ही यह पता लगाया जा सकेगा कि मरीज पर कीमोथैरेपी या अन्य कैंसर रोधी दवाएं कितना असर करेंगी. इस तकनीक से डॉक्टर मरीज के लिए बेहतर उपचार योजना तैयार कर सकेंगे. शोध का उद्देश्य दवा प्रतिरोध की संभावना का भी पहले से पता लगाना है, जिससे समय रहते उपचार में बदलाव कर मरीजों को बेहतर परिणाम और जीवन की अधिक संभावना मिल सके.

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जोधपुर. कैंसर के इलाज में अक्सर यह चुनौती रहती है कि कौन-सी दवा मरीज पर असर करेगी और कौन-सी नहीं. कई बार मरीज लंबे समय तक इलाज करवाने के बावजूद अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाते. लेकिन अब जोधपुर से सामने आया एक शोध इस स्थिति को बदल सकता है. आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित करने में जुटे हैं, जिससे उपचार शुरू करने से पहले ही यह संकेत मिल सकेगा कि मरीज पर कीमोथैरेपी या अन्य कैंसर रोधी दवाएं प्रभावी रहेंगी या नहीं.

आईआईटी जोधपुर कैंसर उपचार को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध कर रहा है. वैज्ञानिक ऐसे बायोमार्कर्स यानी जैविक संकेतकों की पहचान कर रहे हैं, जिनकी मदद से उपचार शुरू होने से पहले ही मरीज की प्रतिक्रिया का अनुमान लगाया जा सकेगा. इससे डॉक्टरों को मरीज के लिए बेहतर उपचार रणनीति तय करने में सहायता मिलेगी.

दवाओं के प्रतिरोधक क्षमता की भी होगी पहचान

कैंसर उपचार के दौरान कई बार कैंसर कोशिकाएं दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर लेती हैं, जिससे इलाज का असर कम हो जाता है. नए शोध का उद्देश्य ऐसे संकेतकों की पहचान करना भी है, जो पहले ही बता सकें कि मरीज में दवा प्रतिरोध विकसित होने की संभावना कितनी है. इससे समय रहते उपचार की दिशा बदली जा सकेगी और मरीज को बेहतर परिणाम मिल सकेंगे.

जीवित बची कोशिकाओं पर भी हो रहा विशेष अध्ययन

बायोसाइंस एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दिनेश कुमार अहिरवार के नेतृत्व में चल रहे इस शोध में उन कैंसर कोशिकाओं का भी अध्ययन किया जा रहा है, जो उपचार के बाद भी जीवित रह जाती हैं. यही कोशिकाएं बाद में बीमारी के दोबारा उभरने का कारण बन सकती हैं. शोधकर्ता आधुनिक तकनीकों की सहायता से ट्यूमर की प्रत्येक कोशिका का अलग-अलग विश्लेषण कर रहे हैं.

पुरानी दवा के नए उपयोग भी तलाशे जा रहे

शोध दल ड्रग रिपर्पजिंग पर भी काम कर रहा है. इसके तहत पहले से उपलब्ध दवाओं के नए उपयोग तलाशे जा रहे हैं, ताकि उन्हें कीमोथैरेपी के साथ मिलाकर उपचार को अधिक प्रभावी बनाया जा सके. इससे नई दवाएं विकसित करने में लगने वाला समय और लागत कम हो सकती है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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