‘हे भगवान डॉक्टर बना दो’… कोटा के इस मंदिर की दीवारों पर लिखे सपने, नीट से पहले क्यों पहुंच रहे हैं छात्र?

Last Updated:June 18, 2026, 16:22 IST
Kota Mandir for Students: 21 जून को होने वाली नीट परीक्षा से पहले कोटा के छात्र अंतिम तैयारियों में जुटे हैं. इसी बीच शहर का प्रसिद्ध मनोकामना मंदिर विद्यार्थियों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. राधा-कृष्ण को समर्पित इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दीवारें हैं, जहां छात्र अपनी मनोकामनाएं लिखते हैं. कोई डॉक्टर बनने की इच्छा जताता है, तो कोई आईआईटी में चयन की प्रार्थना करता है. हजारों लिखी हुई मन्नतें इस मंदिर को सपनों की एक अनोखी डायरी बना देती हैं. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थना भगवान तक जरूर पहुंचती है. परीक्षा से पहले बड़ी संख्या में छात्र और उनके अभिभावक यहां पहुंचकर सफलता की कामना करते हैं. कोटा के इस मंदिर में मेहनत और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.
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कोटा में मनोकामना मंदिर विद्यार्थियों की आस्था का केंद्र बना
कोटा: कोटा में देश भर से आए लाखों विद्यार्थी इन दिनों अपनी सबसे बड़ी परीक्षा (NEET) की अंतिम तैयारियों में जुटे हैं. लेकिन पढ़ाई के इस भारी दबाव के बीच, कोटा की एक संकरी गली में एक ऐसी जगह भी है जहां किताबों के पन्नों से निकलकर उम्मीदें दीवारों पर सांस लेती हैं. आइए जानते हैं कोटा के उस अनोखे मंदिर के बारे में, जहां मेहनत और आस्था का एक अद्भुत संगम देखने को मिलता है. यह है कोटा का प्रसिद्ध मनोकामना राधा-कृष्ण मंदिर. वैसे तो देश में हजारों मंदिर हैं, लेकिन इस मंदिर की खासियत इसकी दीवारें हैं.
यहाँ की दीवारें किसी साधारण पत्थर या सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के सपनों का जीवंत दस्तावेज़ हैं. परीक्षा के इस तनावपूर्ण माहौल में छात्र सिर्फ हाथ जोड़कर प्रार्थना करने नहीं आते, बल्कि पेन और मार्कर से अपनी इच्छाएं मंदिर की दीवारों पर लिख जाते हैं. यहाँ हर कोने में छात्रों की उम्मीदें बिखरी पड़ी हैं.
मनोकामना मंदिर विद्यार्थियों की आस्था का केंद्र बना21 जून को होने वाली नीट परीक्षा से पहले कोटा के लाखों छात्र अपने सपनों को साकार करने के लिए अंतिम तैयारी में जुटे हैं. इसी बीच शहर का प्रसिद्ध मनोकामना मंदिर विद्यार्थियों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. राधा-कृष्ण को समर्पित इस मंदिर की दीवारें हजारों मन्नतों और उम्मीदों की गवाह हैं. यहां छात्र अपनी इच्छाएं लिखते हैं- कोई डॉक्टर बनने की प्रार्थना करता है, कोई आईआईटी में चयन की कामना करता है, तो कोई अपने माता-पिता का सपना पूरा करने की मन्नत मांगता है. दीवारों पर लिखे शब्द केवल स्याही के निशान नहीं, बल्कि संघर्ष, मेहनत और विश्वास की कहानियां हैं. दूर-दराज के राज्यों से आए अभिभावक भी अपने बच्चों की सफलता के लिए यहां माथा टेकते हैं. छात्रों का मानना है कि कड़ी मेहनत के साथ भगवान का आशीर्वाद मिल जाए तो सफलता की राह आसान हो जाती है. यही वजह है कि कोटा का यह मंदिर आज लाखों सपनों, उम्मीदों और विश्वास का प्रतीक बन चुका है.
मेहनत और दुआओं का संगमकोटा का यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इन छात्रों के लिए एक ‘स्ट्रेस बस्टर’ (तनाव कम करने का जरिया) बन चुका है. दिन-रात टेस्ट सीरीज़ और कोचिंग के दबाव में जी रहे छात्रों का मानना है कि अपनी मेहनत के साथ जब भगवान का आशीर्वाद जुड़ जाता है, तो मंजिल का रास्ता थोड़ा आसान हो जाता है. यहाँ आकर उन्हें एक मानसिक शांति और आगे बढ़ने की सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
जहाँ सपने इम्तिहान देते हैंकोटा के बारे में अक्सर कहा जाता है कि यहाँ सिर्फ छात्र ही परीक्षा नहीं देते, बल्कि उनके परिवारों के सपने भी इम्तिहान देते हैं. मनोकामना मंदिर की दीवारों पर लिखे ये शब्द सिर्फ स्याही के निशान नहीं, बल्कि एक उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें हैं. 21 जून को होने वाली परीक्षा से ठीक पहले, यह मंदिर इस बात का गवाह है कि जब इंसान अपनी मेहनत की आखिरी सीमा पर होता है, तब आस्था ही उसे थामे रखती है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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