Rajasthan

5 साल तक एक शब्द नहीं बोला बेटा, फिर माता के दरबार में हुआ कुछ ऐसा कि परिवार रह गया दंग

Last Updated:June 19, 2026, 05:33 IST

Kheemaj Mata Bhinmal Jalore: जालौर के भीनमाल में स्थित क्षेमंकारी माता (खीमज देवी) मंदिर में एक दंपति ने चमत्कारिक अनुभव साझा किया है. उनका दावा है कि उनका बेटा 5 साल से बोल नहीं पा रहा था, लेकिन मां के दरबार में ‘जडुला’ की मन्नत मांगते ही बच्चा ठीक हो गया और अब हिंदी-अंग्रेजी दोनों बोलता है. सोलंकी राजपूत समाज की कुलदेवी का यह मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जहां दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और मां को मार्ग की रक्षक देवी माना जाता है.

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Kheemaj Mata Bhinmal Jalore: राजस्थान के जालौर जिले के भीनमाल क्षेत्र में स्थित क्षेमंकरी देवी मंदिर सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है. स्थानीय लोग इन्हें “खीमज माता”, “खीमज देवी”, “खींवज माता” और “क्षेमज देवी” जैसे कई आत्मीय नामों से पुकारते हैं. इन्हें इस क्षेत्र की आदिदेवी के रूप में पूजा जाता है और यह सोलंकी राजपूत समाज की कुलदेवी भी हैं. मान्यता है कि मां क्षेमंकरी अपने दर पर आने वाले हर भक्त की रक्षा करती हैं और उनके जीवन के बड़े से बड़े संकट को चुटकियों में दूर कर देती हैं.

भीनमाल मुख्य शहर से लगभग तीन किलोमीटर दूर खारा मार्ग पर यह ऐतिहासिक मंदिर एक ऊँची पहाड़ी पर सुशोभित है. मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियों की चढ़ाई पूरी करनी होती है. पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां का वातावरण बेहद शांत और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर रहता है. यह पावन धाम केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक संस्कृति, अटूट विश्वास और प्राचीन परंपराओं का भी एक बहुत बड़ा केंद्र माना जाता है.

चमत्कार या अटूट श्रद्धा: 5 साल से मूक बच्चे ने बोलना शुरू कियाइस मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं के चमत्कारिक और भावुक अनुभव अक्सर सामने आते रहते हैं. हाल ही में एक स्थानीय दंपति ने मां की महिमा का सजीव अनुभव साझा किया है. दंपति के अनुसार, उनका बेटा पिछले 5 वर्षों से बोलने में पूरी तरह असमर्थ था. देश-विदेश के कई बड़े डॉक्टरों से इलाज करवाने के बाद भी बच्चे की स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था. थक-हारकर परिवार ने मां क्षेमंकारी के दरबार में माथा टेका और लगातार आराधना शुरू की.

दंपति ने बताया:

“हमने हार मान ली थी, फिर मां के चरणों में आए. हमने बच्चे के नाम की ‘चोटी’ बोली, जिसे मारवाड़ी परंपरा में ‘जडुला’ या मुंडन संस्कार की मन्नत कहा जाता है. जिस दिन हमने मंदिर में यह मन्नत रखी, उसी दिन से बच्चे के भीतर जादुई बदलाव आने लगा.”

अब हिंदी के साथ अंग्रेजी भी पढ़ता है बच्चापरिवार का दावा है कि मां की कृपा से बच्चे की हालत में दिन-प्रतिदिन तेजी से सुधार हुआ. जो बच्चा पहले एक शब्द भी नहीं बोल पाता था, वह अब बिल्कुल सामान्य बच्चों की तरह स्पष्ट रूप से बातचीत करता है. चमत्कार यहीं नहीं रुका, दंपति का कहना है कि उनका बेटा अब न केवल हिंदी बल्कि अंग्रेजी भाषा को भी बहुत आसानी से पढ़ और समझ सकता है. यह परिवार पिछले 11 वर्षों से लगातार मां क्षेमंकरी के दर्शन के लिए आ रहा है और इस घटना के बाद देवी के प्रति उनकी श्रद्धा और अधिक गहरी हो गई है.

मार्ग की रक्षा करने वाली आदि शक्ति हैं खीमज माताधार्मिक ग्रंथों, प्राचीन कथाओं और स्थानीय लोक मान्यताओं में मां क्षेमंकरी को ‘मार्ग की रक्षा करने वाली देवी’ के रूप में वर्णित किया गया है. ऐसा माना जाता है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले यात्रियों और प्रवासियों की यात्रा मां की कृपा से हमेशा सुरक्षित और मंगलमय होती है. यही कारण है कि केवल जालौर या राजस्थान ही नहीं, बल्कि गुजरात और देश के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां आते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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