CCTV Rule : मकान मालिक आपके फ्लैट के सामने सीसीटीवी कैमरा लगा सकता है या नहीं, लड़ाई-झगड़े से बचना है तो जान लें नियम

Last Updated:August 08, 2026, 22:06 IST
CCTV Rule in India : सीसीटीवी तो अब हर कोई अपनी प्रॉपर्टी पर लगाना चाहता है और लगाते भी हैं. लेकिन, क्या आपका मकान मालिक बिना आपकी अनुमति के फ्लैट के बाहर और एंट्री गेट पर कैमरा लगा सकता है. इस बात को लेकर मेट्रो सिटीज में अक्सर विवाद सामने आते रहते हैं. अगर कानून की जानकारी हो तो आप इन विवादों से आसानी से बच सकते हैं.मकान मालिक बिना अनुमति के किरायेदार के घर पर सीसीटीवी नहीं लगा सकता है.
नई दिल्ली. सीसीटीवी लगाना अब सिर्फ लग्जरी का अहसास नहीं, बल्कि सुरक्षा की जरूरत बन चुका है. आपका घर हो या फिर किराये का मकान, हर जगह सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरा लगाना जरूरी हो गया है. खासकर मेट्रो शहरों में तो इसकी जरूरत सबसे ज्यादा महसूस की जाती है. लेकिन, पिछले कुछ दिनों से सीसीटीवी को लेकर विवाद के कई मामले सामने आ चुके हैं. ऐसा ही एक मामला देश की सर्वोच्च अदालत तक जा पहुंचा. इसके बाद एक सवाल हर किसी के मन में उठना शुरू हो गया है कि क्या मकान मालिक किराये के घर में सीसीटीवी लगवा सकता है या फिर उसे अधिकार नहीं है, भले ही मकान पर उसका मालिकाना हक क्यों न हो.
दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में तो किराये पर मकान देना कमाई का एक जरिया बन चुका है. लेकिन, अगर आपके फ्लैट के आगे मकान मालिक सीसीटीवी कैमरा लगाता है तो क्या ये सही बात है. वैसे तो मकान मालिक को अपनी संपत्ति की सुरक्षा करने के लिए सीसीटीवी लगाने का पूरा अधिकार है. लेकिन, क्या हो अगर वह कॉमन कॉरिडोर के साथ बॉलकनी और अन्य जगहों पर भी सीसीटीवी कैमरा लगा दे, खासकर एंट्रेंस गेट पर कैमरा लगाया जा सकता है या नहीं.
क्या कहता है भारतीय कानूनभारतीय आईटी एक्ट के तहत मकान मालिक के सीसीटीवी लगाने का अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस जगह पर कैमरे लगा रहे हैं. सबसे पहली बात तो मकान मालिक को इस बात का वैलिड रीजन देना होगा कि वह सीसीटीवी कैमरा सिक्योरिटी के लिहाज से ही लगवा रहे हैं. खासकर एंट्रेंस गेट और कॉमन एरिया में. लेकिन, अगर उनके लगाए सीसीटीवी किसी ऐसी जगह पर हैं जो किरायेदार की प्राइवेसी में दखल देते हैं तो यह गंभीर मुद्दा होगा.
क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसलासाल 2017 में शीर्ष अदालत ने एक फैसले में कहा था कि निजता का अधिकार एक व्यक्ति का जीवन जीने का मूल अधिकार होता है. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार भी माना जाता है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने भी अपने एक फैसले में किरायेदार के पक्ष में फैसला सुनाया था. इस मामले में मकान मालिक ने मकान के अंदर और बाहर 15 सीसीटीवी कैमरे लगवाए थे. इसमें से 5 तो किरायेदार के घर की निगरानी के लिए लगाए गए थे. इन कैमरों को लगाने के लिए किरायेदार की अनुमति भी ली गई थी. कोर्ट ने माना कि इसमें से कुछ कैमरे प्राइवेसी में दखल देते हैं.
कानून से क्लीयर हो जाएगा विवादकिरायेदार को ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 108सी के तहत अधिकार भी मिलता है. यह कानून एक किरायेदार को मकान मालिक की प्रॉपर्टी पर शांति के साथ रहने का अधिकार देता है. हालांकि, इसके लिए किरायेदार को भी एग्रीमेंट में दी गई शर्तों के हिसाब से नियमों का पालन करना होगा. इतना ही नहीं, आईटी एक्ट 2000 की धारा 66 ई के तहत अगर कोई व्यक्ति किसी के व्यक्तिगत जगह, संपत्ति का बिना उसकी अनुमति तस्वीर खींचता है या वीडियो बनाता है तो उसे तीन साल की जेल और 2 लाख रुपये तक जुर्माना चुकाना पड़ सकता है. लिहाजा मकान मालिक यह नहीं समझना चाहिए कि संपत्ति पर उसका हक होने भर से उन्हें हर जगह सीसीटीवी लगाने का अधिकार नहीं मिल जाएगा.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 08, 2026, 22:02 IST



