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Marwadi Kumatiya Ki Sabji: एक बार खा ली तो भूल नहीं पाएंगे स्वाद! कम मेहनत में इस आसान तरीके से बनाएं देसी कुमटिया की सब्जी

Last Updated:June 19, 2026, 06:02 IST

Rajasthani Kumatiya Ki Sabji Recipe: राजस्थान के भीलवाड़ा और मेवाड़ क्षेत्र में कुमटिया की पारंपरिक सब्जी को बेहद चाव से खाया जाता है. रेगिस्तानी कुमट के पेड़ से मिलने वाली इस फली को सुखाकर सालभर सुरक्षित रखा जाता है. ग्रामीण महिला मंजू देवी के अनुसार, सूखी कुमटिया को भिगोकर और उबालकर, हींग-जीरे के तड़के और बुनियादी मसालों के साथ आसानी से बनाया जा सकता है. दही या अमचूर मिलाने से इसका स्वाद और बढ़ जाता है. इसे बाजरे या ज्वार की रोटी और छाछ के साथ सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

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Rajasthani Traditional Food Recipe : वैसे तो आमतौर पर आपने कई प्रकार की फलियों की सब्जियां खाई होंगी, लेकिन आज हम आपको एक ऐसी खास फली की सब्जी के बारे में बताने जा रहे हैं जो राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्र से निकलकर हर खास-ओ-आम के किचन तक पहुंचती है. इस सब्जी का स्वाद ऐसा लाजवाब है कि भीलवाड़ा सहित पूरे मेवाड़ और मारवाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में इसे बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है. हम बात कर रहे हैं पारंपरिक राजस्थानी कुमटिया की सब्जी की. यह पारंपरिक देसी सब्जी अपने अनोखे स्वाद और पौष्टिक गुणों के कारण सदियों से लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा तामझाम या मेहनत नहीं लगती और बहुत ही कम समय में एक बेहद स्वादिष्ट और शाही राजस्थानी भोजन तैयार हो जाता है.

कुमटिया की फली मुख्य रूप से राजस्थान के मरुस्थलीय (रेगिस्तानी) क्षेत्रों में बहुतायत से पाए जाने वाले कुमट के पेड़ से प्राप्त होती है. थार के रेगिस्तान की भीषण गर्मी में पनपने वाली यह फली औषधीय गुणों से भरपूर होती है. ग्रामीण परिवार इसे सीजन के समय पेड़ से तोड़कर और सुखाकर लंबे समय तक सुरक्षित (स्टोर) रखते हैं और सालभर जरूरत पड़ने पर इसकी सूखी सब्जी बनाते हैं. कुमटिया में प्राकृतिक सोंधे स्वाद के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने और पेट के लिए बहुत लाभदायक माने जाते हैं. यही वजह है कि यह सब्जी राजस्थान के ग्रामीण खानपान का एक बेहद महत्वपूर्ण और अभिन्न हिस्सा बनी हुई है.

ग्रामीण महिला मंजू देवी से जानिए कुमटिया बनाने की सबसे आसान विधि

भीलवाड़ा की ग्रामीण महिला मंजू देवी ने कुमटिया की प्रामाणिक और पारंपरिक रेसिपी साझा करते हुए बताया कि इसे बेहद आसान तरीके से कुछ ही मिनटों में तैयार किया जा सकता है.

तैयारी और उबालना: कुमटिया की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले सूखी फलियों को अच्छी तरह साफ कर लिया जाता है. इसके बाद इन्हें कुछ घंटों के लिए गुनगुने पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता है. जब फलियां थोड़ी फूल जाएं, तो इन्हें पानी में अच्छी तरह उबाल लिया जाता है, जिससे वे एकदम नरम और सॉफ्ट हो जाती हैं.
तड़का और मसाला पकाना: अब एक कड़ाही में सरसों या तिल का तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर उसमें जीरा, हींग और बारीक कटी हरी मिर्च का तड़का लगाएं. इसके बाद आंच को धीमा करके हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक जैसे बुनियादी मसाले डालकर थोड़ा सा पानी छिड़कें और मसालों को तेल छोड़ने तक अच्छी तरह भून लें.
सब्जी को दम देना: मसाले पूरी तरह तैयार होने के बाद इसमें उबली हुई नरम कुमटिया की फलियां डालकर अच्छी तरह मिला लें ताकि मसाला फलियों के अंदर तक समा जाए. इसके बाद इसे ढककर कुछ मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें.
खटास का तड़का: मंजू देवी बताती हैं कि कई लोग इस सब्जी के स्वाद को और अधिक चटपटा बनाने के लिए इसमें थोड़ा सा फेंटा हुआ दही या अमचूर पाउडर भी मिलाते हैं, जिससे इसका स्वाद दोगुना हो जाता है. धीमी आंच पर थोड़ी देर पकने के बाद जब यह तेल छोड़ दे, तो गैस बंद कर दें. इसकी भीनी-भीनी खुशबू और राजस्थानी स्वाद हर किसी का मन मोह लेता है.

बाजरे की रोटी और ठंडी छाछ के साथ बैठता है परफेक्ट कॉम्बिनेशन

कुमटिया की यह सूखी और चटपटी सब्जी पारंपरिक रूप से सर्दियों और गर्मियों दोनों मौसम में बेहद पसंद की जाती है. ग्रामीण इलाकों में कुमटिया की सब्जी को गरमा-गरम बाजरे की रोटी, ज्वार की रोटी या फिर मक्के के सोगरे के साथ परोसा जाता है. इसके साथ में अगर लहसुन की चटनी और एक गिलास पुदीने वाली ठंडी छाछ मिल जाए, तो राजस्थानी खाने का आनंद चरम पर पहुंच जाता है. पहले के समय में यह सब्जी लगभग हर घर में नियमित रूप से बनाई जाती थी और आज भी इसके दीवाने कम नहीं हुए हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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