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कमजोर हड्डियां और हिलते दांत भी हो जाएंगे मजबूत…जंगल का महुआ है गरीबों का काजू-बादाम, फायदे जानकर हो जाएंगे हैरान

Last Updated:June 19, 2026, 06:21 IST

Health Tips: महुवा सुपरफूड फल माना जाता है. इसके छाल, पत्ते, फूल सब उपयोगी है. यह कैल्शियम और पोषक तत्वों से भरा हुआ है. इसके खाने से हड्डी और दांत मजबूत होते हैं. वहीं, आदिवासी समुदाय पश्चिम चंपारण के वन क्षेत्रों में महुवा पर ही निर्भर हैं. आइये जानते हैं इसके फायदे.

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पश्चिम चंपारण: महुवा एक ऐसा फल है, जिसका उपयोग सदियों से सुपरफूड के रूप में किया जाता रहा है. लोग इसे भिगोकर सीधे तौर पर तो खाते ही हैं. इसके अलावा पिस कर हलवे के रूप में, रोटी के रूप में और खीर के रूप में भी सेवन करते हैं. विशेषज्ञ बताते हैं कि महुवे के सिर्फ फल को ही नहीं, बल्कि उसकी छाल, पत्तियों और फूलों तक को उपयोग में लाया जाता है. औषधीय पौधों के जानकार बेतिया के रविकांत पांडे बताते हैं कि महुवे में फास्फोरस, शुगर, कैल्शियम, प्रोटीन, वसा कार्बोहाइड्रेट, आयरन और विटामिन C सहित अन्य कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर उसे विभिन्न रोगों से बचाते हैं.

कमजोर हड्डियों के लिए है वरदान

इसे हम और विस्तार से समझते हैं. महुवे में मौजूद कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाता है. यदि किसी व्यक्ति की हड्डियां कमज़ोर हैं या उनमें दर्द की शिकायत है, तो महुवा का सेवन इस समस्या को प्राकृतिक रूप से खत्म कर सकता है. इतना ही नहीं, पतले दुबले लोग भी शरीर में मसल की बढ़ोतरी के लिए महुवे का सेवन कर सकते हैं. कैल्शियम का बेहतर स्रोत होने की वजह से इसे दूध के साथ लिया जा सकता है.

हिलते दांत को देता है मजबूती

महुवा में पाए जाने वाले एंटी-माइक्रोबियल गुण शरीर के इंफेक्शन को दूर करते हैं और पेट के कीड़ों का खात्मा कर पाचन को बेहतर करते हैं. गांव या जंगली क्षेत्र में रहने वाले लोग इसका काढ़ा बनाकर या आटे की तरह तैयार कर रोटी के रूप में सेवन करते हैं. कैल्शियम से भरपूर होने की वजह से यह हड्डियों के साथ दांतों की सेहत के लिए भी बेहद लाभप्रद होता है. दांतों की समस्या के लिए आप महुवे के पेड़ की छाल को पानी में उबालकर उसका अर्क निकाल लें और फिर उससे कुल्ला करें.

वन क्षेत्र में महुवे के पेड़ की भरमार

पश्चिम चंपारण जिले के वनवर्ती क्षेत्रों में महुवे के पेड़ की भरमार है. वन क्षेत्र के करीब रहने वाले आदिवासी समुदाय के लोग इससे मिलने वाले फल पर खूब आश्रित रहते हैं. फल के सीजन में वो सुबह सवेरे जंगल की तरफ निकल जाते हैं और फलों को चुनकर घर लाते हैं. यहां उन्हें धोकर सुखाया जाता है और फिर समय समय पर हलवा, रोटी, खीर या दूध के साथ सेवन में लाया जाता है.

About the AuthorBrijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

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