Kealadeo National Park I rajasthan news I केवलादेव में दिखी टकाचोर की झलक I bharatpur news

Last Updated:June 19, 2026, 22:00 IST
Takachor Bird: विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में इन दिनों टकाचोर, रूफस ट्रीपी पक्षी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. टाइगर टूथपिक के नाम से मशहूर यह निडर पक्षी बाघ जैसे बड़े शिकारियों के मुंह में फंसे मांस के टुकड़ों को निकालकर खा लेता है. अपनी फुर्ती, अनोखे व्यवहार और दुर्लभ मौजूदगी के कारण यह पक्षी पर्यटकों और वन्यजीव फोटोग्राफरों के बीच खासा चर्चा में है.
भरतपुर. विश्व प्रसिद्ध केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान इन दिनों एक अनोखे पक्षी की वजह से चर्चा में है. यहां टकाचोर के नाम से पहचाना जाने वाला पक्षी प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गया है. इस पक्षी को वैज्ञानिक रूप से रूफस ट्रीपी कहा जाता है, जो अपनी फुर्ती और अनोखे व्यवहार के कारण खास पहचान रखता है. केवलादेव नेशनल पार्क के नेचर गाइड ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि टकाचोर आमतौर पर घने जंगलों और टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में ज्यादा देखने को मिलता है. ऐसे में इसका केवलादेव जैसे पक्षी विहार में दिखाई देना काफी रोचक और दुर्लभ माना जा रहा है. यही वजह है कि पक्षी प्रेमी और वन्यजीव फोटोग्राफर इसे देखने के लिए खास तौर पर पार्क का रुख कर रहे हैं. टकाचोर दरअसल कौआ परिवार से जुड़ा एक पक्षी है, जिसकी पहचान उसके नारंगी-भूरे रंग के शरीर लंबी पूंछ और काले-सफेद पंखों से होती है.
यह पक्षी बेहद चतुर और फुर्तीला होता है जो पेड़ों पर तेजी से उछल-कूद करते हुए आसानी से देखा जा सकता है. इसकी सबसे दिलचस्प खासियत इसका अनोखा भोजन व्यवहार है. टकाचोर जंगली जानवरों के आसपास रहकर भोजन जुटाता है. खासकर यह बाघ जैसे बड़े शिकारी के पास जाकर उनके मुंह में फंसे मांस के टुकड़ों को निकालकर खा लेता है. इसी अनोखी आदत के कारण इसे टाइगर टूथपिक के नाम से भी जाना जाता है. यह व्यवहार इसे अन्य पक्षियों से अलग और बेहद खास बनाता है. वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में इस पक्षी की मौजूदगी यहां की जैव विविधता को और समृद्ध दर्शाती है. साथ ही यह पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव भी प्रदान कर रही है. फिलहाल टकाचोर को देखने के लिए पार्क में आने वाले लोगों की उत्सुकता लगातार बढ़ रही है, जिससे यह पक्षी चर्चा का प्रमुख विषय बना जाता है. अब ये भरतपुर के विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क में नजर आ रहा है.
यह पक्षी बहुत निडर होता है, यह पक्षी अक्सर छोटे शिकारियों से भोजन झपटने में माहिर होता है. यह पक्षी प्रकृति में कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करता है. टकाचोर कीड़ों, फलों यहां तक कि मरे हुए जानवरों के अवशेषों को भी खाता है, यह संतुलित पारिस्तिथिकी तंत्र को बनाए रखने में भी मदद करता है. इसकी फुर्ती, आकर्षक रूप और रोचक व्यवहार इसे और पक्षियों से अलग बनाता है. इसकी एक खास बात ये भी है की यह बाघ जैसे बड़े शिकारी के पास जाकर उनके मुंह में फंसे मांस के टुकड़ों को निकालकर खा लेता है. इसी अनोखी आदत के कारण इसे टाइगर टूथपिक के नाम से भी जाना जाता है. फिलहाल पार्क में आने वाले लोगों के बीच ये आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
About the AuthorMonali Paul
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
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