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सीकर में दलहन क्रांति लाने की तैयारी, मूंग-उड़द की खेती पर फोकस, जानें कृषि विभाग का लक्ष्य

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सीकर में दलहन क्रांति लाने की तैयारी, मूंग-उड़द की खेती पर फोकस, जानें लक्ष्य

Last Updated:June 19, 2026, 13:01 IST

Sikar Kharif 2026 Crop Target: कृषि विभाग ने सीकर में मूंग, उड़द, अरहर और मोठ जैसी दलहनी फसलों को बढ़ावा देने की योजना बनाई है. विशेषज्ञों के अनुसार ये फसलें कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मददगार हैं. खरीफ 2026 के लिए बाजरा, ग्वार, मूंगफली, मूंग और अन्य फसलों के बुवाई लक्ष्य भी तय किए गए हैं. बाजरा 2 लाख 10 हजार हेक्टेयर, ग्वार 1 लाख 22 हजार हेक्टेयर, मूंगफली 37 हजार हेक्टेयर, मूंग 34 हजार हेक्टेयर, चंवला 18 हजार हेक्टेयर, मोठ 400 हेक्टेयर तथा तिल 260 हेक्टेयर क्षेत्र में बोने का लक्ष्य रखा गया है. इससे स्थानीय स्तर पर दालों का उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मजबूत होगी और किसानों को बेहतर आर्थिक अवसर मिल सकेंगे. इससे फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा.

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सीकर. खरीफ सीजन 2026 में कृषि विभाग ने सीकर जिले में दलहनी फसलों के रकबे और उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है. विभाग ने इस बार 50 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में दलहन फसलों की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके लिए किसानों को उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती की तकनीक और फसल प्रदर्शन कार्यक्रमों से जोड़ने की रणनीति बनाई गई है, ताकि उत्पादन और आय दोनों में बढ़ोतरी हो सके.

कृषि विभाग के अनुसार जिले में करीब 9 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इन प्रदर्शनों के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्मों, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा रोग एवं कीट प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी जाएगी. विभाग का उद्देश्य है कि किसान नई तकनीकों के परिणामों को खेतों में प्रत्यक्ष रूप से देखकर उन्हें अपनाने के लिए प्रेरित हों.

इन फसलों को दिया जा रहा है बढ़ावा

दलहनी फसलों में मुख्य रूप से मूंग, उड़द, अरहर और मोठ की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ ने बताया कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देती हैं, इसलिए जल संकट वाले क्षेत्रों के लिए अधिक उपयुक्त हैं. साथ ही दलहनी फसलें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं. ये फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर भूमि की गुणवत्ता सुधारती हैं, जिससे आगामी फसलों के लिए रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हो जाती है.

फसल बुवाई का ये रखा गया है लक्ष्य

दलहन क्षेत्र बढ़ने से खेती की लागत नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी. स्थानीय स्तर पर दालों का उत्पादन बढ़ने से बाजार में आपूर्ति मजबूत होगी और किसानों को बेहतर आर्थिक अवसर मिल सकेंगे. फस विविधीकरण से किसानों की आय के नए स्रोत विकसित होंगे तथा कृषि क्षेत्र अधिक टिकाऊ बन सकेगा. खरीफ 2026 के लिए जिले में विभिन्न फसलों के बुवाई लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं. इनमें बाजरा 2 लाख 10 हजार हेक्टेयर, ग्वार 1 लाख 22 हजार हेक्टेयर, मूंगफली 37 हजार हेक्टेयर, मूंग 34 हजार हेक्टेयर, चंवला 18 हजार हेक्टेयर, मोठ 400 हेक्टेयर तथा तिल 260 हेक्टेयर क्षेत्र में बोने का लक्ष्य रखा गया है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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