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बरसात में बकरियां पड़ सकती हैं बीमार! भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, पशुपालकों पर पड़ सकती है भारी

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बरसात में बकरियां पड़ सकती हैं बीमार! ये 5 गलतियां पड़ सकती है भारी

Last Updated:June 23, 2026, 06:37 IST

Monsoon Goat Rearing Tips: बारिश का मौसम बकरी पालन करने वाले पशुपालकों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान नमी, कीचड़ और गंदगी के कारण कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, बकरियों के बाड़े को साफ, सूखा और हवादार रखना बेहद जरूरी है. गीला या फफूंद लगा चारा खिलाने से बचना चाहिए और ताजा हरा चारा, संतुलित दाना तथा साफ पानी उपलब्ध कराना चाहिए. साथ ही समय-समय पर कृमिनाशक दवा और टीकाकरण करवाना जरूरी है. सही देखभाल से बकरियां स्वस्थ रहती हैं, दूध उत्पादन बेहतर होता है और पशुपालक आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं.

बारिश का मौसम शुरू होते ही बकरी पालन करने वाले पशुपालकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है.  इस मौसम में अधिक नमी, कीचड़ और गंदगी के कारण बकरियों में कई तरह की बीमारियां फैलने का खतरा रहता है. यदि समय पर सही देखभाल नहीं की जाए तो बकरियां बीमार पड़ सकती हैं और उनके दूध उत्पादन में भी कमी आ सकती है. कुछ आसान सावधानियां अपनाकर पशुपालक अपनी बकरियों को स्वस्थ रख सकते हैं और आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं. इसलिए बरसात के पूरे मौसम में साफ-सफाई और पोषण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है.

सबसे पहले बकरियों के रहने वाले बाड़े को हमेशा साफ, सूखा और हवादार रखना चाहिए. बाड़े में बारिश का पानी जमा नहीं होना चाहिए और फर्श पर सूखा भूसा या लकड़ी का बुरादा बिछाना चाहिए ताकि नमी कम रहे. रोजाना गोबर और गंदगी की सफाई करने से संक्रमण फैलने का खतरा काफी कम हो जाता है. बकरियों को लंबे समय तक कीचड़ या गीली जगह पर नहीं रहने देना चाहिए, क्योंकि इससे खुर खराब होने और अन्य संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है.

बारिश के मौसम में बकरियों के खान-पान का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. गीला, सड़ा हुआ या फफूंद लगा चारा कभी नहीं खिलाना चाहिए, क्योंकि इससे पेट संबंधी बीमारियां हो सकती है. हमेशा ताजा हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित दाना देना चाहिए. इसके साथ ही खनिज मिश्रण और नमक भी उचित मात्रा में खिलाना जरूरी है. पीने के लिए हमेशा साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराना चाहिए तथा पानी के बर्तनों की नियमित सफाई करनी चाहिए ताकि किसी प्रकार का संक्रमण न फैले.

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बरसात में पेट के कीड़े, जूं और किलनी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ती है, इसलिए पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय-समय पर कृमिनाशक दवा देना और आवश्यक टीकाकरण करवाना बहुत जरूरी है. यदि किसी बकरी को बुखार, खांसी, दस्त, भूख कम लगना या दूध उत्पादन में अचानक कमी जैसे लक्षण दिखाई दे तो तुरंत पशु चिकित्सक से जांच करवानी चाहिए. समय पर इलाज कराने से बीमारी फैलने से रोकी जा सकती है और अन्य बकरियां भी सुरक्षित रहती है.

दूध देने वाली बकरियों को सामान्य बकरियों की तुलना में अधिक पोषण की आवश्यकता होती है. उन्हें संतुलित आहार, पर्याप्त मात्रा में दाना और खनिज तत्व देने से दूध उत्पादन बेहतर बना रहता है. लगातार बारिश होने पर बकरियों को खुले में चराने की बजाय सुरक्षित स्थान पर रखना चाहिए. तेज बारिश और ठंडी हवा से बचाने पर बकरियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और वे जल्दी बीमार नहीं पड़तीं. पशुपालकों को रोजाना बकरियों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए.बारिश के मौसम में थोड़ी-सी सावधानी बकरी पालन को अधिक लाभदायक बना सकती है. साफ-सफाई, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और पशु चिकित्सक की सलाह का पालन करने से बकरियां स्वस्थ रहती हैं और दूध उत्पादन में भी कमी नहीं आती. यदि पशुपालक इन आसान उपायों को नियमित रूप से अपनाएं तो बरसात के मौसम में होने वाले नुकसान से बचते हुए बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं.

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