Hyderabad news | हैदराबाद निजाम का गुप्त गोवा प्लान, ऑपरेशन पोलो से अंत

Last Updated:June 23, 2026, 10:36 IST
Hyderabad News : निजाम मीर उस्मान अली खान ने गोवा के मरमुगाओ बंदरगाह और रेलवे को लीज पर लेकर स्वतंत्र देश के लिए समुद्री रास्ता चाहा, पर ऑपरेशन पोलो से योजना खत्म हुई. इस बड़े सौदे को अंजाम देने के लिए निजाम ने पुर्तगाली सरकार में मजबूत पकड़ रखने वाले ब्रिटिश उद्योगपति सर अलेक्जेंडर रोजर को अपना बिचौलिया नियुक्त किया. इसके बदले उन्हें भारी-भरकम फीस भी दी गई.
हैदराबाद. सन 1947 में जब भारत अपनी आजादी का जश्न मना रहा था, तब देश के बीचों-बीच स्थित सबसे अमीर रियासत हैदराबाद के भीतर एक ऐसी गुप्त कूटनीति चल रही थी, जो अगर सफल हो जाती तो भारतीय उपमहाद्वीप का भूगोल हमेशा के लिए बदल जाता. हैदराबाद के आखिरी निजाम मीर उस्मान अली खान ने भारतीय संघ में शामिल होने के बजाय एक स्वतंत्र देश बनने का फैसला किया था. लेकिन इस सपने के आड़े एक बड़ी भौगोलिक चुनौती थी. हैदराबाद चारों तरफ से जमीन से घिरा हुआ राज्य था.
इतिहास के जानकार शाहिद उमेर के अनुसार, एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में जीवित रहने, अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने और सैन्य साजो-सामान मंगाने के लिए निजाम को हर हाल में समुद्र तक सीधी पहुंच चाहिए थी. इसके लिए निजाम ने पुर्तगाल के नियंत्रण वाले गोवा पर अपनी नजरें टिकाईं. ऐतिहासिक दस्तावेजों और ब्रिटिश लाइब्रेरी के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि निजाम ने गोवा के मरमुगाओ बंदरगाह और वहां तक जाने वाली रेलवे लाइन को खरीदने या लंबे समय के लिए पट्टे यानी लीज पर लेने की एक गंभीर और गुप्त योजना तैयार की थी.
हैदराबाद को मिलने वाला था ये रणनीतिक रास्ताइस बड़े सौदे को अंजाम देने के लिए निजाम ने पुर्तगाली सरकार में मजबूत पकड़ रखने वाले ब्रिटिश उद्योगपति सर अलेक्जेंडर रोजर को अपना बिचौलिया नियुक्त किया. इसके बदले उन्हें भारी-भरकम फीस भी दी गई. जून 1947 तक दोनों पक्षों के बीच एक कानूनी समझौते का मसौदा भी तैयार हो चुका था, जिसके तहत हैदराबाद को अरब सागर तक पहुंच का यह रणनीतिक रास्ता मिलने वाला था.
ऑपरेशन पोलो के साथ खत्म हो गया सपनाहालांकि इतिहास को कुछ और ही मंजूर था. भारत सरकार और तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल निजाम की इन गुप्त गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए थे. दूसरी ओर पुर्तगाल के तानाशाह एंटोनियो सालाजार भी भारत सरकार के कड़े रुख को देखते हुए सीधे टकराव मोल लेने से हिचकिचा रहे थे. समय तेजी से बीत रहा था और कूटनीतिक बातचीत किसी अंतिम नतीजे तक नहीं पहुंच सकी.
आखिरकार सितंबर 1948 में भारत सरकार ने सैन्य कार्रवाई, यानी ऑपरेशन पोलो, के जरिए हैदराबाद रियासत का भारतीय संघ में पूर्ण विलय कर दिया. इसी के साथ निजाम का ‘गोवा प्लान’ हमेशा के लिए फाइलों में दफ्न हो गया. यह घटना आज भी भारतीय इतिहास के सबसे बड़े और रोमांचक ‘क्या होता अगर’ अध्यायों में से एक मानी जाती है.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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