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22 साल के फर्स्ट क्लास करियर में लिए 2218 विकेट, फिर भी देश के लिए नहीं खेल पाए, एक चैंपियन गेंदबाज की अधूरी कहानी

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22 साल के करियर में 2218 फर्स्ट क्लास विकेट, फिर भी देश के लिए नहीं खेल पाए

Last Updated:June 23, 2026, 16:45 IST

डॉन शेफर्ड का करियर किसी परीकथा से कम नहीं था, बस फर्क इतना था कि इसमें “इंटरनेशनल कैप” का सपना अधूरा रह गया. उन्होंने अपने पूरे करियर में 2218 विकेट झटके एक ऐसा आंकड़ा जो किसी भी गेंदबाज़ को महानता की श्रेणी में खड़ा कर देता है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद वह इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम में कभी जगह नहीं बना स22 साल के करियर में 2218 फर्स्ट क्लास विकेट, फिर भी देश के लिए नहीं खेल पाएZoom22 साल के फर्स्ट क्लास करियर में इंग्लैंड के डॉन शेफर्ड ने 2218 विकेट लिए पर देश के लिए कभी नहीं खेल पाए

नई दिल्ली. क्रिकेट इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो सुर्खियों से दूर रहते हुए भी अपने प्रदर्शन से अमर हो जाते हैं. डॉन शेफर्ड ऐसा ही एक नाम है एक ऐसा खिलाड़ी जिसने रिकॉर्ड तोड़े, आंकड़ों को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया, लेकिन कभी अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला. यह कहानी है जुनून, मेहनत और उस किस्मत की, जो कभी-कभी महान खिलाड़ियों के साथ भी न्याय नहीं कर पाती.

डॉन शेफर्ड का करियर किसी परीकथा से कम नहीं था, बस फर्क इतना था कि इसमें “इंटरनेशनल कैप” का सपना अधूरा रह गया. उन्होंने अपने पूरे करियर में 2218 विकेट झटके एक ऐसा आंकड़ा जो किसी भी गेंदबाज़ को महानता की श्रेणी में खड़ा कर देता है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद वह इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम में कभी जगह नहीं बना सके.

काउंटी क्रिकेट में झटके 2218 विकेट

शेफर्ड ने 22 साल तक Glamorgan County Cricket Club के लिए खेला और इस दौरान वह टीम के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज़ों में से एक बने रहे. शुरुआत में वह एक तेज़ गेंदबाज़ थे, लेकिन 1955 में उन्होंने अपने करियर को नई दिशा देते हुए स्पिन गेंदबाज़ी अपनाई. यही फैसला उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उनकी स्पिन इतनी घातक साबित हुई कि बल्लेबाज़ उनके सामने टिक नहीं पाते थे. 1957 का सीज़न उनके करियर का स्वर्णिम अध्याय बन गया. उस साल उन्होंने एक ही सीज़न में 177 विकेट झटके. एक ऐसा कारनामा जो आज भी क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर देता है. यह सिर्फ एक बार की बात नहीं था उन्होंने 12 अलग-अलग सीज़नों में 100 से ज्यादा विकेट लिए, जो उनकी निरंतरता और फिटनेस का प्रमाण है.

45 की उम्र तक खेले फर्स्ट क्लास क्रिकेट

उनकी गेंदबाज़ी में नियंत्रण, धैर्य और चालाकी का अद्भुत मिश्रण था. यही वजह रही कि उन्होंने अपने करियर में 123 बार पांच विकेट हॉल लिया. एक ऐसा आंकड़ा जो बताता है कि वह कितनी बार अकेले मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते थे. 45 साल की उम्र में जब उन्होंने क्रिकेट को अलविदा कहा, तब तक वह 2218 विकेट अपने नाम कर चुके थे. यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी है जिसने बिना अंतर्राष्ट्रीय मंच के भी अपनी पहचान बनाई और क्रिकेट के इतिहास में अमिट छाप छोड़ी. डॉन शेफर्ड की कहानी हमें यह सिखाती है कि महानता सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने से नहीं मिलती, बल्कि निरंतर प्रदर्शन, समर्पण और खेल के प्रति जुनून ही असली पहचान बनाते हैं. उनका नाम भले ही इंटरनेशनल रिकॉर्ड्स में दर्ज न हो, लेकिन क्रिकेट के सच्चे जानकारों के दिलों में वह हमेशा एक लीजेंड के रूप में जिंदा रहेंगे.

About the AuthorRajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें

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