हेमावास की ‘वंडर वुमन’, हर दूसरे घर में बनती हैं चमचमाती चूड़ियां, रेल मंत्री भी कर चुके इन महिलाओं की प्रशंसा

Last Updated:June 24, 2026, 20:51 IST
पाली जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर हेमावास गांव ने पिछले एक दशक में विकास और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की है. चूड़ी उद्योग से जुड़ी करीब 2 हजार महिलाएं आज आधुनिक मशीनों की मदद से रोजगार हासिल कर रही हैं और परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं. वहीं हेमावास बांध सिंचाई और पेयजल की जरूरतें पूरी कर क्षेत्र की समृद्धि में अहम भूमिका निभा रहा है. मेहनत, हुनर और सामूहिक प्रयासों ने इस गांव को बदलाव की प्रेरक कहानी बना दिया है.
पाली जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर उदयपुर मेगा हाईवे पर हेमावास गांव बसा है. करीब 4 हजार की आबादी और 1500 घरों की इस बस्ती की तस्वीर पिछले 10 सालों में पूरी तरह बदल चुकी है. कभी यहां हाथों से बेहद सीमित मात्रा में चूड़ियां बनती थी, लेकिन आज आधुनिक मशीनों की मदद से यहां की महिलाएं चूड़ियों पर चमचमाते नगीने जड़ने का काम बड़े स्तर पर कर रही हैं.
पिछले 10 सालों से यहां की महिलाएं इस उद्योग से जुड़कर काम कर रही है. परिवार को पालने के साथ-साथ कुछ ग्रुप तो चूड़ी की मैन्यूफैक्चरिंग तक करते हैं. पहले हाथों से एक दो घरों में काम होता था, लेकिन इसके बाद मशीनों से चूड़ी पर नगीने लगाए जाने लगे हैं. इन महिलाओं के हुनर की रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव प्रशंसा कर चुके हैं.
दूसरी तरफ शहर की प्यास बुझाने के लिए भी इसी बांध से पानी भी लिया जाता है. जब यह खाली होता है तो सब्जियां व खरबूजे पैदा होते हैं, जो पूरे मारवाड़ में प्रसिद्ध हैं. यहां के खरबूजे की मिठास अलग ही है. जब पानी रहता है तो गेहूं की बंपर फसल होती है. जनसंख्या की बात करे तो 4 हजार साक्षरता, 65 फीसदी कनेक्टिवटी और जिला मुख्यालय से 10 किमी दूरी के साथ यह उदयपुर मेगा हाइवे पर स्थित है.
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