अचानक सुनाई देना हुआ बंद, रेयर बीमारी से जूझ रही गायिका अलका याग्निक, जानें क्या है SNHL

Last Updated:June 24, 2026, 20:48 IST
Sudden Hearing Loss: हिन्दी सिनेमा की मशहूर गायिका अलका याग्निक पिछले दो सालों से एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही हैं. इस बीमारी का नाम सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) है. इस समस्या के कारण उनकी सुनने की शक्ति प्रभावित हुई, जिससे वह नए गाने रिकॉर्ड नहीं कर पा रही हैं और संगीत जगत से दूर हैं. यहां आप इस बीमारी के बारे में डिटेल में जान सकते हैं.
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हिन्दी सिनेमा की मशहूर गायिका अलका याग्निक को भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. 23 जून 2026 को आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान दिया. इस दौरान अलका याग्निक की कमजोर स्वास्थ्य ने फैंस को चिंता में डाल दिया. जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि पिछले दो सालों से वह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही हैं और इसी कारण वो फंक्शन से दूर रहती हैं.
अलका याग्निक ने बताया कि वर्ष 2024 में एक उड़ान यात्रा के बाद उन्हें अचानक सुनने की क्षमता से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी हो गई. इस बीमारी का नाम सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस (SNHL) है. इस समस्या के कारण उनकी सुनने की शक्ति प्रभावित हुई, जिससे वह नए गाने रिकॉर्ड नहीं कर पा रही हैं और संगीत जगत से दूर हैं.
क्या होता है SNHLसेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कान के अंदर मौजूद सूक्ष्म कोशिकाएं या ध्वनि को मस्तिष्क तक पहुंचाने वाली नसें डैमेज हो जाती हैं. इसके कारण व्यक्ति को सुनने में कठिनाई होने लगती है. यह समस्या धीरे-धीरे भी हो सकती है और अचानक भी सामने आ सकती है. कई मामलों में यह स्थायी भी हो सकती है.
कैसे होते है ये बीमारीइस बीमारी के कई कारण हो सकते हैं. बढ़ती उम्र, लंबे समय तक तेज आवाज में रहना, कानों में संक्रमण, वायरल बीमारी, सिर में चोट, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट और आनुवंशिक कारण इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं. अलका याग्निक के मामले में वायरल संक्रमण को इसका मुख्य कारण माना गया है.
SNHL के लक्षणइस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में सुनने की क्षमता कम होना, आवाजों का धुंधला सुनाई देना, भीड़भाड़ वाली जगहों पर बातचीत समझने में परेशानी, कानों में घंटी या सीटी जैसी आवाज सुनाई देना, कान भरा-भरा महसूस होना और कभी-कभी चक्कर आना शामिल हैं.
निदानइस बीमारी की पहचान के लिए सुनने की जांच, एमआरआई और कई टेस्ट किए जाते हैं. शुरुआती अवस्था में डॉक्टर स्टेरॉयड दवाओं की मदद से इलाज करते हैं. यदि सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो जाए, तो हियरिंग एड या कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं.
बचाव के उपायहालांकि हर मामले को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन तेज आवाज से बचना, हेडफोन का सीमित उपयोग करना, कानों की नियमित जांच करवाना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना इस समस्या के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है. अलका याग्निक भी युवाओं को तेज संगीत और अत्यधिक हेडफोन उपयोग से बचने की सलाह देती रही हैं.
About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor
शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



