भारत के AMCA पर आई मुसीबत, तेजस वाले फेर में फंसा 5th जेन फाइटर जेट प्लान, अमेरिकी कंपनी ने लगाया अड़ंगा

भारत के महत्वकांक्षी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान (5th Gen Fighter Jet) को लेकर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं. दरअसल इन विमानों के निर्माण के लिए चलाए जा रहे AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) प्रोजेक्ट में अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) रोड़े अटकाने लगी है. दरअसल जीई के F414 इंजन की कीमत और टेक्नॉलजी ट्रांसफर को लेकर बातचीत अटक गई है. खबर है कि जीई ने F414 इंजन की कीमत में करीब तीन गुना तक बढ़ोतरी कर दी है. इसके साथ ही भारत में इंजन निर्माण और तकनीक हस्तांतरण से जुड़ी शर्तों पर भी दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. इससे सिर्फ देसी राफेल कहे जाने वाले तेजस Mk-2 ही नहीं, बल्कि भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट AMCA और नौसेना के TEDBF कार्यक्रम पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
पहले F404 इंजन में देरी, अब F414 पर नया बखेड़ा
जीई एयरोस्पेस पहले ही तेजस Mk-1A फाइटर जेस्ट के लिए F404-IN20 इंजनों की सप्लाई में भारी देरी को लेकर आलोचना झेल रही है. भारत ने 2021 में 99 F404 इंजन का ऑर्डर दिया था, लेकिन अब तक केवल 6 इंजन ही मिल पाए हैं. इस देरी के चलते हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने जीई पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. हालांकि जीई ने भरोसा दिया है कि आने वाले कुछ ही महीनों में 20 और इंजन की डिलीवरी की जाएगी.
इससे F-404 इंजन का मसला थोड़ा सुझलता दिख रहा था कि अब F414 इंजन को लेकर नई अड़चन सामने आ गई. इससे भारत के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का निर्माण अटकने की आशंका है.
तीन गुना बढ़ाई कीमत!
रक्षा मामलों की रिपोर्ट करने वाली वेबसाइट डिफेंस.इन की रिपोर्ट के मुताबिक, जीई ने F414 इंजन की कीमत पहले करीब 70-80 करोड़ रुपये प्रति इंजन बताई थी, लेकिन अब यह कीमत बढ़ाकर लगभग 200 करोड़ रुपये प्रति इंजन कर दी गई है. यानी अचानक से इंजन की कीमतों में करीब 300 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी गई. इसी वजह से एचएएल और जीई के बीच इंजन खरीद को लेकर चल रही बातचीत लगभग ठहर गई है. वह दोनों पक्ष कीमतों और दूसरी शर्तों पर सहमति नहीं बना पा रहे हैं.
जीई ने F414 इंजन की कीमत में करीब तीन गुना तक बढ़ोतरी कर दी है.
टेक्नॉलजी ट्रांसफर पर भी अटका मामला
जीई के साथ सिर्फ कीमत ही नहीं, बल्कि इन इंजन के भारत में निर्माण और इसके लिए जरूरी टेक्नॉलजी ट्रांसफर को लेकर भी बातचीत में बड़ा गतिरोध आ गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, GE भारत में F414 इंजन की असेंबली और मैन्युफैक्चरिंग लाइन स्थापित करने के लिए 800 मिलियन डॉलर (करीब 6,000 करोड़ रुपये) से अधिक की मांग कर रही है. इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत जारी है.
AMCA और तेजस Mk-2 के लिए क्यों अहम है F414?
F414 इंजन भारत के कई सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू विमान कार्यक्रमों की रीढ़ माना जाता है. यही इंजन स्वदेशी तेजस Mk-2 को शक्ति देगा. इसके अलावा भारत के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर AMCA Mk-1 के शुरुआती संस्करण में भी इसी इंजन के इस्तेमाल की योजना है. वहीं भारतीय नौसेना के ट्विन इंजन डेक बेस्ड फाइटर जेट्स (TEDBF) कार्यक्रम को भी इसी इंजन के आधार पर डिजाइन किया गया है.
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले वर्षों में भारत को इन परियोजनाओं के लिए 200 से अधिक F414 इंजनों की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में यदि बातचीत लंबी खिंचती है या समझौते में देरी होती है, तो इन सभी परियोजनाओं की समय-सीमा प्रभावित हो सकती है.
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भारत लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और स्वदेशी लड़ाकू विमानों के विकास पर काम कर रहा है. ऐसे में F414 इंजन सिर्फ एक आयातित उत्पाद नहीं, बल्कि कई रणनीतिक परियोजनाओं की बुनियाद है. अगर इंजन की कीमत, टेक्नॉलजी ट्रांसफर और स्थानीय निर्माण को लेकर सहमति नहीं बनती, तो इसका असर AMCA, तेजस Mk-2 और TEDBF जैसे अहम कार्यक्रमों की प्रगति पर पड़ सकता है.
हालांकि, इस गतिरोध की खबरों पर एचएएल ने आधिकारिक तौर पर सफाई दे दी है. एचएएल ने साफ कहा है कि GE के साथ बातचीत सामान्य तरीके से आगे बढ़ रही है और किसी तरह का गतिरोध नहीं है.


