Jaipur News | Jaipur Ka Tazia | India Ka best tazia

Last Updated:June 26, 2026, 12:02 IST
Jaipur Tazia Made Up With Gold And Silver : जयपुर के इस शाही ताज़िया को 1868 में तत्कालीन महाराजा राम सिंह द्वारा बनवाया गया था. सिर्फ मोहर्रम के त्यौहार पर ही इस ताजिए को लोगों को देखने के लिए निकाला जाता हैं. लोकल-18 से बातचीत में अब्दुल सत्तार बताते हैं कि वैसे तो मोहर्रम पर जयपुर में सैकड़ों कारीगर दिन-रात मेहनत कर ताजिए तैयार करते हैं, लेकिन यह ताजिया सबसे खास है क्योंकि यह पूरी तरह सोने और चांदी से निर्मित है. उस दौर में जब इसे बनाया गया था, तब इसमें 10 किलो सोना और 60 किलो चांदी का उपयोग किया गया था, जिसकी चमक आज भी बरकरार है.
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जयपुर. हर साल जयपुर में मोहर्रम बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है. शहर में 300 से अधिक ताजियों को मोहर्रम पर कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है. लेकिन जयपुर में बनने वाले ताजियों में एक ऐसा अनोखा ताजिया भी है, जिसे वर्षों से संभालकर रखा गया है. इस बार यह खास ताजिया सिटी पैलेस के बाहर त्रिपोलिया गेट के पास सजाया गया है, जो जयपुर का शाही ताजिया है. लोकल-18 ने इस खास ताजिए को लेकर ताजिया कारीगर अब्दुल सत्तार से बात की. उन्होंने बताया कि यह ताजिया जयपुर की गंगा-जमुनी तहजीब और साझा संस्कृति की विरासत है, जिसे वर्षों से सुरक्षित रखा गया है.
अब्दुल सत्तार बताते हैं कि यह शाही ताजिया वर्ष 1868 में तत्कालीन महाराजा राम सिंह द्वारा बनवाया गया था. केवल मोहर्रम के अवसर पर ही इस ताजिए को लोगों के दर्शन के लिए निकाला जाता है. उनका कहना है कि यह जयपुर का एकमात्र ताजिया है, जिसे किसी हिंदू राजा ने बनवाया था. यही वजह है कि इसे देशभर में हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. हर साल हजारों लोग दूर-दूर से इस खास ताजिए को देखने यहां पहुंचते हैं.
10 किलो सोने और 60 किलो चांदी से बना है ताजियालोकल-18 से बातचीत में अब्दुल सत्तार बताते हैं कि वैसे तो मोहर्रम पर जयपुर में सैकड़ों कारीगर दिन-रात मेहनत कर ताजिए तैयार करते हैं, लेकिन यह ताजिया सबसे खास है क्योंकि यह पूरी तरह सोने और चांदी से निर्मित है. उस दौर में जब इसे बनाया गया था, तब इसमें 10 किलो सोना और 60 किलो चांदी का उपयोग किया गया था, जिसकी चमक आज भी बरकरार है. ताजिए पर सोने-चांदी की बारीक कढ़ाई की गई है, जो इसे बेहद आकर्षक बनाती है. उन्होंने बताया कि महाराजा राम सिंह ने अपनी एक मन्नत पूरी होने के बाद विशेष रूप से इस ताजिए का निर्माण करवाया था. आज भी हिंदू समाज के लोग इस ताजिए पर मोली चढ़ाते हैं और श्रद्धा के साथ इसके दर्शन करने आते हैं. मोहर्रम पर निकाले जाने वाले अन्य सभी ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाता है, लेकिन इस शाही ताजिए को सुरक्षित रख लिया जाता है और अगले मोहर्रम पर दोबारा निकाला जाता है. यह परंपरा करीब 150 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है.
मोहर्रम पर जयपुर में दिख रही खास रौनकमोहर्रम के मौके पर जयपुर में खास रौनक देखने को मिल रही है. बीती रात मातमी धुनों के बीच कत्ल की रात मनाई गई. इमाम हुसैन की शहादत की याद में मुस्लिम मोहल्लों से बारादरी के ताजिए निकलकर पहले इमामबाड़ों तक पहुंचे और फिर ढोल-ताशों की मातमी धुनों के साथ जुलूस बड़ी चौपड़ तक गया. शहर के अलग-अलग मोहल्लों से छोटे-बड़े 300 से अधिक ताजियों के जुलूस निकाले गए. हर साल की तरह इस बार भी जयपुर के कारीगरों ने शानदार ताजिए तैयार किए हैं. चारदीवारी क्षेत्र के मोहल्ला पन्नीगरान में 50 कारीगरों ने ताजमहल की तर्ज पर एक ताजिया बनाया है, जो 25 फीट लंबा और 15 फीट चौड़ा है. इसके अलावा भी जयपुर में कई खूबसूरत ताजिए तैयार किए गए हैं, जिन्हें कारीगरों ने पूरे साल की मेहनत से सजाया और संवारा है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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