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Sikar News | Sarkari Tazia | Muharram 2026

Last Updated:June 26, 2026, 12:12 IST

Sikar Sarkari Tazia On Muharram 2026 : सीकर में मोहर्रम पर 293 साल पुरानी सरकारी ताजिया परंपरा जारी, राव राजा शिवसिंह के समय 1789 में शुरू जुलूस आज भी सुल्तानशाह वार्ड से निकलकर कर्बला तक जाता है. महावीर पुरोहित ने बताया कि एक दिन बाबा चार कुतुब राव राजा शिवसिंह के दरबार में पहुंचे और मोहर्रम की 10वीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में सरकारी ताजिया निकालने की अनुमति मांगी. राजा ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए तुरंत स्वीकृति दे दी.

सीकर. मोहर्रम के पवित्र अवसर पर सीकर शहर में पारंपरिक तरीके से धूमधाम के साथ ताजियों का जुलूस निकाला जाता है. यहां आज भी सैकड़ों साल पुरानी राजशाही परंपरा निभाई जाती है. सीकर के राजा द्वारा शुरू किया गया ताजिया आज भी निकाला जाता है, जिसे सरकारी ताजिया कहा जाता है. पूरे शहर में निकाले जाने वाले अनेक ताजियों में यह सबसे प्रमुख होता है. यह सरकारी ताजिया सबसे पहले रवाना होता है. ढोल-ताशों की मातमी धुनों और पारंपरिक करतबों के बीच ताजिए निर्धारित मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचते हैं, जहां रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाता है.

इतिहासकार महावीर पुरोहित ने बताया कि सीकर शहर में मोहर्रम पर ताजिया निकालने की परंपरा लगभग 293 वर्ष पुरानी है. उन्होंने बताया कि सीकर का पहला सरकारी ताजिया संवत 1789 (1732 ईस्वी) में तत्कालीन शासक राव राजा शिवसिंह के शासनकाल में निकाला गया था. इस ऐतिहासिक परंपरा की शुरुआत फकीर बाबा चार कुतुब की पहल पर हुई थी, जिनका शहर और गढ़ दोनों में विशेष सम्मान था. बाबा चार कुतुब चिमटा और झोली लेकर शहर में भ्रमण करते थे और लोगों के बीच उनकी बातों को काफी तवज्जो दी जाती थी.

1789 में बना था सीकर का पहला सरकारी ताजियामहावीर पुरोहित ने बताया कि एक दिन बाबा चार कुतुब राव राजा शिवसिंह के दरबार में पहुंचे और मोहर्रम की 10वीं तारीख को हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में सरकारी ताजिया निकालने की अनुमति मांगी. राजा ने उनकी भावना का सम्मान करते हुए तुरंत स्वीकृति दे दी. साथ ही ताजिया तैयार कराने के लिए कारीगरों की व्यवस्था भी करवाई. इसके बाद संवत 1789 में सीकर का पहला सरकारी ताजिया तैयार हुआ और शहर में एक नई धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का शुभारंभ हुआ, जो समय के साथ शहर की पहचान बन गई.

जुलूस में सबसे आगे रहता है सरकारी ताजियाबताया जाता है कि पहला सरकारी ताजिया बावड़ी दरवाजा, गढ़ की सिरह ड्योढ़ी और नानी दरवाजे से होते हुए कर्बला पहुंचा था. आज भी यह ऐतिहासिक परंपरा उसी तरह निभाई जा रही है. वर्तमान में सरकारी ताजिया सुल्तानशाह वार्ड-31 से निकलता है और शहर के सभी ताजियों के जुलूस में सबसे आगे रहता है. इसके पीछे शहर की दक्षिणी और उत्तरी बस्तियों से निकलने वाले अन्य ताजिए शामिल होते हैं. लगभग तीन शताब्दियों से निरंतर चली आ रही यह परंपरा सीकर की गंगा-जमुनी तहजीब का जीवंत उदाहरण है. हर वर्ष मोहर्रम के अवसर पर बड़ी संख्या में हिंदू लोग भी इस ऐतिहासिक जुलूस के साक्षी बनते हैं.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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