सुल्तानपुर के हरीपुर बनवा गांव में बौद्ध कालीन प्राचीन शिव मूर्ति, 11वीं शताब्दी की नक्काशी और आस्था की अनोखी कहानी, जानें

Last Updated:June 26, 2026, 18:06 IST
सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर हरीनाथपुर गांव के रहने वाले विनोद कुमार लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि यह शंकर जी का एक पुराना मंदिर है. जिसकी मूर्ति का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना माना जाता है. ग्रामीणों के मुताबिक यह मूर्ति दसवीं और 11वीं शताब्दी की मानी जाती है. पहले इस मूर्ति का स्थान दूसरा था लेकिन बाद में पूर्वजों ने इसे यहां पर स्थापित कर दिया और तभी से लोग यहां पर पूजा पाठ करते हैं श्रद्धालुओं के इस मंदिर में काफी गहरी आस्था भी जुड़ी हुई.
सुल्तानपुर: जिले में बौद्ध कालीन कई ऐसी मूर्तियां हैं जो सुल्तानपुर के ऐतिहासिक महत्व को आज भी बयां कर रही हैं. महमूदपुर, गढ़ा, धोपाप कई ऐसे स्थल हैं. जहां पर प्राचीन मूर्ति के मिलने से सुल्तानपुर का ऐतिहासिक प्रमाण भी मिलता है. इसी तरह सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर हरीपुर बनवा गांव में एक प्राचीन मूर्ति है जो चौकोर आकृति में है. यहां पर गांव वाले पूजा पाठ करते हैं और लोग बताते हैं कि यहां पर जो भी सच्चे मन से पूजा पाठ करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
11वीं शताब्दी का है शिव मंदिर
सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर हरीनाथपुर गांव के रहने वाले विनोद कुमार लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताते हैं कि यह शंकर जी का एक पुराना मंदिर है. जिसकी मूर्ति का इतिहास कई सौ वर्ष पुराना माना जाता है. ग्रामीणों के मुताबिक यह मूर्ति दसवीं और 11वीं शताब्दी की मानी जाती है. पहले इस मूर्ति का स्थान दूसरा था लेकिन बाद में पूर्वजों ने इसे यहां पर स्थापित कर दिया और तभी से लोग यहां पर पूजा पाठ करते हैं श्रद्धालुओं के इस मंदिर में काफी गहरी आस्था भी जुड़ी हुई.
मूर्ति की प्राचीनता इसी बात से लगाई जा सकती है कि इस मूर्ति में चौकोर आकृति का एक पत्थर है और इस चौकोर आकृति के पत्थर में ही छोटी-छोटी कई मूर्तियों की नक्काशी की गई है और छोटी-छोटी यह मूर्तियां अलग-अलग दिशाओं और कलाओं में मानव नृत्य कर रही हूं इन मूर्तियों की प्राचीनता के साथ-साथ हरीपुर बनवा ,जुड़ारा, हरीनाथपुर और कई अन्य गांव के लोगों की आस्था गहरी जुड़ी हुई हैं. यही वजह है कि यहां पर लोग साल में भंडारे भी करवाते हैं जिन लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं वह लोग भी स्थल पर दर्शन पूजन और भंडारा करते हैं.
मंदिर पहुंचने का रास्ता
अगर आप भी प्राकृतिक वातावरण के बीच मौजूद इस मंदिर तक आना चाहते हैं तो आपको सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 7 किलोमीटर दूर हरिपुर बनवा गांव आना होगा हरिपुर बनवा गांव के अंतर्गत आने वाले गांव हरीनाथपुर में यह प्राचीन मूर्ति रखी हुई है. ग्रामीणों के सहयोग से इस मूर्ति के स्थापत्य स्थान को अब विकसित करने का धीरे-धीरे प्रयास किया जा रहा है.
About the AuthorRajneesh Kumar Yadav
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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