Rajasthan

Bikaner Famous Leheriya and Doria Saree Market Price

Last Updated:June 27, 2026, 07:13 IST

Bikaner Famous Leheriya and Doria Saree Market Price: बीकानेर का पारंपरिक वस्त्र उद्योग अपनी लहरिया और डोरिया साड़ियों के लिए देशभर सहित नेपाल और बांग्लादेश में लोकप्रिय हो रहा है. हल्के कॉटन और डोरिया कपड़े पर स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक से तैयार ये साड़ियां अपनी टिकाऊ रंगत और विशेष चमक के लिए जानी जाती हैं, जिसे यहां की शुष्क जलवायु और मजबूत बनाती है. आरामदायक बनावट के कारण महिलाएं इन्हें ‘मिनी एसी साड़ी’ और इसके विशेष डिजाइन को ‘राजा प्रिंट’ कहती हैं. ₹250 से ₹3000 की रेंज में मिलने वाली इन साड़ियों की मांग सावन, तीज और शादियों के सीजन में काफी बढ़ जाती है.

कारीगर स्क्रीन प्रिंटिंग की पारंपरिक तकनीक से लहरिया और डोरिया साड़ियों पर बारीक डिजाइन तैयार करते दिखाई दे रहे हैं. हर रंग और हर पैटर्न को बेहद सावधानी से कपड़े पर उतारा जाता है ताकि तैयार साड़ी आकर्षक और गुणवत्तापूर्ण बने. इस काम में धैर्य, अनुभव और सटीकता सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है. बीकानेर के कई परिवार दशकों से इस हस्तकला से जुड़े हुए हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रहे हैं. आधुनिक मशीनों के दौर में भी हाथों से की जाने वाली यह कला अपनी अलग पहचान बनाए हुए है. यही पारंपरिक हुनर बीकानेर की लहरिया और डोरिया साड़ियों को देशभर में लोकप्रिय बनाता है. स्थानीय बाजारों से लेकर नेपाल और बांग्लादेश तक इन साड़ियों की मांग लगातार बढ़ रही है.

बीकानेर में तैयार होने वाली लहरिया और डोरिया साड़ियों की यह खूबसूरत श्रृंखला पारंपरिक राजस्थानी संस्कृति और आधुनिक फैशन का शानदार मेल प्रस्तुत करती है. तस्वीर में विभिन्न रंगों, फूलों की डिजाइन और पारंपरिक लहरिया पैटर्न से सजी साड़ियां दिखाई दे रही हैं. हल्के कॉटन और डोरिया कपड़े से बनी ये साड़ियां गर्मी के मौसम में सबसे आरामदायक मानी जाती हैं. सावन, तीज, शादी-विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर इनकी मांग कई गुना बढ़ जाती है. कम कीमत, आकर्षक डिजाइन और टिकाऊ रंगों के कारण हर आयु वर्ग की महिलाएं इन्हें पसंद करती हैं. बीकानेर के बाजारों में इनकी नई वैरायटी लगातार उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे पारंपरिक परिधान आज भी फैशन की दौड़ में सबसे आगे बने हुए हैं.

प्रिंटिंग की अंतिम प्रक्रिया के दौरान लहरिया और डोरिया साड़ियों पर लाल, पीले, नीले और अन्य आकर्षक रंगों का संयोजन किया जाता है. तस्वीर में रंग-बिरंगी साड़ियों की कतार बीकानेर के वस्त्र उद्योग की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है. यहां की गर्म और शुष्क जलवायु रंगों को विशेष चमक और मजबूती प्रदान करती है, जिससे साड़ियों के रंग लंबे समय तक फीके नहीं पड़ते. यही विशेषता इन्हें अन्य क्षेत्रों की साड़ियों से अलग बनाती है. स्थानीय कारीगर पारंपरिक तकनीक और आधुनिक डिजाइन का मेल कर नई-नई वैरायटी तैयार कर रहे हैं. बीकानेर की ये साड़ियां आज राजस्थान के साथ-साथ देश के कई राज्यों और पड़ोसी देशों तक अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं.

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बीकानेर के व्यापारी बलदेव लखानी अपने शोरूम में ग्राहकों को पारंपरिक लहरिया और डोरिया साड़ियों की नई वैरायटी दिखाते हुए. उनका परिवार करीब 80 वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है और पीढ़ी दर पीढ़ी इस कला को आगे बढ़ा रहा है. उनके अनुसार, बीकानेर में तैयार होने वाली साड़ियों की सबसे बड़ी पहचान टिकाऊ रंग, आकर्षक प्रिंटिंग और हल्का कपड़ा है. यहां तैयार कुछ विशेष डिजाइनों को ‘राजा प्रिंट’ के नाम से भी जाना जाता है. इन साड़ियों की देखभाल आसान है और साधारण इस्त्री के बाद इन्हें आसानी से पहना जा सकता है. यही कारण है कि गर्मी के मौसम में इनकी बिक्री सबसे अधिक होती है और महिलाएं इन्हें ‘मिनी एसी साड़ी’ के रूप में पसंद कर रही हैं.

बीकानेर के बाजारों में इन दिनों लहरिया और डोरिया साड़ियों की नई वैरायटी ग्राहकों का ध्यान आकर्षित कर रही है. तस्वीर में अलग-अलग रंगों और डिजाइनों वाली साड़ियों का संग्रह दिखाई दे रहा है. पारंपरिक लहरिया, फूलों की प्रिंट और आधुनिक पैटर्न वाली ये साड़ियां हर वर्ग की महिलाओं की पसंद बन चुकी हैं. इनकी कीमत लगभग 250 रुपये से शुरू होकर 3 हजार रुपये तक है. हल्के कपड़े और आरामदायक बनावट के कारण ये गर्मी के मौसम के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं. तीज, सावन, राखी, शादी-विवाह और अन्य पारिवारिक आयोजनों में इनकी मांग लगातार बढ़ जाती है. बीकानेर की यह पारंपरिक कला आज आधुनिक फैशन के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही है.

शोरूम में सजी रंग-बिरंगी लहरिया और डोरिया साड़ियों का यह संग्रह बीकानेर के बढ़ते वस्त्र कारोबार की सफलता की कहानी बयां करता है. यहां तैयार होने वाली साड़ियां अब राजस्थान तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि देश के कई राज्यों के साथ नेपाल और बांग्लादेश तक भी भेजी जा रही हैं. स्थानीय कारीगरों की मेहनत और व्यापारियों के अनुभव ने इस पारंपरिक उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. हल्का कपड़ा, टिकाऊ रंग और आकर्षक डिजाइन इन साड़ियों की सबसे बड़ी पहचान हैं. आधुनिक फैशन के दौर में भी राजस्थानी संस्कृति की झलक लिए ये साड़ियां महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं.

तस्वीर में रंग-बिरंगी लहरिया और डोरिया साड़ियों का आकर्षक संग्रह दिखाई दे रहा है, जो बीकानेर की पारंपरिक कला और आधुनिक फैशन का शानदार उदाहरण है. हल्के, मुलायम और हवा पार करने वाले कॉटन व डोरिया कपड़े से तैयार होने के कारण ये साड़ियां गर्मी में बेहद आरामदायक मानी जाती हैं. महिलाएं इन्हें अब ‘मिनी एसी साड़ी’ के नाम से भी पहचानने लगी हैं. कम देखभाल, टिकाऊ रंग और आकर्षक डिजाइन के कारण इनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. सावन, तीज, राखी, शादी-विवाह और अन्य मांगलिक अवसरों पर इनकी मांग कई गुना बढ़ जाती है. बीकानेर में तैयार होने वाली ये साड़ियां आज न केवल शहर की सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि पारंपरिक हस्तकला और स्थानीय उद्योग को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही हैं.

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