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अगर निर्जला एकादशी पर दान नहीं कर पाए, तो अब भी कर सकते हैं ये उपाय; मिलेगा पुण्य का लाभ

Last Updated:June 27, 2026, 06:36 IST

Nirjala Ekadashi & Dwadashi 2026 Post Vrat Remedies: साल 2026 की निर्जला एकादशी और द्वादशी तिथि का समापन हो चुका है. करौली के ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक शर्मा के अनुसार, यदि कोई श्रद्धालु इस महाव्रत के दिन विशेष दान-पुण्य करने से चूक गया है, तो वह अब भी जरूरतमंदों को कच्चे चावल, पीली दाल और पीले वस्त्रों का दान कर सकता है. भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करने और दान देने से कुंडली में कमजोर गुरु ग्रह मजबूत होता है, जिससे शिक्षा, विवाह और धन से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं.

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करौली: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी और उसके अगले दिन आने वाली द्वादशी तिथि को सभी व्रतों में सबसे श्रेष्ठ और मोक्षदायी माना जाता है. मान्यता है कि बिना अन्न-जल के भगवान विष्णु की आराधना करने से वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य मिल जाता है. वर्ष 2026 की यह पावन तिथि और इसके पारण की द्वादशी तिथि भी अब संपन्न हो चुकी है. श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान से व्रत रखकर इसका पारण भी कर लिया है. हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किन्हीं कारणों से आप उस समय विशेष उपाय या दान नहीं कर पाए थे, तो इस महाव्रत के आध्यात्मिक प्रभाव और पुण्य को बनाए रखने के लिए आगे भी दान-पुण्य जारी रखा जा सकता है.

करौली के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक शर्मा के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत जितना कठिन है, उसका फल उतना ही व्यापक है. इस व्रत और इसके पारण के समय का सीधा संबंध कुंडली में देवगुरु बृहस्पति (गुरु ग्रह) की स्थिति से होता है. ज्योतिष में गुरु को भाग्य, उच्च शिक्षा, विवाह, संतान और संचित धन का कारक माना गया है. भले ही एकादशी और द्वादशी की तिथियां बीत चुकी हैं, लेकिन भगवान विष्णु के प्रिय मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का नियमित रूप से कम से कम 108 बार जाप शुरू करना अब भी जातक के जीवन की कई बाधाओं को दूर कर सकता है. इससे गुरु ग्रह को बल मिलता है और अटके हुए कार्यों में गति आती है.

चावल और अन्न दान का महत्व: अब भी कर सकते हैं सहयोगपंडित दीपक शर्मा बताते हैं कि एकादशी के दिन जहां चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित होता है, वहीं द्वादशी तिथि पर चावल खाने और दान करने का विशेष विधान है. शास्त्रों में इसके बिना व्रत की पूर्णता अधूरी मानी जाती है. जिन लोगों ने यह व्रत किया था या जो व्रत नहीं भी कर पाए थे, वे अब भी अपने सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों, भिक्षुकों या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को कच्चे चावल, पीली दाल (चना दाल), हल्दी और पीले वस्त्रों का दान कर सकते हैं. यह दान कुंडली के गुरु दोष को शांत करता है, जिससे करियर, व्यापार और सामाजिक मान-सम्मान में सकारात्मक और दूरगामी परिणाम देखने को मिलते हैं.

आर्थिक संकटों से मिलेगी मुक्ति, घर में आएगी सुख-समृद्धिधार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए किया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता. तिथि बीतने के बाद भी श्रद्धापूर्वक किए गए परोपकार के कार्यों से घर-परिवार में चल रहे मानसिक तनाव और कलह का नाश होता है. व्यापार या नौकरी में लंबे समय से आ रही आर्थिक परेशानियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं और संचित धन में वृद्धि होती है. इसलिए यदि आप निर्जला एकादशी और द्वादशी के मुख्य दिनों पर विशेष दान करने से चूक गए थे, तो आज ही के दिन से दान-पुण्य की शुरुआत कर अपने सौभाग्य को नई दिशा दे सकते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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