कोटा ऑक्सीटोसिन केस ने पकड़ा अंतरराष्ट्रीय तूल! WHO की एंट्री से मचा हड़कंप, भारत सरकार से मांगी पूरी रिपोर्ट

Last Updated:June 27, 2026, 10:17 IST
Kota Oxytocin Case: कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत और फेल ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए भारत सरकार और CDSCO से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. WHO ने इंजेक्शन के उस विशेष बैच की जांच रिपोर्ट, रिकॉल स्टेटस और वैश्विक सप्लाई चेन की जानकारी मांगी है. विवादों में घिरी जैक्सन लैबोरेट्री के 11 अन्य उत्पाद पहले से ही WHO के रिकॉर्ड में दर्ज हैं, जिससे यह मामला अब पूरी तरह वैश्विक निगरानी में आ चुका है.
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कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत के मामले में WHO ने भारत सरकार से रिपोर्ट तलब की है. ( AI Image )
Kota Oxytocin Case: कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसूताओं की मौत और कथित रूप से फेल पाए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का मामला अब बेहद गंभीर हो चुका है. यह स्थानीय विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा संज्ञान लेते हुए भारत सरकार और केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट तलब की है. इस कदम के बाद से भारतीय दवा नियामक संस्थाओं और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुख्यालय ने भारत सरकार से न केवल इस विवादित इंजेक्शन की गुणवत्ता और जांच का पूरा ब्योरा मांगा है, बल्कि इसके वैश्विक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है. WHO ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या दूषित या सब-स्टैंडर्ड पाए गए इसी बैच के इंजेक्शन की सप्लाई दुनिया के दूसरे देशों में भी की गई थी. संगठन ने इस मामले में जारी किए गए रिकॉल ऑर्डर, अलर्ट और अब तक की गई प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन मांगी है.
जैक्सन लैबोरेट्री के पुराने रिकॉर्ड पर भी टिकी नजरें
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे मामले के केंद्र में रही दवा निर्माता कंपनी जैक्सन लैबोरेट्री (Jackson Laboratories) के उत्पाद पहले भी विवादों में रहे हैं. WHO के आंतरिक रिकॉर्ड में इस लैबोरेट्री के 11 अन्य उत्पाद पहले से ही दर्ज हैं और उनसे जुड़े विभिन्न मामलों की जानकारी वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी के पास मौजूद है. यही वजह है कि कोटा में हुई प्रसूताओं की मौत के बाद यह मामला वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की सीधी निगरानी में आ गया है.
प्रसूताओं की मौत और ऑक्सीटोसिन के कनेक्शन की होगी गहन जांच
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का इस्तेमाल मुख्य रूप से प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए किया जाता है. कोटा मेडिकल कॉलेज में इसके कथित फेल होने के बाद कई प्रसूताओं की जान चली गई थी. WHO ने अब प्रसूताओं की मौत और इस इंजेक्शन के संभावित संबंध को लेकर भारत सरकार से वैज्ञानिक और स्पष्ट जानकारी मांगी है. इस अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के बाद अब देश के भीतर दवा निर्माण मानकों और उनकी गुणवत्ता जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
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