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Rajasthan Fertilizer New Rules | Rajasthan Fertilizer New Rules 2026 for Farmers in Hindi | खाद के नए नियम

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खाद खरीदने वाले किसान जरूर पढ़ें! राजस्थान सरकार ने बदली पूरी व्यवस्था

Last Updated:June 27, 2026, 06:27 IST

Rajasthan Fertilizer New Rules: राजस्थान सरकार ने किसानों को राहत देते हुए अनुदानित खाद वितरण के नियमों में बड़ा बदलाव किया है. अब खाद के लिए फार्मर आईडी को प्राथमिकता दी जाएगी, लेकिन आईडी न होने पर किसान जमाबंदी, एफआरए पट्टा या बटाईनामा दिखाकर भी खाद ले सकेंगे. भीलवाड़ा कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन के अनुसार, इस व्यवस्था से बटाईदारों और किराएदार किसानों को आसानी होगी. खाद की कालाबाजारी, जमाखोरी और दूसरे राज्यों में तस्करी रोकने के लिए पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें निगरानी करेंगी, तथा जबरन अन्य सामान बेचने वाले विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई होगी.

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खाद खरीदने वाले किसान जरूर पढ़ें! राजस्थान सरकार ने बदली पूरी व्यवस्थाZoom Rajasthan Fertilizer New Rules: किसानों को खाद मिलने के बदले नियम, जमाबंदी दिखाकर भी मिलेगी यूरिया-डीएपी

भीलवाड़ा: राजस्थान के भीलवाड़ा सहित पूरे प्रदेश में फसल की सुरक्षा और बेहतर उत्पादन के लिए एक अच्छी व गुणवत्तापूर्ण उर्वरक हर किसान की सबसे पहली जरूरत होती है. खाद एक ऐसी महत्वपूर्ण सामग्री है जो फसलों के बंपर उत्पादन में रीढ़ की हड्डी मानी जाती है. लेकिन अब प्रदेश के किसानों के लिए खाद (उर्वरक) मिलने के नियम पूरी तरह से बदल गए हैं. राज्य सरकार ने किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए अनुदानित उर्वरकों (सब्सिडी वाली खाद) के वितरण की नियमावली में बड़ा बदलाव किया है. इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरतमंद और वास्तविक किसानों को सही समय पर खाद मिल सके और बाजार में होने वाली खाद की कृत्रिम किल्लत व कालाबाजारी जैसी गंभीर समस्याओं पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके.

सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के अनुसार, अब समितियों या दुकानों से खाद लेने के लिए सबसे पहले ‘फार्मर आईडी’ (Farmer ID) को प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि, जिन छोटे या दूरदराज के किसानों की फार्मर आईडी अभी तक किसी कारणवश नहीं बन पाई है, उन्हें भी बिल्कुल परेशान होने की जरूरत नहीं है. सरकार के नए व स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन किसानों के पास फार्मर आईडी मौजूद नहीं है, वे अपनी कृषि भूमि से जुड़े जरूरी दस्तावेज दिखाकर भी आसानी से अनुदानित खाद प्राप्त कर सकेंगे. इसके लिए किसान अपनी जमीन की जमाबंदी, एफआरए पट्टा, बटाईनामा या किरायानामा जैसे वैध दस्तावेज प्रस्तुत कर सकते हैं. इस लचीले नियम से बटाई पर खेती करने वाले किसानों, किराएदार किसानों और दिवंगत किसानों के कानूनी वारिसों को भी बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे आसानी से खाद मिल सकेगी.

भीलवाड़ा कृषि विभाग का बयान: किसानों को मिलेगी बड़ी राहत, समय पर होगी बुवाईभीलवाड़ा कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन ने इस नई व्यवस्था पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस नीति का एकमात्र मकसद किसानों को बिना किसी प्रशासनिक या तकनीकी परेशानी के समय पर खाद उपलब्ध कराना है. पहले के समय में कई वास्तविक किसानों को पुख्ता दस्तावेजों की कमी या अन्य जटिल नियमों के कारण सीजन के समय खाद लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, जिससे उनकी फसल प्रभावित होती थी. अब यह नई पारदर्शी व्यवस्था लागू होने से ऐसे सभी पीड़ित और जरूरतमंद किसानों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी. समय पर खाद और उर्वरक मिलने से खेतों में फसलों की बुवाई भी प्रभावित नहीं होगी, जिससे किसान सही समय पर अपनी फसल चक्र को पूरा कर सकेंगे.

कालाबाजारी और तस्करी रोकने के लिए पुलिस-कृषि विभाग की संयुक्त टीमें तैनातसंयुक्त निदेशक विनोद कुमार जैन ने आगे बताया कि सरकार ने खाद की कालाबाजारी, अवैध जमाखोरी और कृत्रिम संकट पैदा करने वाले बिचौलियों को रोकने के लिए बेहद सख्त कदम उठाए हैं. हर साल खरीफ और रबी सीजन के पीक समय के दौरान कई जिलों से खाद की अवैध बिक्री और राजस्थान से दूसरे पड़ोसी राज्यों में खाद की तस्करी की शिकायतें लगातार सामने आती थीं. इसे पूरी तरह से रोकने के लिए अब कृषि विभाग और पुलिस की विशेष संयुक्त टीमें हर ब्लॉक स्तर पर निगरानी करेंगी. विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों में कड़े पुलिस चेक पोस्ट लगाए जाएंगे ताकि राजस्थान के भोले-भाले किसानों के हक की अनुदानित खाद किसी भी सूरत में दूसरे राज्यों की सीमाओं में न पहुंच सके.

टैगिंग या जबरन दूसरा सामान बेचने वाले दुकानदारों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाईअक्सर देखा जाता है कि खाद की किल्लत का फायदा उठाकर कई निजी विक्रेता किसानों को यूरिया या डीएपी के साथ जबरन कोई दूसरा गैर-जरूरी कीटनाशक या अन्य उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करते हैं, जिसे कृषि की भाषा में ‘टैगिंग’ कहा जाता है. इस पर सरकार ने पूरी तरह से स्थिति स्पष्ट कर दी है कि खाद खरीदते समय किसानों पर किसी भी अन्य उत्पाद को जबरन खरीदने का दबाव कतई नहीं बनाया जा सकेगा. यदि कोई भी लाइसेंसधारी विक्रेता या सहकारी समिति खाद के साथ दूसरा सामान खरीदने के लिए मजबूर करती है या अधिक दाम वसूल कर कालाबाजारी करती पाई गई, तो उसका लाइसेंस तुरंत निरस्त कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी गड़बड़ी की शिकायत तुरंत संबंधित अधिकारियों को दर्ज कराएं ताकि खरीफ सीजन में पारदर्शिता बनी रहे और उत्पादन को बढ़ाया जा सके.

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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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