आईपीओ में नहीं मिला शेयर तो एनएफओ में लगाएं पैसा, 14 जुलाई तक निवेश का मौका, कैसे काम करती है यह स्कीम

Last Updated:July 01, 2026, 18:04 IST
Investment Tips : एक निवेशक के तौर पर सबकी यही ख्वाहिश रहती है कि आईपीओ में शेयर का अलॉटमेंट हो जाए. अगर आपको आईपीओ न मिले तो एनएफओ में हाथ आजमा सकते हैं. आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल ने म्यूचुअल फंड की नई स्कीम लॉन्च की है. इसमें 30 जून से 14 जुलाई तक निवेश किया जा सकता है.आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का एनएफओ 30 जून को खुला है.
नई दिल्ली. शेयर बाजार में हर महीने कोई न कोई कंपनी खुद को लिस्ट कराने के लिए आईपीओ लॉन्च करती है. निवेशक इस पर दांव भी लगाते हैं लेकिन सभी को शेयरों का आवंटन नहीं मिल पाता है. ऐसे निवेशकों के लिए पैसे कमाने का एक और मौका है, न्यू फंड ऑफर यानी एनएफओ. यह भी बिलकुल आईपीओ की तरह होता है, बस इसमें स्टॉक्स की जगह म्यूचुअल फंड यूनिट मिलती है. ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने ICICI प्रूडेंशियल मल्टी-एसेट एक्टिव फंड ऑफ फंड (FOF) नाम से एनएफओ लॉन्च किया है. यह एक ओपन-एंडेड ‘फंड ऑफ फंड्स’ स्कीम है जो मुख्य रूप से एक्टिव इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम, डेट-ओरिएंटेड स्कीम और गोल्ड ETF/सिल्वर ETF की यूनिट्स में निवेश करती है.
ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर शंकरन नरेन का कहना है कि यह स्कीम मौजूदा बाजार की स्थितियों, वैल्यूएशन संकेतों और मैक्रो-इकोनॉमिक ट्रेंड्स के आधार पर इन एसेट क्लास में पैसे लगाएगी. नरेन का कहना है कि अलग-अलग एसेट क्लास आर्थिक और मार्केट साइकल के दौरान अलग-अलग तरह से परफॉर्म करते हैं. लिहाजा अनुशासित एसेट एलोकेशन लंबे समय के निवेश का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाता है. ICICI प्रूडेंशियल मल्टी-एसेट एक्टिव फंड ऑफ फंड (FOF) एक ही पोर्टफोलियो में एक्टिव इक्विटी, डेट और गोल्ड ETF/सिल्वर ETF को एक साथ लाता है. इससे मार्केट की स्थितियों के बदलने पर अलोकेशन को एक्टिव रूप से एडजस्ट करने के लिए हमारे खास वैल्यूएशन और मैक्रो-इकोनॉमिक मॉडल का इस्तेमाल करता है.
जैसे हालात-वैसे रिएक्ट करती है यह स्कीमनरेन ने बताया कि इस स्कीम का मकसद निवेशकों को एक व्यवस्थित और रिसर्च-आधारित निवेश प्रक्रिया के माध्यम से विभिन्न एसेट क्लास में मौजूद अवसरों का लाभ उठाने में मदद करना है. यह स्कीम इकनॉमिक साइकल, महंगाई, ब्याज दरों और मार्केट के मूड के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास का परफॉर्मेंस अलग-अलग होता है. यह स्कीम यह अनुमान लगाने की कोशिश नहीं करती कि अगली बार कौन-सी एसेट क्लास बेहतर परफॉर्मेंस देगी, बल्कि यह इक्विटी, डेट और गोल्ड ETF/सिल्वर ETF में उनकी तुलनात्मक प्रदर्शन के आधार पर निवेश का अलोकेशन करती है.
तीन तरह के पोर्टफोलियो बनाती है स्कीम
लंबे समय में संपत्ति बनाने की क्षमता के लिए इक्विटी में निवेश.
स्थिर कमाई के लिए डेट वाली संपत्तियों में निवेश करना होगा.
डाईवर्सिफिकेशन और महंगाई से बचाव के लिए सोने और चांदी में निवेश.
एक्टिव इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम की यूनिट्स में 30–80% तक निवेश होता है.
एक्टिव डेट-ओरिएंटेड स्कीम की यूनिट्स में 10–60% तक निवेश होता है.
गोल्ड ETF या सिल्वर ETF में 10–30% तक निवेश कर सकते हैं.
जरूरत के हिसाब से कर सकते हैं बदलावस्कीम का पोर्टफोलियो, स्कीम के ‘स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट’ के प्रावधानों के तहत बदला जा सकता है. एसेट अलोकेशन और इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ‘स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट’ के अनुसार होगी. AMC, गोल्ड/सिल्वर ETF में एक्सपोजर लेते समय मार्केट की स्थिति का मूल्यांकन करेगी. मौजूदा मार्केट की स्थितियों को देखते हुए गोल्ड ETF में एक्सपोजर एसेट अंडर मैनेजमेंट के 5% तक सीमित रहेगा और समय-समय पर इसकी समीक्षा की जाएगी.
कितने रुपये से हो सकता है निवेशइस एनएफओ में कम से कम 1,000 रुपये का निवेश किया जा सकता है. इसके विकल्प में डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान शामिल हैं. इसका बेंचमार्क 55 फीसदी निफ्टी-200 टीआरआई + 35% निफ्टी कंपोजिट डेट इंडेक्स + 7% सोने की घरेलू कीमत + 3% चांदी की घरेलू कीमत हैं. डाटा से पता चलता है कि इक्विटी, डेट और गोल्ड के बीच लीडरशिप समय-समय पर बदलती रहती है, जो अलग-अलग तरह के एसेट में निवेश (डाइवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन) के महत्व को पुख्ता करती है.
About the AuthorPramod Kumar Tiwari
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
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