भारत का ये शहर क्यों कहलाता है Vaccine Capital of the World? दुनिया की हर तीसरी वैक्सीन यहीं बनती है

Last Updated:July 01, 2026, 15:24 IST
Hyderabad News : हैदराबाद सिर्फ आईटी और फार्मा उद्योग के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी बड़ी भूमिका के लिए भी जाना जाता है. यही वजह है कि इसे ‘वैक्सीन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है. बायो-एशिया समिट और वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में इस्तेमाल होने वाली लगभग 33 प्रतिशत वैक्सीन का उत्पादन अकेले हैदराबाद में होता है. यहां स्थित भारत बायोटेक, बायोलॉजिकल ई, शांता बायोटेक्निक्स और इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स जैसी कंपनियां हर साल अरबों वैक्सीन डोज तैयार कर दुनिया के कई देशों तक पहुंचाती हैं. हैदराबाद की जीनोम वैली, जिसे भारत का पहला संगठित बायोटेक क्लस्टर माना जाता है, इस उपलब्धि की सबसे बड़ी ताकत है. अत्याधुनिक रिसर्च लैब, वैश्विक स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर और वैज्ञानिकों की मौजूदगी ने इस शहर को वैक्सीन अनुसंधान और उत्पादन का अंतरराष्ट्रीय केंद्र बना दिया है. यही कारण है कि वैश्विक हेल्थ सेक्टर में हैदराबाद की पहचान लगातार मजबूत होती जा रही है.
हैदराबाद. जब भी भारत में दवाओं या मेडिकल साइंस की बात होती है, तो लोगों के जेहन में बड़े-बड़े रिसर्च सेंटरों की तस्वीर उभरती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का एक ऐसा शहर भी है, जिसे सिर्फ देश का ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का ‘वैक्सीन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’ कहा जाता है? यह गौरवशाली पहचान तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद को मिली है.
ग्लोबल हेल्थ सेक्टर में हैदराबाद का दबदबा इतना मजबूत है कि दुनिया भर में बच्चों और वयस्कों को लगने वाली कुल वैक्सीनों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा यहीं तैयार होता है. बायो-एशिया समिट में साझा की गई जानकारी के अनुसार, दुनिया में इस्तेमाल होने वाली करीब 33 प्रतिशत वैक्सीनों का उत्पादन अकेले हैदराबाद में होता है. हर साल यहां से अरबों वैक्सीन डोज दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजी जाती हैं, जो करोड़ों लोगों की जिंदगी बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं. डब्ल्यूएचओ, गावी ग्लोबल वैक्सीन अलायंस और अन्य अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन डेटा के अनुसार, यूनिसेफ और विकासशील देशों को भेजी जाने वाली बड़ी संख्या में वैक्सीन डोज हैदराबाद की कंपनियों से सप्लाई होती हैं.
दिग्गज कंपनियों ने दिलाई वैश्विक पहचानहैदराबाद को यह मुकाम दिलाने में यहां मौजूद विश्वस्तरीय बायोटेक और वैक्सीन कंपनियों की सबसे बड़ी भूमिका रही है. कोरोना महामारी के दौरान स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन विकसित करने वाली भारत बायोटेक का मुख्यालय भी हैदराबाद में ही है. इसके अलावा बायोलॉजिकल ई, शांता बायोटेक्निक्स और इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स जैसी प्रमुख लाइफ साइंस कंपनियां भी वर्षों से यहीं से अपना उत्पादन संचालित कर रही हैं.
जीनोम वैली बनी सबसे बड़ी ताकतइस उपलब्धि के पीछे हैदराबाद के बाहरी इलाके में स्थित जीनोम वैली का भी अहम योगदान माना जाता है. यह भारत का पहला और सबसे व्यवस्थित बायोटेक क्लस्टर है. अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और दुनिया भर के वैज्ञानिकों की मौजूदगी ने इस क्षेत्र को मेडिकल रिसर्च और वैक्सीन डेवलपमेंट का वैश्विक केंद्र बना दिया है.
पुणे और हैदराबाद में क्यों होती है तुलना?अक्सर लोग पुणे और हैदराबाद के बीच भ्रमित हो जाते हैं, क्योंकि पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया स्थित है, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल वैक्सीन निर्माता कंपनी माना जाता है. लेकिन जब बात पूरे बायोटेक इकोसिस्टम, कई बड़ी कंपनियों की मौजूदगी और सबसे अधिक वैरायटी की वैक्सीन के उत्पादन की होती है, तो हैदराबाद का पलड़ा भारी नजर आता है. यही वजह है कि दुनियाभर के कई हेल्थ एक्सपर्ट्स हैदराबाद को ही ‘वैक्सीन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड’ के रूप में पहचान देते हैं.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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