Sirohi News | Rajasthan News

Last Updated:July 01, 2026, 20:35 IST
Sirohi News : सिरोही जिले की एक महान शख्सियत को यहां लोक देवता के रूप में पूजा जाता है. इस महान शख्सियत ने 1857 की क्रांति में अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था. जी हां, हम बात कर रहे है. रोवाड़ा गांव के सार्दुलसिंह देवड़ा की. सिरोही के वरिष्ठ जन डूंगर सिंह के मुताबिक सार्दुलसिंह द्वारा अंग्रेजों के खिलाफ चलाए गए अभियान की वजह से इस विद्रोह में गहरी छाप छोड़ी.
सिरोही जिले के रोवाडा गांव में जन्मे सार्दुलसिंह देवड़ा सिरोही, जालोर और पाली जिलों में लोक देवता जुजार बावसी के रूप में पूजे जाते हैं. हाल ही में सिरोही के मंडवारिया गांव में सादुलसिंहजी देवड़ा का भव्य मंदिर बना हैं. इसके अलावा कई गांवों सरदुलसिंह के स्थान बने हुए हैं, जहां आस्था के साथ भक्त उनकी पूजा करते हैं.
सार्दुल सिंह केवल सिरोही के महान सख्शियत ना होकर क्षेत्र के हजारों लोगों की आस्था का केंद्र और लोकदेवता भी है. उनकी जीवनी में वीरता के साथ राष्ट्रभक्ति भी झलकती है. सादुलसिंह ने 1857 के पहले स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह करते हुए पश्चिमी राजस्थान में अंग्रेजों के खिलाफ एक योद्धा के रूप में भूमिका निभाई थी.
जैसे राजस्थान मारवाड़ में आउवा के ठाकुर खुशाल सिंह ने ब्रिटिश हुकूमत को खत्म करने का काम किया था, वैसे ही सिरोही रियासत और आसपास के इलाकों में सादुलसिंहजी देवड़ा अंग्रेजों के लिए डर का सबब बन गए थे. सार्दुल सिंह देवड़ा ने कभी विदेशी शासन को स्वीकार नहीं किया. उन्होंने अजमेर स्थित टॉडगढ़ किले पर जबरदस्त हमला करते हुए क्रांतिकारियों को कैद से मुक्त करवाने का काम किया था.
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इसके बाद सार्दुल सिंह ने नसीराबाद छावनी पर हमला कर दिया था. सार्दुल सिंह के नेतृत्व में एरिनपुरा छावनी के सैनिकों ने भी विद्रोह शुरू कर दिया. कुछ समय बाद उन्होंने माउंट आबू के तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन कोनोली को शिवगंज के एक बंगले में कैद कर लिया था. यह अंग्रेजी हुकूमत के लिए बड़ी शर्मनाक बात थी. जिसके बाद अंग्रेजी शासन ने सार्दुल सिंह को पकड़ने के प्रयास शुरू कर दिए.
इसके लिए अंग्रेजों ने सीधे युद्ध कर पकड़ने के बजाय धोखे से पकड़ने की तरकीब लगाई. 1882 के आसपास धोखे से अंग्रेजों ने सार्दुल सिंह को बंदी बना लिया गया. अंग्रेजों ने उनके साथ क्रूरता करते हुए गोलियों से छलनी कर दिया था. इसके बाद तत्कालीन शासन ने रोवाड़ा गांव पर कब्जा कर लिया था.
सादुलसिंहजी के इस बलिदान को क्षेत्र की जनता ने बहुत ही सम्मान देते हुए झुंझार के रूप में लोकदेवता पूजन करने लगे. सिरोही, जालोर और पाली के कई गांवों में सार्दुलसिंह जी के स्थान बने हुए है. भक्तों में सार्दुलसिंह जी के प्रति गहरी आस्था है.
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