Rajasthan

कम पानी में होगी तगड़ी कमाई! आदिवासी किसानों की बदल रही किस्मत, जानिए तिल की खेती का पूरा फॉर्मूला

Last Updated:July 01, 2026, 19:18 IST

Agriculture News: सिरोही के सियावा गांव में कृषि विभाग की पहल पर 25 आदिवासी किसान, खासकर महिलाएं, तिल की आधुनिक खेती सीख रही हैं, विशेषज्ञ इसे कम लागत वाली लाभकारी फसल बता रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार तिल की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक तथा रबी सीजन में फरवरी से 15 मार्च तक की जा सकती है. तिल की खेती के लिए रेतीली, दोमट और अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.

सिरोही. जिले के आदिवासी किसान अब पारंपरिक खेती के साथ तिल की खेती की ओर भी तेजी से बढ़ रहे हैं. कृषि विभाग की पहल पर जिले के सियावा गांव में 25 किसानों को तिल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के मंडोर कृषि केंद्र के डॉ. बी.आर. चौधरी ने हाल ही में आदिवासी महिला किसानों को उन्नत तकनीक से तिल की खेती का प्रशिक्षण दिया. इस दौरान महिला काश्तकारों को उन्नत बीज, नैनो डीएपी खाद और खरपतवारनाशक भी उपलब्ध कराए गए, ताकि वे आसानी से आधुनिक तरीके से खेती कर सकें.

कृषि अधिकारी डॉ. बी.आर. चौधरी और डॉ. राकेश चौधरी ने बताया कि तिल कम पानी और कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छा उत्पादन देने वाली लाभकारी फसल है. यदि इसकी खेती वैज्ञानिक तरीके और आधुनिक प्रबंधन के साथ की जाए, तो किसान कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

तिल की खेती में इन बातों का रखें ध्यानविशेषज्ञों के अनुसार तिल की बुवाई जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक तथा रबी सीजन में फरवरी से 15 मार्च तक की जा सकती है. तिल की खेती के लिए रेतीली, दोमट और अच्छे जल निकास वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. बुवाई से पहले खेत की 2 से 3 बार गहरी जुताई करनी चाहिए, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए. ऐसा नहीं करने पर बारिश के दौरान खेत में जलभराव होने की संभावना रहती है, जिससे फसल को नुकसान पहुंच सकता है. एक एकड़ में करीब 1.5 से 3 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है. बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. खेत की तैयारी के दौरान अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का उपयोग करना लाभदायक रहता है. वहीं बुवाई के समय सिंगल सुपर फॉस्फेट और पोटाश का प्रयोग भी किया जा सकता है. तिल की फसल को कम पानी की आवश्यकता होती है. खरीफ सीजन में बारिश नहीं होने पर सिंचाई करनी चाहिए, जबकि गर्मी की फसल में 4 से 5 बार सिंचाई आवश्यक होती है.

पत्तियां पीली होने पर करें कटाईविशेषज्ञों का कहना है कि जब तिल के पौधों की पत्तियां पीली होकर झड़ने लगें और डोड़ियां हरी से हल्की पीली दिखाई देने लगें, तब फसल की कटाई कर लेनी चाहिए. कटाई के बाद फसल के गट्ठर बनाकर कुछ दिनों तक खेत में सुखाया जाता है. इसके बाद झटकने पर साफ बीज आसानी से अलग हो जाते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान उन्नत और वैज्ञानिक तरीके से तिल की खेती करें, तो एक एकड़ से आसानी से 4 से 6 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. अच्छी गुणवत्ता वाले तिल की बाजार में बेहतर कीमत मिलने से किसानों को अच्छा आर्थिक लाभ भी मिलता है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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