Rajasthan

बीकानेर के कलाकार मदनलाल सुथार ने लकड़ी से बनाया ऊंट गाड़ा, कीमत ₹1.10 लाख

Last Updated:July 01, 2026, 10:36 IST

Bikaner Wood Craft News: बीकानेर के प्रसिद्ध कलाकार मदनलाल सुथार ने दो महीने की कड़ी मेहनत से लकड़ी और लोहे का उपयोग कर एक बेहद अनूठा और वास्तविक दिखने वाला ऊंट गाड़ा तैयार किया है. पूरी तरह हाथों से तराशी गई इस कलाकृति की कीमत 1.10 लाख रुपये है. इसमें राजस्थान के ग्रामीण परिवेश और पारंपरिक कृषि औजारों को बेहद बारीकी से दर्शाया गया है. यह हस्तशिल्प कला प्रेमियों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है और राजस्थानी संस्कृति का प्रतीक बन चुका है.

बीकानेर के प्रसिद्ध कलाकार मदनलाल सुथार ने अपनी महीनों की मेहनत और वर्षों के अनुभव से लकड़ी का एक बेहद खूबसूरत और अनोखा ऊंट गाड़ा तैयार किया है, जिसकी कीमत करीब 1 लाख 10 हजार रुपये है और इसे बनाने में लगभग दो महीने का समय लगा है. राजस्थान की पारंपरिक जीवनशैली और ग्रामीण परिवेश को दर्शाने वाली इस कलाकृति में ऊंट, गाड़ा, मालिक और उससे जुड़े ज्यादातर हिस्से लकड़ी से बने हैं, जबकि कुछ ढांचों में लोहे का इस्तेमाल किया गया है. मदनलाल आमतौर पर ऑर्डर मिलने पर ही ऐसे ऊंट गाड़े तैयार करते हैं और उनकी यह बेहतरीन हस्तशिल्प कला अब बीकानेर के अलावा दूसरे शहरों में भी काफी पसंद की जा रही है.

लकड़ी से बने इस ऊंट की सजावट और उसकी काठी को कलाकार मदनलाल सुथार ने इतनी बारीकी से तैयार किया है कि पहली नजर में यह बिल्कुल असली प्रतीत होती है. उन्होंने ऊंट की पीठ पर रखी काठी, जंजीर, घंटियां और अन्य पारंपरिक सामान को हर छोटे हिस्से को हाथों से तराशकर वास्तविक स्वरूप देने का प्रयास किया है, जिससे लकड़ी और लोहे के संतुलित उपयोग वाली यह कलाकृति और भी आकर्षक बन गई है. राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और रेगिस्तानी जीवन की पहचान को दर्शाने वाली यह बारीक कारीगरी हर देखने वाले को अपनी ओर आकर्षित करती है, जो कला प्रेमियों के लिए सिर्फ एक शोपीस नहीं, बल्कि प्रदेश की विरासत का एक खूबसूरत प्रतीक है.

शीशम की मजबूत लकड़ी से तैयार इस ऊंट गाड़े का पिछला हिस्सा कलाकार मदनलाल सुथार की उत्कृष्ट कारीगरी को दर्शाता है, जिसमें गाड़े की बनावट, पहियों का संतुलन, किनारों की बारीक नक्काशी और अंदर रखे लकड़ी के औजार इसे पूरी तरह पारंपरिक स्वरूप प्रदान करते हैं. हर हिस्से को हाथों से अलग-अलग तराशकर जोड़ने के बाद अंतिम चरण में दी जाने वाली चमकदार फिनिश इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देती है. यही कारण है कि हाथों से तैयार होने वाली यह अनूठी कलाकृति महंगी होने के बावजूद कला प्रेमियों के बीच काफी लोकप्रिय है और विशेष ऑर्डर मिलने पर ही बनाई जाती है.

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बीकानेर के कलाकार मदनलाल सुथार की यह संपूर्ण कलाकृति राजस्थान की ग्रामीण संस्कृति का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है, जिसमें बर्मा लकड़ी, शीशम और लोहे के उपयोग से ऊंट, ऊंट गाड़ा, गाड़े के मालिक और आगे चलते छोटे पशु को बेहद खूबसूरती के साथ तैयार किया गया है. हर पात्र और वस्तु में पारंपरिक जीवन की झलक दिखाने वाली इस कलाकृति का उद्देश्य केवल एक शोपीस बनाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक राजस्थान की लोक संस्कृति और पारंपरिक परिवहन व्यवस्था को पहुंचाना भी है. यही वजह है कि यह बारीक कारीगरी देखने वाले हर व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करती है और बीकानेर की कला को एक नई पहचान दिला रही है.

इस तस्वीर में मदनलाल सुथार की पूरी कलाकृति का सुंदर दृश्य दिखाई देता है, जिसमें लकड़ी से तैयार ऊंट, पारंपरिक गाड़ा और मालिक का ढांचा बनाने के लिए वे सबसे पहले लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों को तराशते हैं और फिर उन्हें जोड़कर बारीक नक्काशी व फिनिशिंग के जरिए इसे वास्तविक रूप देते हैं. मदनलाल अब तक तीन लकड़ी के ऊंट और 30 से 40 गाड़े तैयार कर चुके हैं, जिनकी मांग लगातार बढ़ने के कारण देशभर से लोग विशेष ऑर्डर देकर इन्हें खरीद रहे हैं. महीनों की कड़ी मेहनत से तैयार होने वाली उनकी यह अनूठी हस्तशिल्प कला बीकानेर की लोक विरासत को एक नई पहचान दिलाने का काम कर रही है.

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