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पिता से कहा था जल्द घर आऊंगा, 20 मिनट बाद आई शहादत की खबर; सीकर का लाल देश पर हुआ कुर्बान

Last Updated:July 02, 2026, 20:43 IST

Sikar News : सीकर के लांस हवलदार सुरेश कुमार गेनन पठानकोट में शहीद हो गए. 20 मिनट पहले पिता से बात की थी. पूरे गांव में शोक है. सुरेश कुमार वर्ष 2011 में भारतीय थल सेना में भर्ती हुए थे. वह 3 जाट रेजिमेंट में लांस हवलदार के पद पर तैनात थे. सेना में रहते हुए उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं. ड्यूटी के दौरान ही उन्होंने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया.पिता से कहा आऊंगा, 20 मिनट बाद आई शहादत की खबर... सीकर का लाल देश पर कुर्बानZoomपठानकोट में ड्यूटी के दौरान शहीद हुए लांस हवलदार सुरेश कुमार गेनन,कल पहुंचेगा पार्थिव देह

सीकर. सीकर जिले के दांतारामगढ़ क्षेत्र के हरीपुरा गांव में गुरुवार का दिन कभी नहीं भूलने वाला बन गया. जिस घर में बेटे के छुट्टी लेकर आने का इंतजार था, वहां अब उसके पार्थिव शरीर के पहुंचने की तैयारी हो रही है. गांव के वीर सपूत लांस हवलदार सुरेश कुमार गेनन ड्यूटी के दौरान पंजाब के पठानकोट में 1 जुलाई 2026 को शहीद हो गए. सैन्य अधिकारियों ने उन्हें बैटल कैजुअल्टी घोषित किया है. जैसे ही शहादत की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक छा गया. हर किसी की जुबान पर बस एक ही बात थी कि जिसने देश की रक्षा करते हुए अपना जीवन दिया, वह अब तिरंगे में लिपटकर अपने गांव लौटेगा.

परिवार के लिए यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी. बताया गया कि हादसे से करीब 20 मिनट पहले ही सुरेश कुमार ने अपने पिता से मोबाइल पर बात की थी. बातचीत के दौरान उन्होंने जल्द गांव आने की बात कही थी. परिवार भी उनके आने का इंतजार कर रहा था. लेकिन कुछ ही देर बाद सेना की ओर से शहादत की सूचना मिली. इस खबर ने परिवार के साथ-साथ पूरे गांव को गम में डुबो दिया. गांव के लोग लगातार शहीद के घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं.

2011 में सेना में हुए थे भर्ती, अब पूरे सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कारसुरेश कुमार वर्ष 2011 में भारतीय थल सेना में भर्ती हुए थे. वह 3 जाट रेजिमेंट में लांस हवलदार के पद पर तैनात थे. सेना में रहते हुए उन्होंने पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाईं. ड्यूटी के दौरान ही उन्होंने देश की सेवा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया. सैन्य अधिकारियों के अनुसार शहीद का पार्थिव शरीर गुरुवार को उनके पैतृक गांव हरीपुरा पहुंचेगा. पार्थिव देह के गांव पहुंचने के बाद अंतिम यात्रा रैली निकाली जाएगी. इसके बाद पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. गांव के लोग बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं.

पीछे छोड़ गए पूरा परिवार, गांव में शोक का माहौलशहीद सुरेश कुमार अपने पीछे पत्नी सीमा देवी, 9 वर्षीय पुत्र पियूष और अपने माता-पिता को छोड़ गए हैं. परिवार का कहना है कि उन्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि जिस बेटे से कुछ देर पहले बात हुई, उसकी आवाज आखिरी बार सुन रहे हैं. शहादत की खबर के बाद हरीपुरा गांव ही नहीं, पूरे दांतारामगढ़ क्षेत्र में शोक की लहर है. लोग शहीद को अंतिम विदाई देने के लिए लगातार गांव पहुंच रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सुरेश कुमार ने देश की रक्षा करते हुए जो बलिदान दिया है, उसे हमेशा याद रखा जाएगा. अब पूरा गांव अपने वीर सपूत को नम आंखों से अंतिम सलाम देने की तैयारी कर रहा है.

About the AuthorAnand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें

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