दक्षिणी चीन सागर में दादागिरी बर्दाश्त नहीं, ड्रैगन पर भारत-जापान ने दिखाई सख्ती, इंडो-पैसिफिक में हर चाल पर नजर

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दक्षिणी चीन सागर में दादागिरी बर्दाश्त नहीं, ड्रैगन पर भारत-जापान की सख्ती
Last Updated:July 02, 2026, 20:40 IST
पीएम मोदी और सनाए तकाइची के साझा बयान में साफ कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में नेविगेशन और ओवरफ्लाइट की संप्रभु स्वतंत्रता तथा सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी एकतरफा और उग्र कार्रवाई का भारत और जापान पूरी ताकत से कड़ा विरोध करते हैं. यह साफ तौर पर चीन के लिए चेतावनी है. हालांकि, दोनों देशों ने अपने बयान में चीन का नाम नहीं लिया.
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भारत-जापान ने कहा कि पूर्वी और दक्षिणी चीन सागर में एकतरफा कार्रवाई बर्दाश्त नहीं.
नई दिल्ली. भारत और जापान ने चीन की समुद्री विस्तारवादी नीति पर बिना नाम लिए तीखा प्रहार करते हुए साफ कर दिया है कि पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर में किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई, सैन्य दबाव और यथास्थिति बदलने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी. दोनों देशों ने साझा बयान जारी कर चीन की आक्रामक गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई और स्पष्ट संदेश दिया कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ताकत के दम पर नियम नहीं बदले जा सकते.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची की बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की मौजूदा स्थिति बेहद चिंताजनक है. दोनों नेताओं ने नौवहन और हवाई आवागमन की स्वतंत्रता तथा सुरक्षा को खतरे में डालने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध किया. भारत और जापान ने यह भी दोहराया कि बल प्रयोग, धमकी या दबाव के जरिए यथास्थिति बदलने का कोई भी प्रयास अस्वीकार्य है. साझा बयान में कहा गया कि क्षेत्र में बढ़ते सैन्यीकरण से तनाव बढ़ रहा है और इससे पूरे इंडो-पैसिफिक की शांति और स्थिरता प्रभावित हो सकती है.
दोनों देशों ने स्पष्ट किया कि समुद्री विवादों का समाधान केवल शांतिपूर्ण वार्ता और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर होना चाहिए. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के सिद्धांतों का सम्मान करने पर जोर देते हुए कहा कि सभी देशों को नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था का पालन करना चाहिए. भारत और जापान का यह साझा रुख ऐसे समय सामने आया है, जब दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय दावों को लेकर कई देशों ने चिंता जताई है. दोनों देशों का यह संदेश संकेत देता है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में नियमों को ताकत के बल पर बदलने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक देश मिलकर जवाब देंगे.
About the AuthorRakesh Ranjan Kumar
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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