भर्ती से बाहर किए गए अभ्यर्थियों के पक्ष में हाईकोर्ट, जानिए सुनवाई में क्या कहा

Last Updated:July 02, 2026, 15:23 IST
Rajasthan SI Re Bharti 2021: राजस्थान हाईकोर्ट ने सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 के 100 से अधिक अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उन्हें री-भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया. राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस गणेशराम मीना की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश दिया. अदालत ने संबंधित अभ्यर्थियों को री-भर्ती परीक्षा की भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए.
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Rajasthan SI Recruitment 2021: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 100 से ज्यादा अभ्यर्थियों को मिली राहत, अब भर्ती में होंगे शामिल
जयपुर. राजस्थान में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 की री-भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद में अब हाईकोर्ट ने अहम आदेश दिया है. इस फैसले से उन 100 से ज्यादा अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें री-भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था. अदालत ने साफ कहा कि याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाए. इस आदेश के बाद लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए आगे का रास्ता खुल गया है.
यह मामला उस शर्त को लेकर था, जिसके तहत री-भर्ती परीक्षा में केवल उन्हीं अभ्यर्थियों को पात्र माना गया था जो पहले की भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे. जिन अभ्यर्थियों ने मूल विज्ञापन के अनुसार आवेदन तो किया था, लेकिन पूर्व परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे, उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया था. इसी फैसले को चुनौती देते हुए 100 से अधिक अभ्यर्थियों ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
हाईकोर्ट ने दिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देशराजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस गणेशराम मीना की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश दिया. अदालत ने संबंधित अभ्यर्थियों को री-भर्ती परीक्षा की भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए. इस मामले में किरण सहित 100 से अधिक अभ्यर्थियों ने याचिका दायर की थी. उनकी ओर से एडवोकेट नितिन पारीक, करिश्मा पारीक, दीपक गुप्ता, निशा चौधरी और भारत गुप्ता सहित अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत में पक्ष रखा.
याचिका में नई पात्रता शर्तों पर उठाए गए सवालयाचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने 3 फरवरी 2021 को जारी मूल विज्ञापन के अनुसार आवेदन किया था. बाद में जब री-भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई तो एक नई पात्रता शर्त जोड़ दी गई. इस शर्त के अनुसार केवल वही अभ्यर्थी पात्र माने गए जो पहले आयोजित भर्ती परीक्षा में शामिल हुए थे. याचिका में कहा गया कि यह नई शर्त संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करती है. अभ्यर्थियों का कहना था कि समान अवसर का अधिकार सभी को मिलना चाहिए और नई पात्रता शर्त के कारण उन्हें बिना उचित आधार के बाहर कर दिया गया.
रद्द परीक्षा के आधार पर बाहर करना गलत बतायासुनवाई के दौरान यह भी दलील दी गई कि जिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने को पात्रता का आधार बनाया गया, वह परीक्षा पहले ही रद्द की जा चुकी है. ऐसे में रद्द हो चुकी परीक्षा को आधार बनाकर किसी अभ्यर्थी को नई भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखना उचित नहीं माना जा सकता. इसी तर्क पर अदालत ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में आदेश देते हुए उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए. इस फैसले के बाद 100 से अधिक अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है और अब उनके लिए री-भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है. मामला अब आगे भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण की ओर बढ़ेगा.
About the AuthorAnand Pandey
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें
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