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Can Europe’s Heatwave Affect Indian Monsoon? | यूरोप की खौफनाक गर्मी से थर-थर कांपा भारत, क्या मानसून को निगल जाएगा यह खतरनाक ओमेगा ब्लॉक? | Weather

नई दिल्ली: यूरोप में इस समय कुदरत का सबसे भयंकर रूप देखने को मिल रहा है. वहां की भीषण हीटवेव ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. फ्रांस और जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है. स्लोवाकिया और हंगरी में भी लोग इस रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से बेहाल हैं. इस महाविनाशकारी गर्मी के पीछे आसमान में बना एक ओमेगा ब्लॉक जिम्मेदार है. यह एक ऐसा जिद्दी वेदर पैटर्न है जो गर्म हवा को एक जगह लॉक कर देता है. अब सबसे बड़ा डर यह है कि क्या हजारों किलोमीटर दूर यूरोप में मची यह तबाही भारतीय मानसून को भी तहस-नहस कर सकती है. वैज्ञानिक इस अनोखे कनेक्शन को देखकर पूरी तरह हैरान हैं. वायुमंडल में होने वाली यह हलचल भारत के मौसम पर भी सीधा असर डाल सकती है. आइए जानते हैं कि क्या वाकई यूरोप की यह आग हमारे मानसून को पूरी तरह सुखा देगी.

क्या है यह जानलेवा ओमेगा ब्लॉक जिसने यूरोप को भट्टी बना दिया है?

ओमेगा ब्लॉक असल में आसमान में बनने वाला एक बेहद मजबूत हाई प्रेशर एरिया है. यह दो लो प्रेशर एरिया के बीच में बुरी तरह फंस जाता है. इसके फंसने से आसमान में ग्रीक अक्षर ओमेगा जैसी एक आकृति बन जाती है. यह पैटर्न बहुत ही धीमी रफ्तार से आगे बढ़ता है. इस वजह से इसके नीचे मौजूद इलाकों का मौसम कई दिनों या हफ्तों तक बिल्कुल नहीं बदलता है.

इसके केंद्र में मौजूद हाई प्रेशर साफ आसमान और तेज धूप लेकर आता है. ऊपर से नीचे की तरफ आने वाली हवा नीचे उतरते ही गर्म और शुष्क होने लगती है. यह प्रक्रिया बादलों को बनने से पूरी तरह रोक देती है. बारिश न होने के कारण जमीन लगातार तपती रहती है. तापमान रोज एक नया रिकॉर्ड बनाने लगता है.

रीडिंग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉक्टर अक्षय देवरास ने कहा, ‘हाई प्रेशर की वजह से आसमान बिल्कुल साफ रहता है और धूप सीधे जमीन पर पड़ती है.’ ‘नीचे गिरती हुई हवा गर्म होकर बादलों को बनने नहीं देती है.’ ‘यही वजह है कि हीटवेव लगातार गंभीर रूप धारण कर लेती है.’

रोसबी वेव्स का यह खतरनाक जाल भारत तक कैसे पहुंच सकता है?

यूरोप की यह भीषण गर्मी भले ही एक जगह थमी हुई दिखे लेकिन हमारा एटमॉस्फेयर किसी सीमा को नहीं मानता है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी के वैज्ञानिक डॉक्टर राजीब चट्टोपाध्याय ने एक बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि ओमेगा ब्लॉक का सीधा कनेक्शन हमारी जेट स्ट्रीम और रोसबी वेव्स से होता है.
रोसबी वेव्स असल में जेट स्ट्रीम में आने वाले बहुत बड़े और धीमे मोड़ होते हैं. यह मोड़ पृथ्वी के घूमने और ठंडी-गर्म हवा के टकराव से पैदा होते हैं. यह लहरें आसमान में हाई प्रेशर और लो प्रेशर के क्षेत्र बनाती हैं. यही दबाव पूरी दुनिया में तूफानों को मोड़ने और बारिश कराने का काम करता है.
यह तरंगे जब उत्तरी गोलार्ध में आगे बढ़ती हैं तो टेलीकनेक्शन्स पैदा करती हैं. इसका मतलब है कि हजारों किलोमीटर दूर के मौसम आपस में जुड़ जाते हैं. नॉर्थ अटलांटिक में उठने वाली कोई हलचल यूरोप और एशिया के मौसम को हिला सकती है. इसी वजह से दुनिया के एक कोने की गर्मी दूसरे कोने में आफत ला सकती है.

क्या वाकई यूरोप का ओमेगा ब्लॉक भारतीय मानसून को पूरी तरह निगल जाएगा?

इस बड़े खतरे को लेकर वैज्ञानिकों के बीच गहरी रिसर्च चल रही है. डॉक्टर अक्षय देवरास का कहना है कि बड़े वेदर सिस्टम टेलीकनेक्शन्स के जरिए दूर दराज के मौसम को बदल सकते हैं. हालांकि अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो यह साबित करे कि मौजूदा ओमेगा ब्लॉक भारत के मानसून को नुकसान पहुंचाएगा.

लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि पिछले साल जून में ऐसा ही एक हादसा हो चुका है. पिछले साल जून के महीने में भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब दो हफ्तों के लिए अटक गया था. उस समय मिड-लेटीट्यूड में बने एक ओमेगा ब्लॉक ने हवा के पूरे पैटर्न को बदल दिया था.

उस ब्लॉक की वजह से भारत के पश्चिमी सूखे इलाकों से बेहद गर्म और सूखी हवा देश के भीतर आ गई थी. इस सूखी हवा ने मानसून के आगे बढ़ने के लिए जरूरी नमी के प्रवाह को पूरी तरह तोड़ दिया था. इसलिए वैज्ञानिक इस बात से इनकार नहीं कर रहे हैं कि हवा की सटीक स्थिति मानसून को बिगाड़ सकती है.

सर्दियों में आने वाली भयानक कोल्ड वेव के पीछे भी क्या यही विलेन है?

ओमेगा ब्लॉक का असर सिर्फ गर्मियों तक ही सीमित नहीं रहता है. डॉक्टर राजीब चट्टोपाध्याय के मुताबिक हाई और मिड-लेटीट्यूड में बनने वाले यह ब्लॉक भारत में कड़कड़ाती ठंड के लिए भी जिम्मेदार होते हैं. इनकी वजह से सर्दियों के मौसम में उत्तर and मध्य भारत में भीषण कोल्ड वेव चलने लगती है.
यह ब्लॉक आसमान में बहने वाली सबट्रॉपिकल वेस्टरली जेट की दिशा को बुरी तरह मोड़ देते हैं. इस वजह से उत्तर की बर्फीली हवाएं तेजी से भारत के मैदानी इलाकों की तरफ बढ़ने लगती हैं. भारत में आने वाले वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भी इसी वेदर पैटर्न से प्रभावित होते हैं. हालांकि यह पूरा कनेक्शन बहुत ही पेचीदा और इनडायरेक्ट होता है.
मानसून को प्रभावित करने वाले और भी कई बड़े खिलाड़ी मौजूद हैं. डॉक्टर अक्षय देवरास ने बताया कि अल नीनो और इंडियन ओशन डिपोल जैसे महासागरीय बदलाव मानसून पर सबसे ज्यादा असर डालते हैं. यह बड़े वेदर ड्राइवर पूरे सीजन को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं. ओमेगा ब्लॉक जैसी घटनाएं इनके सामने काफी छोटी और अस्थाई होती हैं.

क्या क्लाइमेट चेंज इस आसमानी आफत को और ज्यादा खतरनाक बना रहा है?

पूरी दुनिया में लगातार बढ़ती गर्मी के बीच रिसर्चर्स एक बहुत ही जरूरी सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं. क्या क्लाइमेट चेंज इन ब्लॉकिंग घटनाओं को और ज्यादा आक्रामक बना रहा है. डॉक्टर अक्षय देवरास का मानना है कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि क्लाइमेट चेंज हीटवेव को बढ़ा रहा है.

ग्लोबल वार्मिंग के कारण आज के समय में दुनिया का बेसलाइन तापमान पहले से ही बहुत ज्यादा ऊपर उठ चुका है. जब ऐसे गर्म माहौल में ओमेगा ब्लॉक बनता है तो वह रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पैदा करता है. तापमान पहले के मुकाबले बहुत तेजी से 40 डिग्री के पार चला जाता है. हालांकि इस पर अभी और ज्यादा रिसर्च होना बाकी है.

वैज्ञानिकों के अनुसार अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि क्लाइमेट चेंज इन दूरगामी कनेक्शनों को मजबूत कर रहा है या नहीं. लेकिन एक बात बिल्कुल तय है कि गर्म होता एटमॉस्फेयर इन वेदर पैटर्न के असर को कई गुना बढ़ा देता है. आने वाले समय में यह आफत पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है.

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